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टेंडर प्रक्रिया में बड़ा अंतर: NHAI 30 दिन में पूरी करता प्रक्रिया, MPRDC महीनों तक लटकाता-ठेकेदारों का आरोप, पारदर्शिता पर सवाल

“To be intimated later” जैसे प्रावधानों से भ्रम, 120 दिन की वैधता में फंसी पूंजी_ नियमों के पालन के दावे पर उठे सवाल

भोपाल/नई दिल्ली। टोल प्लाजा संचालन और यूजर फी कलेक्शन से जुड़े टेंडरों की प्रक्रिया को लेकर National Highways Authority of India (NHAI) और मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। जहां एक ओर MPRDC खुद को केंद्र सरकार और Ministry of Road Transport and Highways (MoRTH) के नियमों का पालन करने वाला बताता है, वहीं जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है।

NHAI: तय समय, स्पष्ट प्रक्रिया

NHAI द्वारा जारी टेंडर शेड्यूल में हर चरण की स्पष्ट समयसीमा तय होती है। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार—

बिड सबमिशन के अगले दिन या तीसरे दिन टेंडर ओपन

30 दिनों के भीतर LOA (Letter of Award) जारी

7 दिन में परफॉर्मेंस सिक्योरिटी

2–3 दिन में एग्रीमेंट और हैंडओवर

यानी पूरी प्रक्रिया करीब एक महीने में पूरी कर ली जाती है। इससे ठेकेदारों को स्पष्टता और वित्तीय सुरक्षा मिलती है।

MPRDC: अधूरी जानकारी, लंबी प्रतीक्षा

इसके उलट MPRDC के टेंडर दस्तावेजों में—

बिड ओपनिंग (फाइनेंशियल) की तारीख “To be intimated later on लिखी जाती है

टेंडर की वैधता 90 से 120 दिन तक रखी जाती है

LOA और एग्रीमेंट की कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं

इससे पूरी प्रक्रिया 3 से 4 महीने तक खिंच जाती है, जिससे ठेकेदारों की पूंजी लंबे समय तक फंसी रहती है।

ठेकेदारों का आरोप: आर्थिक शोषण

टेंडर में भाग लेने वाले ठेकेदारों का कहना है कि_ *बैंक गारंटी और EMD लंबे समय तक ब्लॉक रहती है, *अन्य प्रोजेक्ट्स में निवेश के अवसर छिन जाते हैं और बाजार की अनिश्चितता बढ़ती है।

इनके अनुसार यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं बल्कि आर्थिक दबाव बनाने वाली बन गई है।

ठेकेदारों और विशेषज्ञों की सुधार की दिशा में मांग है कि_

NHAI की तरह समयबद्ध (Time-bound) टेंडर प्रक्रिया लागू हो

हर चरण की स्पष्ट तारीख और समय अनिवार्य हो

LOA, बैंक गारंटी और एग्रीमेंट की अधिकतम समय सीमा तय की जाए।

टोल टेंडर जैसे संवेदनशील मामलों में पारदर्शिता और समयबद्धता बेहद जरूरी है। NHAI जहां एक उदाहरण पेश कर रहा है, वहीं MPRDC की वर्तमान प्रक्रिया न केवल ठेकेदारों को नुकसान पहुंचा रही है बल्कि प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता पर भी असर डाल सकती है।