घटना पर विभाग का पक्ष आने से बदली तस्वीर..
ग्वालियर। स्वर्णरेखा पर बना रहे एलिवेटेड रोड के बीम/गार्डर टूटने की घटना ने शुरुआत में कई सवाल खड़े कर दिए थे। प्रत्यक्षदर्शियों और मौके की स्थिति के आधार पर सामने आई तस्वीरों में गार्डर लकड़ी की तरह टूटा हुआ दिखाई दे रहा था, जिससे निर्माण गुणवत्ता को लेकर आशंकाएं जताई गईं।
हालांकि, घटना के समय विभागीय अधिकारी उपलब्ध नहीं थे या स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आ सकी, जिसके चलते प्रारंभिक खबर एकतरफा तथ्यों पर आधारित रही। अब विभाग का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर कुछ हद तक साफ हुई है, लेकिन जांच पूरी होने तक सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं।
क्या कहता है विभाग का पक्ष
संभाग सेतु के कार्यपालन यंत्री योगेंद्र यादव के अनुसार, यह घटना रात के समय हुई थी। इसके बाद पूरी रात मौके पर तकनीकी कार्यवाही चली। गिरे हुए गार्डर को हटाने के लिए पहले हैमर से कंक्रीट तोड़ा गया और फिर गैस वेल्डिंग के जरिए अंदर के स्टील (सरिया) को काटकर बीम को दो हिस्सों में विभाजित किया गया।
उनका कहना है कि इसी प्रक्रिया के कारण अगली सुबह गार्डर लकड़ी की तरह टूटा हुआ नजर आया और गैस कटिंग के चलते सरिया भी स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था, जिससे भ्रम की स्थिति बनी।

उन्होंने यह भी बताया कि यह बीम/गार्डर 100 टन से अधिक वजनी है और इसकी डिजाइन इस तरह की जाती है कि अपनी निर्धारित स्थिति में यह अत्यधिक मजबूत रहता है। सामान्य हालात में यह नहीं टूटता, लेकिन तिरछे या असंतुलित गिरने की स्थिति में क्षतिग्रस्त हो सकता है।
फिर भी क्यों उठ रहे हैं सवाल
दूसरी ओर, घटना के बाद सामने आई तस्वीरें और शुरुआती हालात ने आम लोगों और विशेषज्ञों के बीच निर्माण गुणवत्ता को लेकर संदेह पैदा किया है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि यदि बीम इतनी मजबूत थी, तो उसके गिरने की स्थिति कैसे बनी और क्या सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार भोपाल से एक विशेष टीम इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है। फिलहाल विभाग तकनीकी कारणों को घटना की वजह बता रहा है, वहीं दूसरी ओर जांच रिपोर्ट के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ऐसे में अंतिम निष्कर्ष आने तक न तो पूरी तरह लापरवाही से इनकार किया जा सकता है और न ही गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों को शिरे से नजरअंदाज किया जा सकता है। इन हालातों में फिलहाल बिना जांच निष्कर्ष के गुणवत्ता पर भारी भरकम सवाल उठाना या भविष्य को लेकर आशंका व्यक्त करना उचित नहीं माना जा रहा है।
