पेट्रोल-डीजल और गैस पर टैक्स घटाने की मांग, सूचना आयुक्त के रिक्त पदों पर भी उठाए सवाल
भोपाल 10 मार्च 2026। उमंग सिंघार, नेता प्रतिपक्ष मध्य प्रदेश विधानसभा ने मंगलवार को अपने निवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में विजयपुर प्रकरण, अंतरराष्ट्रीय हालात के कारण बढ़ती महंगाई और सूचना आयुक्त की नियुक्ति जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।
विजयपुर मामले में न्यायालय के फैसले का सम्मान
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मुकेश मल्होत्रा के विजयपुर मामले में न्यायालय के फैसले का कांग्रेस सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में न्यायिक प्रक्रिया सर्वोपरि है और जिला न्यायालय से लेकर सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया तक न्याय पाने का अधिकार सभी को है। उन्होंने कहा कि मुकेश मल्होत्रा के लिए भी सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे खुले हैं और कानूनी सलाह लेकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।
सिंघार ने भाजपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या भाजपा दबाव की राजनीति कर माहौल बनाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा चुनाव से डरती है और जनता के बीच जाने से बचती है।
पुराने मामलों में देरी पर उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि नरोत्तम मिश्रा के कथित पेड न्यूज मामले में वर्षों से फैसला लंबित है। वहीं निर्मला सप्रे प्रकरण में भी न्यायालय के नोटिस के बाद ही सुनवाई की बात सामने आई। उन्होंने सवाल उठाया कि इन मामलों में इतनी देरी क्यों हो रही है।
अंतरराष्ट्रीय हालात से महंगाई बढ़ने की आशंका
अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंघार ने कहा कि ईरान–इज़राइल संघर्ष के कारण वैश्विक हालात तेजी से बदल रहे हैं और इसका असर महंगाई पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि केवल समीक्षा बैठकों से जनता को राहत नहीं मिलती, बल्कि ठोस फैसले लेने की जरूरत है।
पेट्रोल-डीजल और गैस पर टैक्स घटाने की मांग
सिंघार ने केंद्र सरकार से मांग की कि पेट्रोल, डीज़ल और गैस सिलेंडर पर लगाए गए भारी टैक्स में कटौती की जाए। उनका कहना था कि टैक्स कम करने से ईंधन की कीमतें घटेंगी और आम जनता को महंगाई से सीधी राहत मिलेगी।
उन्होंने कहा कि सरकार को यह तय करना होगा कि वह तेल कंपनियों को फायदा पहुंचाना चाहती है या महंगाई से जूझ रही जनता को राहत देना चाहती है।
सूचना आयुक्त की नियुक्ति पर आपत्ति
नेता प्रतिपक्ष ने मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर हुई बैठक पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तीन पदों के लिए प्रक्रिया शुरू की गई थी, लेकिन केवल दो पद भरे जा रहे हैं, जिससे सूचना के अधिकार के तहत मिलने वाली सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी रिक्त पदों को जल्द भरना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को सूचना पाने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।
