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फर्जी बिल और प्रमाण-पत्रों का बड़ा खेल ! लोक शिक्षण संचालनालय के तीन-तीन पत्रों के बाद भी नहीं जागे विभाग

DRDO Approved की अनदेखी, संदिग्ध बायोडाइजेस्टर खरीद पर गंभीर सवाल_ तीसरे स्मरण पत्र में कड़ी चेतावनी

पीडब्ल्यूडी, भवन विकास निगम और पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन पर उठे सवाल

भोपाल। मध्यप्रदेश में निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़े का बड़ा मामला सामने आ रहा है। लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल द्वारा जारी लगातार तीन पत्रों ने पीडब्ल्यूडी, मप्र भवन विकास निगम और मप्र पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन   विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

संविदाकारों/ठेकेदारों द्वारा फर्जी प्रमाण-पत्र और बिल प्रस्तुत करने की शिकायत के बावजूद संबंधित विभागों की चुप्पी अब संदेह के घेरे में है।

क्या है मामला..

03 फरवरी 2026 को जारी पहले पत्र में स्पष्ट रूप से बताया गया था कि ग्वालियर की एक निजी कंपनी द्वारा शिकायत की गई है कि कुछ ठेकेदार उनके नाम से फर्जी बायोडाइजेस्टर संबंधी प्रमाण-पत्र और बिल लगा रहे हैं, जबकि वे उनकी संस्था द्वारा जारी ही नहीं किए गए।

इतना ही नहीं, संचालनालय ने पहले ही निर्देश दिए थे कि बायोडाइजेस्टर की खरीदी केवल DRDO Approved संस्थाओं से ही की जाए।

नियमों की खुली अनदेखी

20 फरवरी 2026 को जारी स्मरण पत्र में भी यह स्पष्ट किया गया कि:

कई निर्माण कार्यों में DRDO Approved संस्थाओं के बजाय अन्य जगहों से खरीदी की गई सामग्री का उपयोग किया गया।

प्रस्तुत दस्तावेजों की प्रामाणिकता संदिग्ध है।

विभाग द्वारा मांगी गई जानकारी अब तक उपलब्ध नहीं कराई गई।

तीसरा स्मरण पत्र: सख्त लहजा, गंभीर संकेत

09 अप्रैल 2026 को जारी तृतीय स्मरण पत्र में संचालनालयसंचालनालय का पत्र ने साफ शब्दों में कहा कि_*यह मामला अत्यंत गंभीर है, *बार-बार पत्र और ई-मेल भेजने के बावजूद जानकारी नहीं दी गई, *विभागीय स्तर पर इसे गंभीरता से लिया गया है।

संचालनालय ने तत्काल प्रभाव से_ सभी संबंधित रिपोर्ट, कार्यवाही का विवरण, प्रमाण-पत्रों और बिलों की प्रतियां उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

जानकारों के अनुसार सबसे बड़ा सवाल_जब संचालनालय तीन-तीन बार पत्र लिख चुका है, तो आखिर जिम्मेदार अधिकारी चुप क्यों हैं? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर मिलीभगत का मामला?फर्जीवाड़े के इस खेल में कितने बड़े स्तर तक लोग शामिल हैं?

विशेषज्ञों की माने तो यह ह मामला सिर्फ कागजी गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों में बड़े स्तर के भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह घोटाला और बड़ा रूप ले सकता है!