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रसूख के आगे नियम बेबस ! अवैध बिल्डिंग में धड़ल्ले से चल रहा ‘अपार’ डायग्नोस्टिक सेंटर

4125 की अनुमति पर खड़ा कर दिया 11 हजार वर्गफीट का साम्राज्य

ग्वालियर। शहर के कंपू क्षेत्र में अवैध निर्माण पर प्रशासन की सख्ती के दावों की पोल खुलती नजर आ रही है। नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग की अनुमति की खुली धज्जियां उड़ाते हुए एक बहुमंजिला इमारत में ‘अपार डायग्नोस्टिक सेंटर’ नाम से सीटी स्कैन, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें खुलेआम संचालित हो रही हैं, जबकि यह भवन खुद ही गंभीर रूप से अवैध निर्माण का उदाहरण बताया जा रहा है।

सबसे हैरानी की बात यह है कि टीएंडसीपी द्वारा करीब एक वर्ष पहले जिस बहुमंजिला इमारत को अवैध घोषित कर कार्रवाई के आदेश दिए गए थे, उसी भवन में आज भी “अपार” डायग्नोस्टिक सेंटर के नाम से सीटी स्कैन, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचें धड़ल्ले से संचालित हो रही हैं। आदेश और नोटिस जारी होने के बावजूद कार्रवाई न होना जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहा है।  जिससे निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

4125 वर्गफीट की अनुमति, बना डाला 11 हजार वर्गफीट का कॉम्प्लेक्स

दस्तावेजों के अनुसार टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगरअपार बिल्डिंग निगम से इस भवन के लिए 3575 वर्गफीट नेट प्लॉट एरिया पर B+G+2 (बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और दो मंजिल) का निर्माण करने की अनुमति दी गई थी। कुल मिलाकर लगभग 4125 वर्गफीट निर्माण की स्वीकृति दी गई थी। लेकिन दस्तावेजों की माने तो भवन मालिकों ने इस अनुमति को पूरी तरह नजरअंदाज कर अपने नक्शा नवीस के माध्यम से पूरी इमारत का गैरकानूनी निर्माण खड़ा कर दिया।

दस्तावेज एवं सूत्रों के अनुसार
*स्वीकृति में बेसमेंट बनाना अनिवार्य था, लेकिन बेसमेंट बनाया ही नहीं गया।
*टेरेस को खुला छोड़ने के नियम को भी दरकिनार कर दिया गया।
*इतना ही नहीं, एक अतिरिक्त मंजिल भी खड़ी कर दी गई।

भवन निर्माण का नक्शा

इस तरह जहां 4125 वर्गफीट निर्माण की अनुमति थी, वहां करीब 11 हजार वर्गफीट का निर्माण खड़ा कर दिया गया, जो साफ तौर पर नियमों की खुली अवहेलना माना जा रहा है।

नोटिस पर नोटिस, कार्रवाई शून्य

स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन छोटे-छोटे मकानों पर तो बुलडोजर चलाने में देर नहीं करता, लेकिन प्रभावशाली लोगों की बहुमंजिला अवैध इमारतों पर कार्रवाई फाइलों में ही दफन हो जाती है।

सूत्र बताते हैं कि भवन मालिक अनिला गुप्ता और डां. सुबोध गुप्ता को पहले भी नोटिस जारी कर अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए गए थे और सुनवाई की तारीख भी तय की गई थी। इसके बावजूद आज तक न तो अवैध हिस्सों को हटाया गया और न ही डायग्नोस्टिक सेंटर का संचालन बंद कराया गया।

निगम अधिकारी भी दे रहे गोलमोल जवाब

मामले में जब नगर निगम के अधिकारियों से सवाल किए गए तो जवाब भी उतने ही गोलमोल मिले।
भवन अधिकारी राजीव सोनी का कहना है कि_“जोनल अधिकारी मौके की पैमाइश करने गए हुए हैं। उसके बाद आगे की कार्रवाई और प्रक्रिया क्या होगी, यह बताया जाएगा।”

वहीं जोनल अधिकारी सत्येंद्र सोलंकी ने कहा कि “सामने वाले पक्ष को सुनने के लिए नोटिस दिया गया है और 7 दिन का समय दिया गया है। उसके बाद भवन अधिकारी या वरिष्ठ अधिकारी तय करेंगे कि क्या कार्रवाई की जाएगी।”
लेकिन जब मीडिया ने बार-बार पूछा कि इतने बड़े अवैध निर्माण पर सिर्फ नोटिस क्यों, तो उन्होंने कंपाउंडिंग से जुड़े नोटिस का हवाला देते हुए गोल-गोल जवाब दिए।

सूत्रों की माने तो निजी स्वार्थ के चलते कहीं ना कहीं जर्नल स्तर पर इस मामले पर धूल डालने की नापाक कोशिश बार-बार की जा रही है। मामले को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा है कि यदि निगम नियमों के अनुसार कार्रवाई करे तो इस भवन के बड़े हिस्से को तोड़ना पड़ेगा। लेकिन जिस तरह से बार-बार नोटिस और सुनवाई का हवाला दिया जा रहा है, उससे यह आशंका भी जताई जा रही है कि कहीं कानूनी कंपाउंडिंग से पहले ही “व्यक्तिगत कंपाउंडिंग” का रास्ता तो नहीं तलाशा जा रहा।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब 4125 वर्गफीट की अनुमति पर 11 हजार वर्गफीट की इमारत खड़ी कर दी गई, तो क्या इसमें नोटिस नोटिस का खेल में सिर्फ अधिकारी अपना हित साधते रहेंगे अथवा कभी बड़ी कार्रवाई भी की जएगी ?