ब्रेकिंग

सागर में जहरीली शराब से 11 मौतें, उज्जैन कनेक्शन ने बढ़ाई चिंता, क्या म.प्र.जहरीली शराब का केंद्र है!

सागर से गुजरात तक जहरीली शराब का नेटवर्क! इंदौर की अवैध फैक्ट्री से भी जुड़े उज्जैन के तारों की चर्चा

भोपाल 6 सितंबर 2026। मध्यप्रदेश में जहरीली और नकली शराब का कारोबार अब केवल अवैध बिक्री का मामला नहीं रह गया है। सागर जिले के बंडा में जहरीली शराब पीने से 11 लोगों की मौत और 24 से अधिक लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की घटना ने एक बार फिर आबकारी विभाग की निगरानी और प्रदेश में सक्रिय अवैध शराब नेटवर्क पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्या मध्यप्रदेश अब जहरील शराब का केंद्र बन चुका है?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहरीली शराब आखिर गांवों तक पहुंची कैसे? यदि इसका निर्माण और सप्लाई किसी संगठित नेटवर्क के जरिए हो रही थी तो स्थानीय पुलिस और आबकारी तंत्र को इसकी भनक क्यों नहीं लगी?

बंडा की त्रासदी इसलिए भी गंभीर है क्योंकि मध्यप्रदेश में जहरीली शराब से मौतों का यह पहला मामला नहीं है। 2021 में भी जहरीली शराब ने 11 लोगों की जान ली थी। उस समय कार्रवाई और सख्ती के तमाम दावे किए गए, लेकिन पांच साल बाद फिर वही तस्वीर सामने है।

गुजरात की जहरीली शराब में उज्जैन कनेक्शन, इंदौर की फैक्ट्री पर भी सवाल

गुजरात में हाल में सामने आए जहरीली शराब के मामले ने मध्यप्रदेश के लिए और गंभीर सवाल खड़े किए। वहां की जांच में उज्जैन से जुड़े लोगों और सप्लाई नेटवर्क का कनेक्शन सामने आने की बात सामने आई थी। शराबबंदी वाले गुजरात तक यदि अवैध शराब या उसका कच्चा माल मध्यप्रदेश के रास्ते पहुंच रहा था, तो अंतरराज्यीय नेटवर्क पर निगरानी का सवाल स्वाभाविक है।

तुलसी नगर इंदौरइसी बीच इंदौर की तुलसी नगर कॉलोनी में पकड़ी गई अवैध शराब फैक्ट्री ने भी आबकारी तंत्र की निगरानी पर सवाल खड़े किए थे, सूत्रों की माने तो इसी कॉलोनी में इंदौर के आबकारी विभाग के कंट्रोलर एवं सहायक कंट्रोलर का निवास होना बताया जाता है। इसकी जांच सबंधी पूरे मामले में जांच अधिकारी एवं सहायक आयुक्त आबकारी इंदौर की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है!

स्थानीय स्तर पर इस मामले के भी उज्जैन से जुड़े होने की चर्चाएं सामने आई थीं। यदि इन दोनों मामलों की कड़ियां जांच में जुड़ती हैं तो सागर की घटना को महज स्थानीय स्तर पर बनी जहरीली शराब का मामला मानना मुश्किल होगा।सवाल यह है कि इंदौर, उज्जैन, सागर और गुजरात-क्या इन घटनाओं के पीछे कोई बड़ा सप्लाई नेटवर्क है? और यदि है तो उसकी जड़ तक जांच क्यों नहीं पहुंचती?

अवैध शराब के मामले में अक्सर स्थानीय स्तर पर आरोपी पकड़ लिए जाते हैं, कुछ वाहन और शराब जब्त कर ली जाती है और मामला आगे बढ़ जाता है। लेकिन शराब का निर्माण कहां हुआ, कच्चा माल किसने उपलब्ध कराया, सप्लाई किसने की, पैसा किस तक पहुंचा और पूरे नेटवर्क को संरक्षण कौन दे रहा था—इन सवालों के जवाब अक्सर सामने नहीं आते।

कुणाल चौधरी ने मांगा आबकारी मंत्री और कमिश्नर पर एक्शन

कुणाल चौधरी की कॉन्फ्रेंसकांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने बंडा की घटना को सरकार और आबकारी तंत्र की गंभीर विफलता बताया है। उनका आरोप है कि यदि अवैध शराब की सप्लाई की जानकारी पहले से थी तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

चौधरी ने आबकारी मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे तथा आबकारी कमिश्नर को तत्काल निलंबित करने की मांग की है। उन्होंने जहरीली शराब के पूरे नेटवर्क की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच, जिम्मेदार वरिष्ठ अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई तथा अवैध शराब और कथित संरक्षण के नेटवर्क की उच्चस्तरीय जांच की मांग भी की है। उनका सवाल सीधे सरकार से है—हर बार जहरीली शराब से मौत के बाद छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई होती है, लेकिन उस नेटवर्क की जवाबदेही ऊपर तक कब तय होगी?

बंडा में हुई मौतों के बाद अब सबसे जरूरी जांच केवल यह नहीं है कि जहरीली शराब किसने बेची। असली जांच यह होनी चाहिए कि वह बनी कहां, आई कहां से और उसके पीछे पूरा नेटवर्क कौन चला रहा था। यदि सागर की जहरीली शराब भी किसी बड़े सप्लाई नेटवर्क की कड़ी है, तो कार्रवाई कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित रखना आने वाले किसी और बंडा का इंतजार करने जैसा होगा।