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करीब ₹3,000 करोड़ के रेल प्रोजेक्ट पर सवाल: रिश्वत केस में घिरी कंपनी, विजयपुर सेक्शन की गुणवत्ता की जांच कब?

झांझरिया निर्माण लिमिटेड का नाम ₹31.93 लाख के कथित रिश्वत प्रकरण में; श्योपुर तक ट्रेन और निर्माण की गुणवत्ता पर रेलवे से जवाबदेही की मांग

ग्वालियर/विजयपुर। ग्वालियर–श्योपुर ब्रॉडगेज रेल परियोजना में श्योपुर तक ट्रेन पहुंचाने की प्रतीक्षा के बीच निर्माण एजेंसी झांझरिया निर्माण लिमिटेड से जुड़े कथित रिश्वत प्रकरण ने रेलवे की ठेका व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

साथ ही विजयपुर–वीरपुर–श्योपुर खंड में मिट्टी के तटबंधों, ट्रैक के आसपास कटाव, प्लेटफॉर्म में दरारों और पुल-पुलियाओं में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। ऐसे में विजयपुर–वीरपुर–श्योपुर खंड में निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था की निष्पक्ष जांच जरूरी हो गई है।

₹31.93 लाख के रिश्वत प्रकरण में हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, सीबीआई ने झांझरिया निर्माण लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुशील झांझरिया, कर्मचारी मनोज पाठक और रेलवे के मुख्य अभियंता विशाल आनंद से जुड़े मामले में ₹31,93,500 की कथित रिश्वत का आरोप लगाया था। हाईकोर्ट ने 8 अगस्त 2025 को सुशील झांझरिया और मनोज पाठक की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। बाद के न्यायिक रिकॉर्ड में भी संबंधित रिश्वत प्रकरण का उल्लेख है।

एक अन्य आदेश में अभियोजन पक्ष ने 2018 से अप्रैल 2025 के बीच कंपनी को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे में 44 कार्य मिलने की बात कही। हालांकि, यह मामला बिलासपुर क्षेत्र के रेलवे कार्य से संबंधित है। इसे ग्वालियर–श्योपुर परियोजना में भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं माना जा सकता। आरोपों का अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया से होना है।

विजयपुर सेक्शन में गुणवत्ता की जांच सबसे अहम

झांझरिया प्रोजेक्टविजयपुर–वीरपुर–श्योपुर खंड में मिट्टी के तटबंधों, ट्रैक के आसपास कटाव, प्लेटफॉर्म में दरारों और पुल-पुलियाओं में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें सामने आई हैं। बड़े स्तर पर यह भी शिकायत मिली है कि यहां निर्माण कार्य में चंबल के प्रतिबंधित रेत sand का जमकर प्रयोग हुआ है, सूत्रों की माने तो मानक रेता (सिंध नदी का रेता) की दर् पर चंबल रेत की सप्लाई स्थानीय भाजपा नेता के परिजन द्वारा की गई है। दिन में सप्लाईकर्ता वाहन (ट्रक, डंपर, ट्रैक्टर) झांझरिया प्रोजेक्ट यूनिट के पास स्थित पेट्रोल पंप पर खड़े होकर रात में इस प्रतिबंध रेत की सप्लाई करते देख गये। हालांकि क्षेत्र के डिप्टी चीफ इंजीनियर पटेल ने इस बात से इनकार कर रहे हैं लेकिन युग क्रांति की पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ है।

यदि इनकी पुष्टि होती है तो मामला केवल ठेकेदार की लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रेलवे के गुणवत्ता नियंत्रण और निरीक्षण व्यवस्था की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए।

फिलहाल उपलब्ध अदालती आदेश इन विशिष्ट तकनीकी खामियों की पुष्टि नहीं करते। इसलिए रेलवे को मौके का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराकर मिट्टी के बेस, ट्रैक, प्लेटफॉर्म, पुल-पुलियाओं और निर्माण सामग्री की जांच करानी चाहिए। साथ ही, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि संबंधित कार्य किस ठेकेदार को सौंपे गए और गुणवत्ता प्रमाणपत्र किस अधिकारी ने जारी किए।

जुलाई में वीरपुर तक निर्माण पूरा, श्योपुर तक रास्ता कब खुलेगा?

2 जुलाई 2026 की मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वीरपुर तक रेल लाइन का निर्माण पूरा होने और परिचालन का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजे जाने की जानकारी दी गई थी। रिपोर्ट में रघुनाथपुर के पास लगभग 200 मीटर भूमि अधिग्रहण को श्योपुर तक ट्रेन पहुंचने में बाधा बताया गया था।

अब अक्टूबर 2026 में रेलवे को बताना चाहिए कि यह बाधा दूर हुई या नहीं, शेष निर्माण कितना पूरा हुआ और श्योपुर तक यात्री ट्रेन चलाने के लिए कौन-सी तकनीकी तथा सुरक्षा स्वीकृतियां बाकी हैं। मालगाड़ियों का ट्रैक पर पहुंचना अपने आप में यात्री परिचालन की अंतिम सुरक्षा मंजूरी नहीं है।

रेलवे बोर्ड से सीधे सवाल

  • क्या विजयपुर–श्योपुर खंड में निर्माण गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराई गई/जाएगी?
  • क्या झांझरिया निर्माण लिमिटेड के संबंधित कार्यों और गुणवत्ता प्रमाणपत्रों की समीक्षा हुई है?
  • क्या कथित तकनीकी खामियों पर कोई आधिकारिक रिपोर्ट या कार्रवाई उपलब्ध है?
  • श्योपुर तक यात्री ट्रेन चलाने की वर्तमान समयसीमा क्या है?

झांझरिया परियोजनाग्वालियर–श्योपुर ब्रॉडगेज परियोजना में जनता को केवल ट्रेन चलने की तारीख नहीं, बल्कि सुरक्षित और मानक अनुरूप निर्माण की गारंटी भी चाहिए। झांझरिया निर्माण लिमिटेड से जुड़े रिश्वत प्रकरण की न्यायिक जांच अपनी जगह है, लेकिन विजयपुर खंड में निर्माण संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र जांच और रेलवे अधिकारियों की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है। रेलवे को प्रगति रिपोर्ट, गुणवत्ता ऑडिट और सुरक्षा स्वीकृतियों की स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, आधिकारिक पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।