भोपाल 24 फरवरी 2026। अटल पथ पर ‘अमेरिका और भारत ट्रेड डील समझौते के विरोध में कांग्रेस किसान महाचौपाल’ के अंतर्गत एक विशाल जनसभा का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे,लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी,प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी,पीसीसी चीफ जीतू पटवारी,नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंगार,उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे,सह प्रभारी संजय दत्त,सह प्रभारी रणविजय लोचव,CWC सदस्य कमलेश्वर पटेल,CWC सदस्य ओंकार मरकाम,मीडिया विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन खेड़ा,पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह,राज्यसभा सांसद विवेक तंखा, अशोक सिंह,पूर्व सांसद नकुलनाथ,पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह, नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह,पूर्व विधानसभा अध्यक्ष, नर्मदाप्रसाद प्रजापति,पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष श्रीमती हिना कावरे,पूर्व केंद्रीय मंत्री कांतिलाल भूरिया,पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव,पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा,पूर्व मंत्री पीसी शर्मा,पूर्व मंत्री तरुण भनोट,पूर्व मंत्री सुखदेव पांसे , पूर्व मंत्री विधायक जयवर्धन सिंह ,आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक,संगठन महामंत्री डॉ. संजय कामले,AICC सचिव कुणाल चौधरी,AICC इनचार्ज तनुज पुनिया,शहर जिला अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना,ग्रामीण जिला अध्यक्ष अनोखी पटेल,अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार,आदिवासी कांग्रेस के अध्यक्ष रामू टेकाम,महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती रीना बोरासी, किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह चौहान, ओबीसी विभाग के अध्यक्ष सिद्धार्थ कुशवाहा,nsui के प्रदेश अध्यक्ष आशुतोष चौकसे, यूथ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष यश घनघोरिया सहित समस्त विधायकगण एवं पूर्व विधायकगण, समस्त विधानसभा प्रभारी, समस्त जिलों के जिला अध्यक्ष, एनएसयूआई एवं यूथ कांग्रेस के समस्त नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लोकसभा में पहली बार नेता प्रतिपक्ष के रूप में बोलने से रोका गया। उन्होंने कहा, “मुझे अपनी बात रखने नहीं दिया गया।”
चीन सीमा विवाद के मुद्दे पर उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवडे की पुस्तक का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री को घेरा। श्री राहुल गांधी ने कहा कि पुस्तक में वर्णित है कि जब चीन के टैंक भारतीय सीमा की ओर बढ़ रहे थे, तब जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से आदेश पूछा था। उनका आरोप था कि उस समय प्रधानमंत्री ने स्थिति पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया।
चार महीने से अमेरिका के साथ ट्रेड डील रुकी हुई थी।लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ दो कारणों की वजह से इसे साइन कर दिया। पहला कारण-अमेरिका में लाखों Epstein फाइलें बंद पड़ी हैं। लाखों फाइलों के ईमेल, मैसेज, वीडियो अभी तक रिलीज नहीं किए गए हैं। अमेरिका ने मोदी सरकार को धमकाने के लिए हरदीप पुरी का नाम रिलीज कर दिया है। मैसेज साफ था कि अगर हमारी बात नहीं सुनी तो फाइलों में से सबूत निकलेगा।
दूसरा कारण अडानी पर अमेरिका में क्रिमिनल केस है, वो अमेरिका नहीं जा सकते। अडानी, BJP और नरेंद्र मोदी का फाइनेंशियल स्ट्रक्चर हैं- ऐसे में ये केस अडानी पर नहीं- नरेंद्र मोदी और BJP पर है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लोकसभा में भाषण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने बिना मंत्रिमंडल से चर्चा किए अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump से दूरभाष पर बात कर समझौते पर सहमति जताई। उन्होंने कहा कि इस विषय का उल्लेख स्वयं ट्रंप ने सामाजिक माध्यम पर किया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद से बाहर निकलने के बाद अगले दिन प्रधानमंत्री ने यह कहा कि उन पर हमला होने वाला था, जबकि वास्तविक कारण संसद में जवाब देने से बचना था।
21वीं सदी में ‘डेटा’ सबसे जरूरी चीज है। जिसके पास डेटा होगा वो जीतेगा। जिसके पास डेटा नहीं होगा, वो ख़त्म हो जाएगा।
आज दुनिया में सबसे ज्यादा डेटा हिंदुस्तान के पास है। हिंदुस्तान के डेटा के बिना अमेरिका, चीन का मुकाबला नहीं कर सकता। लेकिन इस डील में नरेंद्र मोदी ने हिंदुस्तान का सारा का सारा डेटा अमेरिका के हवाले कर दिया है। यानी- नरेंद्र मोदी ने अमेरिका से डील करके किसानों को तबाह कर दिया, हमारा डेटा सौंप दिया और हमारी टेक्सटाइल इंडस्ट्री को ख़त्म कर दिया।
मल्लिकार्जुन खड़गे का बयान
खड़गे ने राहुल गांधी के भाषण का समर्थन किया और कहा कि लोकतंत्र और संविधान खतरे में हैं। उन्होंने मोदी पर देश को “बेचने” और किसानों को “गुलाम” बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने मोदी की तुलना एक “डरपोक” प्रधानमंत्री से की, जो संसद में बहस का सामना करने से बचते हैं और केवल “मन की बात” करते हैं। खड़गे ने यह भी कहा कि अमेरिका के किसानों का समर्थन करने के लिए मोदी भारत के किसानों को खत्म कर रहे हैं, क्योंकि अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत में डंप किया जाएगा।
उन्होंने मनरेगा जैसे कांग्रेस द्वारा लाए गए कानूनों को बहाल करने का आह्वान किया, क्योंकि ये कानून गरीबों के लिए फायदेमंद हैं।
जीतू पटवारी ने कहा कि राहुल गांधी ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर सवाल उठाया, यह आरोप लगाते हुए कि यह नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच हुआ एक समझौता था, जिससे भारत के हितों को नुकसान हुआ। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसानों के लिए ‘तीर’ के समान है। राहुल गांधी ने नोटबंदी और जीएसटी के बारे में अपनी पिछली भविष्यवाणियों का ज़िक्र किया, जो बाद में सही साबित हुईं।
उन्होंने कोविड-19 महामारी के दौरान सरकार के कुप्रबंधन की आलोचना की, जिसमें लाखों लोगों की मौत हुई। राहुल गांधी ने कृषि कानूनों को वापस लेने की भविष्यवाणी की, जो डेढ़ साल के संघर्ष के बाद हुई।
उमंग सिंघार ने कहा
न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP): कांग्रेस पार्टी ने 1965-66 में एमएसपी की बात की, लेकिन मोदी सरकार किसानों के विरोध के बावजूद एमएसपी पर ध्यान नहीं दे रही है। कांग्रेस सरकार ने 2008 में मनमोहन सिंह के समय 7000 करोड़ रुपये का किसानों का कर्ज माफ किया, जबकि बीजेपी ने कभी ऐसा नहीं किया।
अमेरिका के साथ व्यापार समझौता मध्य प्रदेश के किसानों के लिए हानिकारक है, खासकर सोयाबीन, दाल, गेहूं, मक्का और सरसों जैसी फसलों के लिए।यह समझौता दूध उत्पादकों को भी प्रभावित करेगा, जिससे दूध की कीमतें गिरेंगी।
