नई दिल्ली, 09 अप्रैल 2026। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आंतरिक ज्ञान के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषित साझा किया। उन्होंने कहा कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सदैव यह सिखाती रही है कि सच्चा ज्ञान और उसका सही उपयोग ही किसी भी राष्ट्र की प्रगति का मूल आधार होता है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में युवाओं की भूमिका को विशेष रूप से रेखांकित करते हुए कहा कि आज देश के युवा इसी ज्ञान परंपरा के मार्ग पर चलते हुए एक समृद्ध और सशक्त भारत के निर्माण में सक्रिय योगदान दे रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री ने एक संस्कृत श्लोक साझा किया—
“अन्तःस्थमेव यज्ज्ञानं ज्ञानादपि च यत्परम्। तदेव सर्वसंसारसारं सद्भिरुपास्यते॥”
इस श्लोक के माध्यम से उन्होंने स्पष्ट किया कि जो ज्ञान हमारे भीतर स्थित है और जो बाहरी या सामान्य ज्ञान से भी श्रेष्ठ है, वही इस समस्त संसार का वास्तविक सार है। महान और विद्वान व्यक्तियों द्वारा उसी आंतरिक ज्ञान की उपासना की जाती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति आत्मज्ञान और आत्मविकास पर आधारित रही है, और यही विचारधारा देश को वैश्विक स्तर पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक बन रही है।
