परिवहन की नई व्यवस्था पर अराजकता का साया, सख्ती की दरकार
भोपाल। यद्धपि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 1 जुलाई 2024 से प्रदेश की सभी परिवहन चेक पोस्टों को बंद करने का निर्णय प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था, लेकिन इस फैसले को लेकर प्रदेशभर में एक खतरनाक भ्रम फैलता जा रहा है। आम धारणा बनती जा रही है कि अब वाहनों की जांच पर रोक लग गई है और ओवरलोडिंग या बिना वैध दस्तावेजों के परिवहन पर जैसे खुली छूट मिल गई हो—जबकि सच्चाई इससे बिल्कुल उलट है।
दरअसल, चेक पोस्टों का बंद होना केवल पुरानी व्यवस्था का अंत है, न कि वाहन जांच की प्रक्रिया का। सरकार ने इसके स्थान पर नई, मोबाइल और इंटीग्रेटेड चेकिंग प्रणाली लागू की है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर इसका गलत संदेश फैलने से हालात चिंताजनक हो चले हैं।
अराजक तत्वों का बढ़ता हस्तक्षेप, कर्मचारियों पर दबाव
प्रदेश के कई हिस्सों से ऐसी शिकायतें सामने आई हैं, जहां तथाकथित ड्राइवर संघ, फर्जी एवं लालची पत्रकार/ यूट्यूबर और अराजक तत्व खुलेआम परिवहन विभाग के कर्मचारियों से बदसलूकी कर रहे हैं। कहीं सरकारी कार्य में बाधा डाली जा रही है तो कहीं महिला एवं पुरुष कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार तक किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इन घटनाओं के अधूरे और एकतरफा वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किए जा रहे हैं, जिससे विभागीय कर्मियों की छवि धूमिल होती है और कई बार निर्दोष होने के बावजूद उन पर कार्रवाई की गाज गिर जाती है।
स्थिति की जड़ में 2019 से 2024 के बीच परिवहन विभाग में फैली अवैध वसूली की गहरी जड़ें भी हैं, जिसने पूरे सिस्टम को अंदर से कमजोर कर दिया। इस दौर में पनपी लालच और भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति आज भी पूरी तरह खत्म नहीं हो पाई है। कुछ अधिकारी और कर्मचारी जहां मौके की तलाश में रहते हैं, वहीं दूसरी ओर कथित पत्रकार और अराजक तत्व भी इस अव्यवस्था का फायदा उठाकर अपने स्वार्थ साधने में लगे हुए हैं।
प्रशासनिक सख्ती और स्पष्ट संदेश की जरूरत
ऐसे में सबसे बड़ी जरूरत_ प्रशासनिक स्पष्टता और सख्ती की है। सरकार और परिवहन विभाग को यह स्पष्ट संदेश देना होगा कि चेक पोस्ट बंद होने का मतलब कानून का अंत नहीं, बल्कि जांच प्रणाली का आधुनिकीकरण है। साथ ही, अराजक तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए सरकारी कार्य में बाधा डालने वालों पर सख्त नियंत्रण आवश्यक है।
यदि समय रहते इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश में वैध परिवहन व्यवस्था पर गंभीर संकट खड़ा हो सकता है और अवैध वसूली के रूप में चल रही लाल, सफेद और पीली पर्चियों का खेल यूं ही जारी रहेगा?
अब वक्त है कि सरकार अपने निर्णय के वास्तविक उद्देश्य को ज़मीन पर उतारे और कानून का भय कायम करते हुए व्यवस्था को पटरी पर लाए।
