मोहना में महाकाल ढाबे के पास दो कमरों के मकान में चल रहा था दोहरा कारोबार, 2600 लीटर ओपी, 63 बल्क लीटर शराब, 20 ड्रम पेट्रोल और 18 ड्रम थिनर जब्त
ग्वालियर। सागर में जहरीली शराब से मौतों के बाद अवैध शराब के कारोबार पर उठ रहे सवालों के बीच ग्वालियर में आबकारी विभाग ने देर रात नकली पेट्रोल और अवैध शराब बनाने वाली फैक्ट्री पकड़कर सनसनी फैला दी। मोहना हाईवे पर महाकाल ढाबे के पास स्थित दो कमरों के मकान में कथित तौर पर पेट्रोल में थिनर, एथेनॉल और अन्य ज्वलनशील पदार्थ मिलाकर नकली पेट्रोल तैयार किया जा रहा था। इसी ठिकाने पर अवैध शराब बनाने का कारोबार भी चल रहा था।
कार्रवाई में विभाग ने 2600 लीटर ओपी (इथेनॉल), 63 बल्क लीटर शराब, 20 ड्रम पेट्रोल और 18 ड्रम थिनर बरामद किए हैं। आबकारी विभाग के मुताबिक जब्त 2600 लीटर ओपी से करीब 32 लाख रुपये कीमत की शराब तैयार की जा सकती थी।
पेट्रोल में केमिकल मिलाकर हाईवे पर बेचने का खेल
जांच में सामने आया है कि फैक्ट्री में पेट्रोल में थिनर, इथेनॉल और अन्य ज्वलनशील पदार्थ मिलाकर कथित नकली पेट्रोल तैयार किया जाता था। तैयार ईंधन को हाईवे से गुजरने वाले वाहन चालकों को बेचने की बात सामने आई है। लिहाजा एक ही ठिकाने से दो अलग-अलग अवैध कारोबार चल रहे थे—एक तरफ सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाला अवैध शराब निर्माण और दूसरी तरफ वाहन चालकों को कथित मिलावटी/नकली पेट्रोल बेचने का खेल।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि इतनी बड़ी मात्रा में पेट्रोल, इथेनॉल और थिनर एक ही स्थान पर कैसे पहुंच रहा था और तैयार माल को हाईवे के ग्राहकों तक पहुंचाने वाला नेटवर्क कितना बड़ा है?
तीन आरोपी गिरफ्तार, सप्लाई चेन की तलाश
ग्वालियर आबकारी कंट्रोलर राजेश तिवारी ने बताया कि सूचना के आधार पर कार्रवाई की गई और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। उनके खिलाफ धारा 34(1), 34(2) एवं 49(क) के तहत कार्रवाई की गई है। ज्वलनशील पदार्थों को पुलिस को सौंप दिया गया है, जबकि एथेनॉल आदि को आबकारी विभाग ने जब्त कर कार्रवाई शुरू की है।गिरफ्तार आरोपियों में अनिल शर्मा और अरबाज खान मोहना, ग्वालियर के निवासी हैं, जबकि सौरभ गुर्जर श्योपुर का रहने वाला है। प्रारंभिक पूछताछ के अनुसार अनिल शर्मा का महाकाल ढाबा है। सौरभ गुर्जर एथेनॉल आदि टैंकरों के जरिए मंगवाता था, जबकि अरबाज खान सप्लाई और संपर्क की कड़ी में भूमिका निभाता था। विभाग अब इस पूरी सप्लाई चेन की जांच कर रहा है।
मामले की जांच स्वयं आबकारी कंट्रोलर राजेश तिवारी कर रहे हैं। तिवारी ने यह भी स्पष्ट किया कि 8-9 महीने पहले मोहना क्षेत्र में पकड़ी गई अवैध शराब फैक्ट्री से इस मामले का कोई संबंध सामने नहीं आया है। पिछली कार्रवाई में ज्यादातर आरोपी हरियाणा के थे, जबकि वर्तमान मामले में गिरफ्तार आरोपी ग्वालियर-मोहना और श्योपुर क्षेत्र से हैं।
2600 लीटर ओपी ने बढ़ाई चिंता
2600 लीटर ओपी (इथेनॉल) और 63 बल्क लीटर शराब की बरामदगी इस बात का संकेत देती है कि ठिकाने पर अवैध शराब निर्माण की पर्याप्त सामग्री मौजूद थी। विभाग के आकलन के मुताबिक जब्त ओपी से लगभग 32 लाख रुपये की शराब बनाई जा सकती थी।
अब जांच का असली सवाल यह है कि एथेनॉल कहां से आया, किसने टैंकरों से इसकी सप्लाई की, शराब किस नेटवर्क के जरिए खपाई जानी थी और नकली पेट्रोल को हाईवे पर किन लोगों के माध्यम से बेचा जा रहा था।
एक ही ठिकाने पर शराब और पेट्रोल—दोनों का अवैध खेल सामने आना बताता है कि मामला सिर्फ तीन आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं माना जा सकता। असली कार्रवाई उस सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचने पर होगी, जो इस पूरे कारोबार को ईंधन और कच्चा माल उपलब्ध करा रहा था।
