सरकार ने ईएनसी से मांगा एक्शन प्रस्ताव..
भोपाल। भोपाल के बदनाम डॉ.भीमराव अंबेडकर सेतु (गणेश मंदिर से गायत्री मंदिर तक एलिवेटेड कॉरिडोर) यानि GG फ्लाईओवर में हुई इंजीनियरिंग की महामूर्खता पर अब सरकारी मुहर लग गई है। मध्यप्रदेश शासन, लोक निर्माण विभाग, मंत्रालय का एक पत्र (क्रमांक /2026/19/यो/..) इस पूरे घोटाले की पोल खोल रहा है, जो विभाग के प्रमुख सचिव कार्यालय से प्रमुख अभियंता ( ईएनसी ) को भेजा गया है ।
इस पत्र में विभाग के प्रमुख सचिव कार्यालय ने माना है कि इस फ्लाईओवर पर निर्मित सीमेंट कांक्रीट वियरिंग कोर्स के ऊपर बिटुमिनस वियरिंग कोर्स किया गया है जिससे वह निरंतर डैमेज होता जा रहा है।
पत्र में इस बात पर कडा एतराज जताया गया है कि जी जी फ्लाईओवर पर पूर्व से निर्मित सीमेंट कांक्रीट वियरिंग कोर्स के ऊपर बिटुमिनस वियरिंग कोर्स का कार्य क्यों किया गया, अर्थात दो प्रकार के वियरिंग कोर्स क्यों किये गये? पत्र में साफ कहा गया है कि सीमेंट कांक्रीट वियरिंग कोर्स में यदि डैमेज अथवा अन्य कोई कमी की पूर्ति के लिए मरम्मत की आवश्यकता थी तो इसको सीमेंट कांक्रीट वियरिंग कोर्स के माध्यम से किया जाना चाहिए था। किंतु संबंधित इंजीनियरों ने ऐसा नहीं करके अनुबंधित एवं गारंटी पीरियड में संधारित आयटम से भिन्न परिवर्तन कर दिया जो उचित नहीं है।
सीधे शब्दों में – सीमेंट की सड़क पर डामर चिपकाना घोर लापरवाही और गुणवत्ताहीन कार्य है।
पत्र में आदेश – 3 दिन में करो कार्रवाई
प्रमुख सचिव कार्यालय ने पत्र में प्रमुख अभियंता को निर्देश दिए हैं कि उक्त संबंध में परीक्षण कर संबंधितों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही का प्रस्ताव तीन दिवस में प्रस्तुत करें।
इस पत्र की प्रतिलिपि मुख्य अभियंता, सेतु परिक्षेत्र को भी सूचना एवं तत्काल कार्यवाही हेतु भेजी गई है।
इस पर अब क्या होगा?
सूत्रों के अनुसार_ इस पत्र के बाद 5 साल तक रखरखाव ठेकेदार की जिम्मेदारी होने के बावजूद फ्लाई ओवर पर डामर वाले जुगाड़ के खुलासे पर अब बड़ी कार्रवाई तय मानी जा रही है। निशाने पर वही नाम हैं – प्रभारी EE आत्माराम मोरे और पूर्व प्रभारी CE संजय खांडे व जी.पी. वर्मा, जो ऐशबाग के 90 डिग्री वाले ROB कांड में भी फंसे हैं।
गौरतलब है कि हाल ही में ब्रिज सेक्शन के नवनियुक्त प्रभारी चीफ इंजीनियर गोपाल सिंह ने इस फ्लाई ओवर की टूटी फूटी सड़क की मरम्मत गारंटी पीरियड में भी ठेकेदार से ना कराकर 4.69 करोड़ की मरम्मत कार्य का टैंडर निकाल दिया था लेकिन मामला अदालत में पहुंच गया और इस राशि में लूटपाट करने की उनकी योजना का भांडाफोड होने पर दो दिन पहले ही हाईकोर्ट ने टैंडर निरस्त कर इसे बनाने वाले ठेकेदार से मरम्मत कराने का फरमान जारी किया था।
अब दो प्रकार के वियरिंग कोर्स कराने पर कितने इंजीनियरों पर कार्रवाई होगी यह तो आने वाले समय में ही पता चल सकेगा।
