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सागर के बांडा कांड के बाद सरकार की सख्ती: आखिर नकली शराब की फैक्ट्रियां चल कैसे रही हैं?

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प्रमुख सचिव अमित राठौर ने आबकारी अमले को लगाई फटकार, पूछा- इतना बड़ा अमला आखिर जमीनी स्तर पर कर क्या रहा है?

ग्वालियर के वरिष्ठ अधिकारी ने उठाया बड़ा सवाल _पकड़कर कोर्ट भेज देते हैं, शराब के मूल स्रोत तक पहुंचता कौन है?

भोपाल/ग्वालियर 8 सितंबर 2026। सागर के बांडा कांड और मध्यप्रदेश में लगातार सामने आ रहे अवैध एवं नकली शराब के उत्पादन और परिवहन को लेकर कल प्रमुख सचिव अमित राठौर और आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने अहम बैठक ली। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई करीब एक घंटे की इस बैठक में प्रदेशभर के सभी संभागों के आबकारी उपायुक्त, जिला स्तर के सहायक आयुक्त (AC), जिला आबकारी अधिकारी (DEO) सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में प्रमुख सचिव राठौर का लहजा बेहद सख्त रहा। उन्होंने गंभीरता से सवाल किया कि नकली शराब आखिर आ कहां से रही है और ये फैक्ट्रियां आखिर चल कैसे रही हैं? आबकारी विभाग के पास इतना बड़ा अमला होने के बावजूद जमीनी स्तर पर अधिकारी और कर्मचारी आखिर कर क्या रहे हैं?

उन्होंने कड़े शब्दों में सवाल उठाया कि जहां अवैध शराब बन रही है अथवा उसका परिवहन हो रहा है, वहां तक जांच अथवा आबकारी अधिकारी पहुंच क्यों नहीं रहे हैं? उन्होंने इसे विभाग के लिए बेहद चिंताजनक और शर्मनाक स्थिति बताया।

ग्वालियर के वरिष्ठ अधिकारी ने बैठक में ही खोल दिया जांच का दूसरा पहलू

प्रमुख सचिव राठौर के इन सख्त सवालों के जवाब में ग्वालियर के एक वरिष्ठ आबकारी अधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में ऐसा जवाब दिया, जिसने पूरी व्यवस्था पर ही एक नया और बड़ा सवाल खड़ा कर दिया।

अधिकारी ने कहा कि “जब किसी व्यक्ति को अवैध अथवा नकली शराब के साथ पकड़ा जाता है तो उसे कोर्ट में जल्दी से जल्दी पेश कर मामले की इतिश्री कर दी जाती है। लेकिन शराब कहां से आई, उसका मूल स्रोत क्या है और इसके पीछे पूरा नेटवर्क कौन चला रहा है—वहां तक कोई नहीं पहुंचता”

अधिकारी का यह जवाब सीधे तौर पर जिला स्तर पर होने वाली जांच और उसकी कार्य प्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। साथ ही इसे जिला आबकारी अधिकारी की भूमिका की ओर भी इशारा माना जा रहा है।

इंदौर के तुलसी नगर मामले पर भी चुप्पी—क्या जांच सचमुच मूल स्रोत तक पहुंची?

पूरी बैठक में इंदौर संभाग के उपायुक्त इंदर सिंह जामोद इस मसले पर चुप्पी साधे रहे कि तुलसी नगर की अवैध शराब फैक्ट्री के मामले में आखिर क्या हुआ। क्योंकि वहां भी कमोबेश वही स्थिति सामने आई थी, जिस पर बैठक में ग्वालियर के वरिष्ठ अधिकारी ने सवाल उठाया। अपने अधीनस्थ तंत्र के समक्ष/विरुद्ध जामोद यह साहस जुटाने में अक्षम थे ?

गौरतलब है कि 26 जून 2026 की देर रात इंदौर की रिहायशी कॉलोनी तुलसी नगर में संचालित कथित अवैध शराब निर्माण फैक्ट्री पर आबकारी विभाग की कार्रवाई के बाद कई गंभीर सवाल खड़े हुए थे।

एक ओर आबकारी नियंत्रक एवं डिप्टी कंट्रोलर मीडिया के सामने यह दावा कर रहे थे कि विभाग इस पूरे नेटवर्क की नेशनल/इंटरनेशनल सप्लाई चेन और वित्तीय लेन-देन की गहराई से जांच कर रहा है। दूसरी ओर पूरे घटनाक्रम में विभागीय अधिकारियों की भूमिका और जवाबदेही पर लगातार प्रश्नचिह्न खड़े होते रहे।

कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति विनोद पालिया को मौके से पकड़ा गया और बिना किसी विशेष पूछताछ के अविलंब कोर्ट में पेश कर दिया गया। यहां तक कि रिमांड तक नहीं मांगी गई। इस मामले पर कड़ी नजर रखते हुए युग क्रांति के संपादक बृजराज सिंह ने सहायक आयुक्त अभिषेक तिवारी, जांच अधिकारी उप निरीक्षक सुनील मालवीय एवं संबंधित अन्य अधिकारियों से बात की। लेकिन सभी के जवाब एक ही दिशा में जाते दिखाई दिए—खानापूर्ति और जवाबदेही से बचने वाले।

यहां सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सहायक आयुक्त समूचे आबकारी विभाग के सर्वेसर्वा हैं, जिनके निर्देशन में की जा रही जांच_ सच्चाई के उस स्तर तक भी नहीं पहुंच सकी, जहां उसे पहुंचना चाहिए था? आखिरकार इसकी जिम्मेदारी किसकी है- AC अभिषेक तिवारी की, जांच अधिकारी सुनील मालवीय की या किसी और की?

उज्जैन कनेक्शन की बात आई, लेकिन पुष्टि नहीं—फिर जांच कहां पहुंची?

इंदौर की इस अवैध फैक्ट्री के तार उज्जैन से जुड़े होने की बात भी सामने आई थी, हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं हो सकी। सबसे गंभीर सवाल यही है कि जिस कार्रवाई में बड़े स्तर पर अवैध शराब निर्माण और संभावित नेटवर्क का भंडाफोड़ होने की संभावना दिखाई दे रही थी, उस मामले की जांच सच्चाई के धरातल तक पहुंचे बिना ही इतिश्री होती नजर आई। और अब सागर के बांडा कांड के बाद वही सवाल और ज्यादा भयावह हो गया है- क्या इंदौर का दबा हुआ यह मामला किसी बड़े बांडा कांड जैसे हादसे का इंतजार तो नहीं कर रहा है?

आज प्रमुख सचिव अमित राठौर द्वारा बैठक में अधिकारियों से पूछा गया सवाल इसी पूरी व्यवस्था के सामने सबसे बड़ा आईना है_जब विभाग के पास इतना बड़ा अमला है तो नकली शराब की फैक्ट्रियां चल कैसे रही हैं? और पकड़े जाने के बाद जांच उनके मूल स्रोत तक पहुंचती क्यों नहीं?