चेतकपुरी रोड के 8 सैंपल जांच में फेल, डामर की मात्रा से लेकर बेस लेयर तक गंभीर सवाल; निर्माण से पहले की टेस्टिंग रिपोर्ट और बाद के डिजाइन की तारीख ने भी खड़े किए सवाल
ग्वालियर 21 सितंबर 2026। शहर की बदहाल सड़कों को लेकर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच ग्वालियर नगर निगम और सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। चेतकपुरी रोड से लिए गए सभी 8 सैंपल जांच में फेल पाए जाने की बात सामने आई है। हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित जांच आयोग की रिपोर्ट में सड़क निर्माण की गुणवत्ता से जुड़ी कई खामियों का उल्लेख किए जाने की जानकारी है।
कहीं डामर कम, कहीं बेस लेयर पर सवाल
जांच में कुछ स्थानों पर सड़क में निर्धारित मात्रा की तुलना में डामर की मात्रा कम पाए जाने की बात सामने आई है। वहीं बेस लेयर की गुणवत्ता और निर्माण प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठे हैं। सड़क निर्माण में कचरे और मलबे के ऊपर ही डामर डालने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं।
यदि जांच रिपोर्ट में सामने आए ये तथ्य सही हैं, तो सवाल केवल एक सड़क के खराब होने का नहीं है, बल्कि उस पूरी निर्माण प्रक्रिया पर है जिसके तहत सार्वजनिक धन खर्च कर सड़क तैयार की गई और कुछ ही समय बाद उसकी गुणवत्ता न्यायिक जांच के घेरे में पहुंच गई।
डिजाइन बाद में, टेस्टिंग रिपोर्ट पहले?
मामले में निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की तारीखों ने भी सवाल खड़े किए हैं। सामने आई जानकारी के अनुसार सड़क का डिजाइन सितंबर 2024 में तैयार होने का उल्लेख है, जबकि टेस्टिंग रिपोर्ट जुलाई 2024 की बताई गई है। यानी जिस डिजाइन के आधार पर निर्माण होना था, उससे पहले ही टेस्टिंग रिपोर्ट कैसे तैयार हो गई—यह सवाल हाईकोर्ट के समक्ष उठाया गया है।
यह महज तारीखों का अंतर है या निर्माण प्रक्रिया और दस्तावेजी रिकॉर्ड में कोई गंभीर विसंगति, इसका जवाब संबंधित विभाग और नगर निगम को देना होगा।
कई सड़कें पहले ही जांच में फे
चेतकपुरी रोड से पहले भी बेटी बचाओ तिराहा, गुड़ी-गुड़ा का नाका, हनुमान टॉकीज रोड और कस्तूरबा चौक की सड़कों के सैंपल जांच में फेल पाए जाने की बात सामने आ चुकी है। लगातार अलग-अलग सड़कों के नमूने गुणवत्ता परीक्षण में असफल होने से ग्वालियर की सड़क निर्माण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
मामले की अगली सुनवाई आज 21 सितंबर को हाईकोर्ट में होनी है। नगर निगम कमिश्नर को न्यायालय के समक्ष शपथ पत्र पेश करना है। ऐसे में अब निगाह इस बात पर है कि निगम प्रशासन खराब सड़कों और फेल सैंपलों को लेकर अदालत में क्या जवाब देता है और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कार्रवाई बताता है।
सवाल सीधा है—जब सड़क बनाने में सरकारी पैसा खर्च होता है तो उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी है? और यदि जांच में सैंपल लगातार फेल हो रहे हैं, तो जवाबदेही केवल सड़क की मरम्मत तक सीमित रहेगी या निर्माण की पूरी प्रक्रिया और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी?
