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शहपुरा ROB ने खोली MPRDC की सड़क व्यवस्था की पोल

पुल का एप्रोच टूटा तो टोल भी बंद करना पड़ा, जनता पूछ रही—सड़क बनाने का पैसा लिया, फिर सुरक्षित रास्ता देने की जिम्मेदारी किसकी?

जबलपुर। मध्यप्रदेश की सड़क व्यवस्था को लेकर उठते सवालों के बीच शहपुरा का मामला अब महज एक खराब सड़क या क्षतिग्रस्त पुल की कहानी नहीं रह गया है। शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज के एप्रोच के क्षतिग्रस्त होने के बाद बदली यातायात व्यवस्था ने हालात ऐसे पैदा किए कि आखिरकार शहपुरा टोल प्लाजा पर ही टोल वसूली रोकनी पड़ी।

27 सितंबर 2026 से NHAI ने NH-45 के जबलपुर–हिरन नदी सेक्शन स्थित शहपुरा टोल प्लाजा की सभी लेन, जिसमें ETC/Fastag लेन भी शामिल हैं, अस्थायी रूप से टोल-फ्री कर दीं। यह फैसला केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के निर्देश के बाद लिया गया।

पुल खराब, यातायात डायवर्ट और टोल बंद—जवाबदेही किसकी?

शहपुरा ROB का एप्रोच क्षतिग्रस्त होने के बाद सामान्य यातायात को वैकल्पिक मार्गों से संचालित किया जा रहा है। NHAI के मुताबिक, इसी असुविधा को देखते हुए टोल वसूली अस्थायी रूप से स्थगित की गई है। MPRDC द्वारा ROB एप्रोच के स्थायी पुनर्निर्माण से जुड़े संरचनात्मक और सिविल कार्य किए जा रहे हैं।

लेकिन यहीं सबसे बड़ा सवाल खड़ा होता है—जब सड़क और पुल की सुविधा सामान्य रूप से उपलब्ध नहीं है तो वाहन चालकों से टोल किस सुविधा के नाम पर लिया जाए? और इससे भी बड़ा सवाल यह है कि आखिर एक महत्वपूर्ण मार्ग का एप्रोच इस हालत तक पहुंचा कैसे और स्थायी समाधान में इतना समय क्यों लग रहा है?

टोल बंद करने का फैसला वाहन चालकों के लिए राहत जरूर है, लेकिन यह फैसला अपने आप में सड़क व्यवस्था की उस विडंबना को उजागर करता है जिसमें नागरिकों को पहले खराब यातायात व्यवस्था का खामियाजा भुगतना पड़ता है और फिर उसी असुविधा के कारण टोल वसूली रोकनी पड़ती है।

गडकरी के हस्तक्षेप के बाद राहत, लेकिन MPRDC से जवाब कब?

25 सितंबर को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शहपुरा ROB क्षतिग्रस्त होने से यातायात प्रभावित होने के बाद शहपुरा टोल पर वसूली स्थगित करने के निर्देश दिए थे। 27 सितंबर को NHAI ने इसे लागू कर दिया। अब किसी भी श्रेणी के वाहन से यूजर फीस नहीं ली जा रही है। हालांकि टोल प्लाजा पर CCTV, प्रकाश व्यवस्था, ETC/ANPR/WIM सिस्टम, साइनेज और ट्रैफिक प्रबंधन जैसी व्यवस्थाएं जारी रहेंगी।

यानी टोल की वसूली बंद हो सकती है, लेकिन जनता की परेशानी अभी खत्म नहीं हुई है। क्योंकि असली सवाल टोल का नहीं है। असली सवाल है—शहपुरा ROB का एप्रोच कब स्थायी रूप से ठीक होगा? NHAI के मुताबिक टोल वसूली तभी दोबारा शुरू होगी जब पुनर्निर्माण पूरा हो जाएगा, आवश्यक तकनीकी एवं सुरक्षा प्रक्रियाएं पूरी होंगी और सामान्य यातायात बहाल होगा।

₹3,540 करोड़ की रिंग रोड से लेकर पुराने रास्तों तक—घोषणाएं बनाम जमीन

जबलपुर के लिए बड़े सड़क प्रोजेक्टों की कमी नहीं है। केंद्र सरकार ने लगभग ₹3,540 करोड़ की 114 किलोमीटर जबलपुर आउटर रिंग रोड परियोजना की जानकारी दी है, जिसे पांच पैकेज में विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य शहर के भीतर यातायात का दबाव कम करना है।

लेकिन जनता का सवाल इससे अलग है। नई रिंग रोड कब बनेगी, यह बाद का सवाल है। आज जो सड़क और पुल जनता इस्तेमाल कर रही है, वह सुरक्षित कब होगा? नई परियोजनाओं के शिलान्यास, पैकेज और करोड़ों रुपये के बजट अपनी जगह हैं, लेकिन पुराने और चालू मार्गों की गुणवत्ता, निगरानी और समय पर मरम्मत भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। शहपुरा की घटना ने इसी व्यवस्था पर सवाल खड़ा किया है।

सड़क विकास या संकट प्रबंधन?

MPRDC के सामने अब केवल ROB का पुनर्निर्माण पूरा करने की चुनौती नहीं है। सवाल यह है कि जिस व्यवस्था के तहत करोड़ों रुपये के सड़क और पुल निर्माण होते हैं, उसमें गुणवत्ता नियंत्रण, निरीक्षण और समय पर हस्तक्षेप की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

अगर किसी महत्वपूर्ण मार्ग का एप्रोच क्षतिग्रस्त होने के बाद यातायात डायवर्ट करना पड़े, यात्रियों को अतिरिक्त परेशानी झेलनी पड़े और अंततः टोल वसूली तक रोकनी पड़े, तो केवल नया निर्माण शुरू कर देना पर्याप्त जवाब नहीं हो सकता।

विपक्ष का सीधा हमला: “भाजपा का पर्याय बन चुका है भ्रष्टाचार”

शहपुरा रेलवे ओवरब्रिज (ROB) के ढहने और वैकल्पिक पाटन रोड पर लगातार बढ़ रहे हादसों को लेकर विपक्ष ने सरकार को चौतरफा घेर लिया है:

कमलनाथ और पटवारी की टिप्पणीप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा, “लगभग ₹400 करोड़ की जनता की गाढ़ी कमाई से बना भोपाल-जबलपुर एनएच-45 का ओवरब्रिज निर्माण के 3 साल के भीतर ही दूसरी बार जमींदोज हो गया। यह साफ दिखाता है कि इस सरकार में भ्रष्टाचार किस कदर हावी है। सिर्फ टोल बंद करना नाकाफी है, हम मांग करते हैं कि इस पूरे घोटाले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच हो और दोषी अधिकारियों को तत्काल जेल भेजा जाए।”

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इस घटना को व्यवस्था की विश्वसनीयता पर बड़ा धब्बा बताते हुए उन्होंने कहा, “यह केवल एक पुल के टूटने का मामला नहीं है, बल्कि जनता की जान से खुलेआम खिलवाड़ है। जब तक इस घटिया निर्माण के असली चेहरों को कड़ी सजा नहीं मिलती और जनता के पैसों की वसूली नहीं होती, हमारा आंदोलन जारी रहेगा।”

सरकार का बचाव: “जनहित में लिया गया त्वरित फैसला”

विपक्ष के तीखे हमलों के बीच सरकार के लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री राकेश सिंह ने मोर्चा संभालते हुए कहा है कि सरकार ने नागरिकों की तकलीफ को देखते हुए संवेदनशीलता दिखाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से पत्र के माध्यम से चर्चा कर तुरंत शहपुरा टोल को निलंबित करवा दिया गया है ताकि जनता को अतिरिक्त आर्थिक बोझ न उठाना पड़े। लापरवाही बरतने वाली निर्माण कंपनी को पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है और दोषियों पर एफआईआर की प्रक्रिया चल रही है

जरूरत है जवाबदेही तय करने की: किस एजेंसी ने डिजाइन मंजूर किया? किसने गुणवत्ता की निगरानी की?
किस स्तर पर निरीक्षण हुआ? क्षति सामने आने के बाद स्थायी समाधान में कितना समय लगा? और इस पूरे घटनाक्रम की जिम्मेदारी किस अधिकारी और किस एजेंसी की है?

जबलपुर की जनता को अब इन सवालों के जवाब चाहिए। क्योंकि सड़क पर गड्ढा केवल गड्ढा नहीं होता—वह व्यवस्था की परीक्षा होता है। और शहपुरा ROB का क्षतिग्रस्त एप्रोच अब MPRDC की पूरी सड़क निर्माण व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है।