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MPBDC में भर्ती का विवाद: क्या एक खास अधिकारी को फिर नियुक्त करने के लिए बदले गए नियम?

64 वर्ष की आयु सीमा, ₹8,900 ग्रेड पे और अनुभव की शर्तों पर सवाल; नियमित CGM को दरकिनार कर कनिष्ठ संविदा अधिकारी के हस्ताक्षर से जारी हुआ विज्ञापन

भोपाल। मध्यप्रदेश बिल्डिंग डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (MPBDC) द्वारा इंजीनियर-इन-चीफ (EinC) पद के लिए जारी संविदा एवं प्रतिनियुक्ति विज्ञापन क्रमांक 8689/E-1107700/P-171/HR/2026, दिनांक 12 अक्टूबर 2026 विवादों में घिर गया है। आरोप हैं कि विज्ञापन की पात्रता शर्तें इस तरह निर्धारित की गई हैं, जिससे सेवानिवृत्त अधिकारी अजय श्रीवास्तव को दोबारा इसी पद पर नियुक्ति का अवसर मिल सके। आयु सीमा से लेकर ग्रेड पे, अनुभव और विज्ञापन जारी करने की प्रशासनिक प्रक्रिया तक पर सवाल उठ रहे हैं।

64 वर्ष की आयु सीमा: सामान्य नियमों से अलग व्यवस्था क्यों?

विज्ञापन के बिंदु क्रमांक 4 में स्पष्ट उल्लेख है—

“Maximum age of the applicant should not be more than 64 years on the last date of submission of application…”

आरोप लगाने वालों का कहना है कि सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) की संविदा नियुक्ति नीति के तहत सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए अधिकतम आयु सीमा 63 वर्ष निर्धारित है। ऐसे में MPBDC ने अपने विज्ञापन में इसे बढ़ाकर 64 वर्ष क्यों किया? क्या इस बदलाव के पीछे कोई स्पष्ट नियमगत आधार है, अथवा इससे किसी विशेष अधिकारी की पात्रता प्रभावित होने की संभावना को ध्यान में रखा गया? इसका जवाब निगम प्रबंधन को देना चाहिए।

₹8,900 ग्रेड पे और अनुभव की शर्त: योग्यता किसके अनुकूल?

विज्ञापन में अभ्यर्थी के लिए अंतिम प्राप्त ग्रेड पे ₹8,900 (लेवल 15A/16) अथवा समकक्ष होने तथा किसी शासकीय विभाग या सार्वजनिक उपक्रम में इंजीनियर-इन-चीफ (EinC) अथवा मुख्य अभियंता (CE) के रूप में कार्य करने की शर्त रखे जाने का उल्लेख है।

आरोप है कि अजय श्रीवास्तव अपने मूल विभाग भोपाल विकास प्राधिकरण (BDA) में सहायक अभियंता (AE) स्तर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके लिए उनके पेंशन भुगतान आदेश (PPO) और सेवानिवृत्ति आदेश का हवाला दिया जा रहा है। दावा है कि वे मूल विभाग में मुख्य अभियंता के नियमित पद पर कार्यरत नहीं थे।

अब सवाल यह है कि क्या MPBDC में EinC के रूप में काम करने का अनुभव नई भर्ती के लिए पर्याप्त माना जाएगा, जबकि उनकी पूर्व नियुक्ति और पात्रता पहले से विवादित है? आरोप लगाने वालों का कहना है कि नई शर्तें मौजूदा अधिकारी के अनुभव के अनुरूप दिखाई देती हैं। इस दावे की पुष्टि के लिए मूल सेवा अभिलेख, ग्रेड पे निर्धारण और भर्ती नियमों की जांच जरूरी है।

हाईकोर्ट में मामला लंबित, फिर नई चयन प्रक्रिया क्यों?

अजय श्रीवास्तव की GM और EinC पदों पर नियुक्ति तथा उनकी पात्रता को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका लंबित होने का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि सीधे सेवा विस्तार देने के बजाय नया विज्ञापन जारी कर दोबारा नियुक्ति का रास्ता तैयार किया जा रहा है।

विज्ञापन के बिंदु 6(b) और 7(b) में अभ्यर्थियों से EOW, लोकायुक्त अथवा आपराधिक या विभागीय जांच से संबंधित शपथ पत्र मांगे जाने की बात भी उठाई गई है। ऐसे में सवाल है कि न्यायालय में लंबित नियुक्ति विवाद के संदर्भ में अजय श्रीवास्तव की पात्रता और शपथ पत्र की जांच किस आधार पर की जाएगी?

हालांकि, नियुक्ति से संबंधित याचिका लंबित होना अपने आप में किसी अभ्यर्थी को अपात्र सिद्ध नहीं करता। वास्तविक स्थिति विज्ञापन की शर्तों, लागू नियमों और न्यायालयीन आदेशों के आधार पर ही तय होगी।

नियमित CGM के बजाय कनिष्ठ संविदा अधिकारी के हस्ताक्षर

विज्ञापन और नियम पुस्तिका के अंतिम पृष्ठ पर “Approved by MD, MPBDC” अंकित होने के साथ Manager (HR & Admn.) के हस्ताक्षर होने पर भी सवाल उठाए गए हैं।

आरोप है कि निगम में नियमित SAS कैडर के मुख्य महाप्रबंधक (CGM) पदस्थ होने के बावजूद EinC जैसे शीर्ष तकनीकी पद के विज्ञापन और नियम पुस्तिका पर उनके हस्ताक्षर नहीं हैं। इसके बजाय एक कनिष्ठ संविदा अधिकारी के हस्ताक्षर से दस्तावेज जारी किया गया।

क्या संबंधित मैनेजर को इस स्तर का विज्ञापन जारी करने का विधिवत अधिकार था? क्या निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति का पालन किया गया? इन सवालों का जवाब निगम के अनुमोदन और अधिकार संबंधी अभिलेखों से मिलना चाहिए। केवल CGM के हस्ताक्षर नहीं होने से अनियमितता स्वतः सिद्ध नहीं होती, लेकिन प्रक्रिया की पारदर्शिता स्पष्ट करना जरूरी है।

निष्पक्ष जांच की मांग

MPBDC के इस विज्ञापन ने भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। शासन और संबंधित विभागों से मांग की जा रही है कि—

  • 64 वर्ष की आयु सीमा तथा ₹8,900 ग्रेड पे की पात्रता का नियमगत आधार स्पष्ट किया जाए।
  • अजय श्रीवास्तव के मूल पद, सेवानिवृत्ति आदेश, PPO और उच्च पद पर कार्य करने के अनुभव की जांच की जाए।
  • हाईकोर्ट में लंबित प्रकरण के संदर्भ में नए विज्ञापन की वैधानिकता और न्यायालयीन आदेशों के अनुपालन की समीक्षा की जाए।
  • विज्ञापन जारी करने वाले अधिकारी के अधिकार, MD की स्वीकृति और नियमित CGM की भूमिका से संबंधित अभिलेखों की जांच कराई जाए।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या MPBDC ने सभी पात्र अभ्यर्थियों को समान अवसर देने के लिए नियम बनाए हैं, या विज्ञापन की शर्तों से किसी विशेष अधिकारी को लाभ पहुंचने की आशंका है? इसका निष्पक्ष जवाब दस्तावेजों की जांच और निगम प्रबंधन के आधिकारिक पक्ष से ही सामने आएगा।