EOW की FIR के बाद रीवा-जबलपुर में छापे, 44 इंजीनियर-ठेकेदार जांच के दायरे में
भोपाल/रीवा। मध्य प्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण (MPRRDA) में सड़क निर्माण कार्यों के लिए कथित फर्जी बिटुमेन बिल लगाकर सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये की चपत पहुंचाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर 19 जून 2026 को रीवा और जबलपुर के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान ₹23.50 लाख नकद, संपत्ति संबंधी दस्तावेज और डिजिटल उपकरण जब्त किए गए, जबकि ₹2.93 करोड़ की बैंक जमा और एफडी फ्रीज कर दी गई।
ED के अनुसार, यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत की गई है। जांच में सामने आया कि सड़क निर्माण कार्यों में बिटुमेन की आपूर्ति के नाम पर इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के कथित फर्जी बिल प्रस्तुत कर लगभग ₹55.60 करोड़ का सरकारी भुगतान प्राप्त किया गया, जिससे शासन को भारी वित्तीय क्षति हुई।
9 अप्रैल 2026 को EOW ने दर्ज की थीं दो बड़ी FIR
इस पूरे मामले की नींव 9 अप्रैल 2026 को आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), रीवा द्वारा दर्ज दो अलग-अलग एफआईआर से पड़ी थी। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क निर्माण कार्यों में आईओसीएल, मथुरा के उच्च गुणवत्ता वाले बिटुमेन के नाम पर कथित फर्जी बिल लगाकर भुगतान लेने और वास्तविक निर्माण में निम्न गुणवत्ता के बिटुमेन के उपयोग का आरोप लगाया गया। यह घटनाक्रम 1 जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 का है।
EOW की जांच में प्रथम दृष्टया फर्जी इनवॉइस के माध्यम से लगभग ₹18.59 करोड़ के सरकारी भुगतान में अनियमितता सामने आई। इसमें रीवा जिले में ₹12.71 करोड़ तथा मऊगंज जिले में ₹5.88 करोड़ के कथित अवैध भुगतान का उल्लेख किया गया।
इन दोनों मामलों में कुल 44 अधिकारियों, इंजीनियरों और ठेकेदारों के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया। बाद में इन्हीं एफआईआर को आधार बनाकर ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
रीवा FIR में नामजद 27 अधिकारी और ठेकेदार
रीवा प्रकरण में जिन अधिकारियों एवं संविदाकारों को आरोपी बनाया गया, उनमें तत्कालीन महाप्रबंधक राजकुमार दवे, कैलाश कुमार सोनी, जुगल किशोर गुप्ता और राजकुमार त्रिपाठी शामिल हैं। तत्कालीन सहायक प्रबंधकों में मोहम्मद शाहनवाज, प्रकाश नारायण त्रिपाठी, एस.के. अमरेश कुमार पांडे, दिनेश शुक्ला और मुनिमाधव मिश्रा के नाम दर्ज हैं। मौजूदा एवं तत्कालीन उपयंत्रियों में दुर्गादास द्विवेदी, गीता कन्तोड़े, आशीष शर्मा, वंदना पांडे, प्रियंका अग्रवाल, आकांक्षा सोहगौरा और शिवपाल सिंह परिहार शामिल हैं।
संविदाकार (ठेकेदार) के रूप में विजय सिंह, विनय कुमार द्विवेदी, स्वतंत्र कुमार मिश्रा, प्रमोद मिश्रा, कृष्णकांत सोहगौरा, राम सज्जन शुक्ला, सत्येंद्र तिवारी, रमेश गुप्ता, नीरज द्विवेदी, पुष्पेंद्र सिंह और अजय मिश्रा के नाम एफआईआर में दर्ज किए गए।
मऊगंज FIR में नामजद 17 आरोपी
मऊगंज (तत्कालीन रीवा-2) मामले में तत्कालीन महाप्रबंधक राजकुमार तिवारी और जुगल किशोर गुप्ता, सहायक प्रबंधक ए.के. सिंह, सुजीत कुमार निगम, भास्कर शर्मा और दिनेश प्रसाद तिवारी, उपयंत्री अमित गुप्ता, रवि गिडवानी, उदय प्रकाश द्विवेदी, शिवपाल सिंह परिहार और अरुण कुमार पटेल को आरोपी बनाया गया।
संविदाकारों में राम सज्जन शुक्ला, कृष्णकांत सोहागौरा, स्वामी चरण सिंह, देवेंद्र सिंह, त्रिवेणी प्रसाद और नीरज द्विवेदी के नाम शामिल हैं।
ED की जांच अब मनी ट्रेल पर केंद्रित
ED का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य मिले हैं
जिनसे यह संकेत मिलता है कि कथित फर्जी बिलों के माध्यम से प्राप्त राशि को विभिन्न बैंक खातों, संपत्तियों और अन्य निवेशों में लगाया गया। जब्त दस्तावेजों और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच की जा रही है तथा धन के प्रवाह (Money Trail) की पड़ताल जारी है।
सूत्रों के अनुसार, यदि जांच में मनी लॉन्ड्रिंग के और ठोस साक्ष्य सामने आते हैं तो आने वाले दिनों में कार्रवाई का दायरा अधिक व्यापक होने की स्थिति में नई कुर्की, संपत्ति जब्ती और गिरफ्तारियों की कार्रवाई की आशंका जताई जा रही है!हालांकि EOW द्वारा दर्ज एफआईआर और ED की कार्रवाई जांच प्रक्रिया का हिस्सा हैं। सभी आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायालय में उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
