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NGT में खुली भोपाल के ‘जलस्रोतों’ को निगलने वाले रसूखदारों की पोल

5 दिवसीय ड्रोन सर्वे रिपोर्ट सबमिट, ट्रिब्यूनल ने कहा _”एक भी अवैध निर्माण बचा तो नपेंगे अफसर!”

बड़ा तालाब और कलियासोत के बफर जोन में मिले MLA के फार्महाउस और आलीशान रेस्टोरेंट; 4 सितंबर को भदभदा के गेट खोलकर सबूत मिटाने की साजिश भी बेनकाब, एनजीटी ने दिए तत्काल सख्त कार्रवाई के निर्देश!

विशेष ब्यूरो, भोपाल 15 सितंबर 2026। राजधानी भोपाल की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़ा तालाब (भोज वेटलैंड) और कलियासोत डैम के अस्तित्व को खतरे में डालने वाले भू-mafiaओं और बड़े चेहरों का चेहरा आज नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सेंट्रल जोन बेंच के सामने पूरी तरह बेनकाब हो गया है। एनजीटी के आदेश पर गठित विशेष जांच दल ने 5 से 9 सितंबर तक चले गहन ग्राउंड ट्रुथिंग और ड्रोन सर्वे की आधिकारिक रिपोर्ट आज अदालत के पटल पर रख दी।

ड्रोन सर्वे रिपोर्ट में हुए 3 सबसे बड़े चौंकाने वाले खुलासे

सर्वेक्षण दल

मुनारों से आगे निकला पानी, फिर भी पक्के कब्जे: रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ा तालाब और कलियासोत डैम के फुल टैंक लेवल (FTL) के लिए लगाए गए सरकारी मुनारों (सीमा पत्थरों) से कई फीट आगे तक पानी फैला हुआ है, जिसके भीतर अवैध रूप से मैरिज गार्डन, आलीशान रेस्टोरेंट और डेयरी संचालित हो रही हैं। 

बीजेपी विधायक का फार्महाउस रडार पर: सर्वे टीम ने कलियासोत नदी और डैम के बफर ज़ोन के भीतर बैरसिया के भाजपा विधायक विष्णु खत्री के फार्महाउस सहित कई अन्य वीआईपी और पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों के निर्माणों को नियमों का उल्लंघन करते हुए चिह्नित किया है।

भदभदा गेट खोलने की रार/चाल बेनकाब: रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि 4 सितंबर को जब बड़ा तालाब का पानी एनजीटी द्वारा तय FTL मार्क (1666.80 फीट) को छूने ही वाला था, ताकि अतिक्रमणों की सटीक मैपिंग हो सके, तभी अचानक भदभदा डैम के गेट खोल दिए गए। कोर्ट में इस बात पर तीखी बहस हुई कि क्या पानी को जानबूझकर बतौर साजिश निकाला गया ताकि रसूखदारों के निर्माण डूब क्षेत्र में आने से बच जाएं? 

एनजीटी (NGT) का आज का कड़ा रुख और बड़ा निर्णय

एनजीटी रिपोर्ट
रिपोर्ट में शामिल साक्ष्यों और तस्वीरों को देखने के बाद एनजीटी बेंच ने जिला प्रशासन, भोपाल नगर निगम (BMC) और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आड़े हाथों लिया। एनजीटी ने आज की सुनवाई में निम्नलिखित कड़े आदेश जारी किए हैं:

तत्काल ध्वस्तीकरण की तैयारी: एनजीटी ने पूर्व में दिए गए अपने आदेश को दोहराते हुए कहा कि हाई फ्लड लेवल (FTL) से शहरी क्षेत्र की तरफ 50 मीटर और ग्रामीण क्षेत्र की तरफ 250 मीटर के नो-कंस्ट्रक्शन बफर जोन में जितने भी निर्माण चिह्नित हुए हैं, उन्हें हटाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।

पुलिस कमिश्नर को निर्देश: अतिक्रमण हटाते समय रसूखदारों के वीआईपी दबाव या कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए, कोर्ट ने भोपाल कलेक्टर को निर्देश दिया है कि वे पुलिस कमिश्नर द्वारा नामित एक नोडल पुलिस अधिकारी को इस टास्क फोर्स में शामिल करें, ताकि पर्याप्त पुलिस बल के साथ बिना रुके बुलडोजर चल सके।

केरवा डैम की बदहाली पर भी चेतावनी: कोर्ट के पैनल में शामिल पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडेय और राशिद नूर खान ने कोर्ट को बताया कि कलियासोत से भी ज्यादा बदतर स्थिति केरवा डैम के बफर जोन की है, जहाँ बड़े पैमाने पर अवैध होटल और बार बनाने के लिए सड़कों का निर्माण कर लिया गया है। कोर्ट ने इस पर भी संज्ञान लेते हुए कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी है।

युग क्रांति का कड़ा सवाल ?

क्या भोपाल के रसूखदार जनप्रतिनिधि और भू-माफिया स्वयं पर्यावरण नियमों को कुचलेंगे? अब जब ड्रोन कैमरों ने सच को एनजीटी की फाइलों में कैद कर दिया है, तो क्या भोपाल कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर कोर्ट के निर्देशानुसार इन रसूखदारों के अवैध किलों पर बुलडोजर चलाने की हिम्मत दिखा पाएंगे?

जनता से अपील:क्या आपके क्षेत्र (भोपाल/ग्वालियर) में भी प्राकृतिक नालों को पाटकर या तालाबों को सुखाकर अवैध कॉलोनियां और मैरिज गार्डन बनाए जा रहे हैं? अपने साक्ष्य (तस्वीरें/वीडियो) ‘युग क्रांति’ के (व्हाट्सएप नंबर: 9479877111) पर भेजें। हम आपकी लड़ाई कोर्ट से लेकर सड़क तक लड़ेंगे!