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PWD के अधीक्षण यंत्रियों की पदोन्नति की गोपनीय रिपोर्ट लीक, मुख्य सचिव ने जताई रिपोर्ट में गड़बड़ी की आशंका!

संदिग्ध व अपात्र अधिकारियों को भी 20 अंक देकर ‘क+’ उत्कृष्ट श्रेणी में शामिल करने पर उठे सवाल

भोपाल। देश में नीट पेपर लीक का विवाद अभी पूरी तरह थमा भी नहीं था कि मध्य प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (PWD) में अधीक्षण यंत्रियों की मुख्य अभियंता पद पर पदोन्नति से जुड़ी कथित गोपनीय रिपोर्ट लीक होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस कथित गोपनीय प्रतिवेदन की प्रति युग क्रांति के हाथ लगी है। सूत्रों के अनुसार, रिपोर्ट में गंभीर विसंगतियों की शिकायत मिलने पर तत्कालीन मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्वयं आपत्ति जताते हुए इसे पुनः समीक्षा के लिए वापस भेज दिया।

लोक निर्माण विभाग में अधीक्षण यंत्री से मुख्य अभियंता के पद पर पदोन्नति डीपीसी (Departmental Promotion Committee) की इस प्रक्रिया के माध्यम से की जाती है। इसमें अधिकारियों की वरिष्ठता, गोपनीय चरित्रावली (APAR/ACR), विभागीय अभिलेख तथा सतर्कता (Vigilance) संबंधी स्थिति का परीक्षण कर डीपीसी अपनी अनुशंसा देती है, जिसके बाद सक्षम प्राधिकारी द्वारा पदोन्नति आदेश जारी किए जाते हैं।

सूत्रों के अनुसार, पात्र अधिकारियों (SE) की वरिष्ठता एवं गोपनीय चरित्रावली का प्रतिवेदन वल्लभ भवन स्तर पर सेक्शन ऑफिसर दयानंद उपाध्याय द्वारा तैयार कर उप सचिव (स्थापना) को भेजा गया। वहां से अनुमोदन के बाद प्रमुख सचिव सुखबीर सिंह ने अपनी अनुशंसा सहित यह फाइल तत्कालीन मुख्य सचिव अनुराग जैन के समक्ष प्रस्तुत की। इसके बाद 16 जुलाई 2026 को स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक प्रस्तावित कर दी गई।

इसी बीच मुख्य सचिव को इस गोपनीय प्रतिवेदन के संबंध में गंभीर शिकायत प्राप्त हुई। शिकायत के बाद उन्होंने सूची का परीक्षण कराया, जिसमें कथित रूप से पाया गया कि अधिकांश अधिकारियों को ‘क+’ (उत्कृष्ट) श्रेणी का रिमार्क देकर अधिकतम 20 अंक प्रदान किए गए हैं। शिकायत प्रथम दृष्टया सही प्रतीत होने पर मुख्य सचिव अनुराग जैन ने इस पर नाराजगी जताई और समिति के सदस्य एवं प्रमुख सचिव से अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रश्न उठाया कि “विभाग में खराब सड़कों, टूटे पुलों और निर्माण कार्यों पर लगातार उठ रहे सवालों के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर उत्कृष्ट ग्रेडिंग कैसे दी गई”! इसके बाद उन्होंने फाइल प्रमुख सचिव स्तर पर पुनः समीक्षा के लिए लौटा दी।

21 अधिकारियों (SE) की पदोन्नति प्रस्तावित, 13 को मिले पूरे 20 अंक

मुख्य अभियंता पद पर पदोन्नति के लिए प्रस्तावित 21 अधीक्षण यंत्रियों में से 13 अधिकारियों को पिछले पांच वर्षों की गोपनीय चरित्रावली में 20 अंक देकर ‘क+’ उत्कृष्ट श्रेणी में रखा गया है। जबकि सूत्रों का दावा है कि इनमें से कुछ अधिकारियों के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस, विभागीय जांच, आरोप पत्र अथवा लोकायुक्त में प्रकरण लंबित हैं।

इन अधिकारियों में शालिग्राम बघेल, कृष्ण पाल सिंह राणा, आसाराम सिंह, सुपतलाल सूर्यवंशी (लोकायुक्त में प्रकरण), रामलाल वर्मा (लोकायुक्त में प्रकरण), विबिंद कुमार आरख, योगेंद्र सिंह बागोले (कारण बताओ नोटिस), गोपाल सिंह, सुरेश चंद्र चैन सिंह वर्मा, संजय कुमार खांडे (जांच में आरोप पत्र जारी), संजय कुमार मस्के (कारण बताओ नोटिस), सुरेंद्र राव गौरखेड़े, आनंद प्रकाश राणे, पी.सी. वर्मा (तीन कारण बताओ नोटिस), बी.पी. बोरासी, राजेश कागरा, जिले सिंह बघेल (आरोप पत्र जारी), गणेश प्रसाद वर्मा (लोकायुक्त में दो मामले, दो मामलों में आरोप पत्र जारी तथा एक अन्य मामले में कारण बताओ नोटिस), भगवान सिंह मीणा, चंद्रपाल सिंह एवं केशव सिंह यादव के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

गोपनीय सूची का लीक होना भी गंभीर सवाल

वरिष्ठता एवं गोपनीय चरित्रावली (APAR/ACR) से संबंधित यह सूची अत्यंत गोपनीय दस्तावेज मानी जाती है। ऐसे दस्तावेज का कथित रूप से लीक होना अपने आप में गंभीर प्रशासनिक प्रश्न खड़े करता है। वहीं, इसी रिपोर्ट में कथित विसंगतियां सामने आने से पूरी पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

अब जबकि अनुराग जैन के स्थान पर अशोक बरनवाल मध्य प्रदेश के नए मुख्य सचिव का पदभार संभाल चुके हैं, ऐसे में इस गोपनीय दस्तावेज के लीक होने की जवाबदेही किस पर तय होगी, रिपोर्ट की पुनः समीक्षा में क्या निष्कर्ष सामने आएंगे और अधीक्षण यंत्रियों की पदोन्नति प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ेगी, इस पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।

युग क्रांति का सवाल_यदि विभागीय जांच, कारण बताओ नोटिस और लोकायुक्त प्रकरणों का सामना कर रहे अधिकारियों को भी उत्कृष्ट ग्रेडिंग देकर पदोन्नति की दौड़ में आगे रखा गया है, तो क्या गोपनीय चरित्रावली वास्तव में निष्पक्ष मानकों पर तैयार की गई थी? और यदि नहीं, तो इसकी जवाबदेही आखिर किसकी तय होगी?