ब्रेकिंग

अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: राज्यों को फटकार, अधिकारियों पर अवमानना की कार्रवाई के संकेत

सील भवन दोबारा खोलने वालों पर FIR के निर्देश,आवासीय क्षेत्रों में अवैध भू-उपयोग पर कड़ा रुख

भोपाल के अवैध निर्माण और भू-उपयोग मामले में 5 अगस्त को होगी अहम सुनवाई

नई दिल्ली। देशभर में आवासीय भूखंडों पर अवैध निर्माण, नियमों के विपरीत भू-उपयोग और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह एवं न्यायमूर्ति आर. महादेवन की खंडपीठ ने करीब दो घंटे चली सुनवाई के दौरान कई राज्यों और नगर निकायों की कार्यप्रणाली पर तीखी नाराजगी व्यक्त की।

सुनवाई के दौरान अदालत ने हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और मिजोरम के मुख्य सचिवों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कड़ी चेतावनी दी। वहीं गुरुग्राम और लखनऊ नगर निगम के आयुक्तों के विरुद्ध अवमानना नोटिस जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। जयपुर, ग्रेटर नोएडा और पटना नगर निकायों की कार्यप्रणाली पर भी न्यायालय ने तीखी टिप्पणी की।

कागजी कार्रवाई नहीं, जमीन पर दिखे कार्रवाई

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि अवैध निर्माण और अवैध भू-उपयोग के मामलों में केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। जहां भी नियमों का उल्लंघन हुआ है, वहां प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। जिन भवनों को सील किए जाने के बाद दोबारा खोल दिया गया, ऐसे मामलों में संबंधित संचालकों के विरुद्ध FIR दर्ज करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश भी दिए गए।

सुनवाई के प्रारंभ में न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि “आज की कार्यवाही हैमर से शुरू होगी”, जिसके बाद अदालत ने कई राज्यों की कार्यप्रणाली पर लगातार कठोर टिप्पणियां कीं।

जयपुर के कोचिंग हब पर भी सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने जयपुर में आवासीय एवं वाणिज्यिक भूमि उपयोग से जुड़े मामलों पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। अदालत ने कमर्शियल लैंड यूज़ क्षेत्र में संचालित कोचिंग संस्थानों पर सवाल उठाते हुए उन्हें नियोजित कोचिंग हब में स्थानांतरित करने की आवश्यकता पर जोर दिया। सुनवाई के दौरान बताया गया कि लगभग 500 करोड़ रुपये की लागत से विकसित कोचिंग हब का उपयोग किया जाना चाहिए।

भोपाल के अवैध निर्माण पर निगाहें

भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में कथित अवैध निर्माण और भू-उपयोग परिवर्तन के मामलों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट की निगाह बनी हुई है। आरोप है कि भूमाफिया और अधिकारियों की मिलीभगत से कई स्थानों पर नियमों के विपरीत निर्माण हुए, जिनकी लगातार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। इसी विषय से संबंधित दो याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थीं। इनमें भोपाल सिटिजन्स फोरम की याचिका पर सुनवाई से इंकार किया जा चुका है, जबकि अरेरा कॉलोनी निवासी विवेक त्रिपाठी की याचिका पर 5 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित है।

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का विस्तृत एवं आधिकारिक आदेश अभी जारी होना शेष है। आदेश उपलब्ध होने के बाद ही सभी निर्देशों और टिप्पणियों की अंतिम पुष्टि होगी।