ब्रेकिंग

उज्जैन भूमि कांड पर कांग्रेस का सीधा हमला: “मुख्यमंत्री मोहन यादव बताएं, सत्ता की जानकारी से किसका हुआ फायदा?”

भोपाल 23 जून 2026। मध्य प्रदेश कांग्रेस ने उज्जैन में कथित भूमि खरीद-फरोख्त के मामले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सीधे कटघरे में खड़ा करते हुए जवाब मांगा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार से जुड़े लोगों तथा कंपनियों के नाम पर विकास परियोजनाओं वाले क्षेत्रों के आसपास बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद हुई है, जिससे गंभीर हितों के टकराव और सत्ता के दुरुपयोग के सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में आयोजित संयुक्त पत्रकार वार्ता में जीतू पटवारी ने कहा कि इंडियन एक्सप्रेस की जांच रिपोर्ट और सार्वजनिक दस्तावेजों के मुताबिक मुख्यमंत्री और उनके रिश्तेदारों से जुड़ी संस्थाओं के नाम पर उज्जैन और आसपास करीब 245 प्लॉटों में 335 एकड़ भूमि दर्ज बताई जा रही है। वर्ष 2021 से 2025 के बीच 253 एकड़ और केवल 2024-25 में ही 168 एकड़ जमीन खरीदे जाने के दावों ने पूरे प्रदेश में सवालों का तूफान खड़ा कर दिया है।

पटवारी ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद जिन क्षेत्रों में सड़क, बायपास, कॉरिडोर और विकास परियोजनाओं की घोषणाएं हुईं, उन्हीं इलाकों के आसपास जमीनों की खरीद क्यों हुई? क्या सत्ता और विकास योजनाओं की पूर्व जानकारी का इस्तेमाल निजी साम्राज्य खड़ा करने के लिए किया गया? यदि नहीं, तो मुख्यमंत्री निष्पक्ष जांच से क्यों डर रहे हैं?

उन्होंने कहा कि वर्षों तक उज्जैन डेवलपमेंट अथॉरिटी और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं से जुड़े रहे डॉ. मोहन यादव को प्रदेश की जनता के सामने साफ करना चाहिए कि कहीं सरकारी योजनाओं की जानकारी का लाभ निजी कंपनियों और परिजनों को तो नहीं पहुंचाया गया।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि परिवहन घोटाले और आयुष्मान योजना में कथित अनियमितताओं के बाद अब उज्जैन भूमि प्रकरण भाजपा सरकार के माथे पर नया दाग बनकर सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच जमीनों की खरीद का ग्राफ लगातार बढ़ता गया और दस्तावेजों में मुख्यमंत्री, उनके परिजनों तथा उनसे जुड़ी कंपनियों के नाम सामने आने के दावे किए जा रहे हैं।

सिंघार ने कहा कि सिद्धिविनायक देवकॉन्स, मंगलमूर्ति इंफ्रा, श्री अन्नपूर्णा इंटरप्राइजेज और श्रेया डेवलपर्स जैसी कंपनियों के नाम चर्चा में हैं। इतना ही नहीं, एक गांव में मृत व्यक्ति के नाम पर कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए रजिस्ट्री कराने और ग्रामीणों पर दबाव बनाकर जमीन हड़पने की शिकायतें भी सामने आई थीं। ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच न होना सरकार की मंशा पर सवाल खड़ा करता है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सिंहस्थ महापर्व के नाम पर हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाएं प्रस्तावित हैं और ऐसे समय में सत्ता से जुड़े लोगों द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीदने की खबरें सामने आना संदेह को और गहरा करता है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को स्पष्ट करना चाहिए कि इन कंपनियों और जमीन सौदों से उनका अथवा उनके परिवार का क्या संबंध है।

कांग्रेस ने मांग की है कि पूरे कथित भूमि प्रकरण की न्यायिक निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जाए, मुख्यमंत्री परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों द्वारा खरीदी गई जमीनों का पूरा ब्योरा सार्वजनिक किया जाए तथा विकास परियोजनाओं और जमीन खरीद के बीच संभावित संबंधों की गहन पड़ताल की जाए।

कांग्रेस का कहना है कि “प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि आखिर विकास की आड़ में कहीं सत्ता और संपत्ति का गठजोड़ तो नहीं पनपा? मुख्यमंत्री मोहन यादव को अब आरोपों पर चुप्पी नहीं, जवाब देना होगा।”