भोपाल 21 जून 2026। शिक्षक-व्याख्याता एवं प्राचार्य संवर्ग मध्यप्रदेश के प्रांतीय संयोजक तथा मप्र राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष शिववीर सिंह भदौरिया ने प्रदेश की स्थानांतरण व्यवस्था और अवकाश संबंधी नियमों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल शिक्षा विभाग में स्थानांतरण नीति का लाभ सभी शिक्षकों को समान रूप से नहीं मिल रहा है। उनके अनुसार कई मामलों में निर्धारित शर्तों और मापदंडों की अनदेखी कर प्रभावशाली अथवा विशेष संरक्षण प्राप्त कर्मचारियों को मनचाही पदस्थापना दी जाती है, जबकि महिला, पति-पत्नी, स्वास्थ्य अथवा अन्य वरीयता श्रेणियों के सामान्य कर्मचारी स्थानांतरण से वंचित रह जाते हैं।
भदौरिया का कहना है कि वर्ष 2026 की सामान्य प्रशासन विभाग की स्थानांतरण नीति में स्वैच्छिक स्थानांतरण को निर्धारित सीमा से मुक्त रखा गया है, लेकिन व्यवहार में इसका लाभ सभी पात्र कर्मचारियों को समान रूप से नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रिक्त पदों के बावजूद स्थानांतरण प्रक्रिया में पारदर्शिता और समान अवसर का अभाव दिखाई देता है।
उन्होंने कार्यरत महिलाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाते हुए कहा कि स्थानांतरण और चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) जैसे प्रावधानों के क्रियान्वयन में व्यावहारिक कठिनाइयां बनी हुई हैं। नए अवकाश नियमों के तहत मातृत्व अवकाश स्वीकृति के अधिकार को उच्च स्तर पर केंद्रित किए जाने से कर्मचारियों की परेशानी बढ़ने तथा भ्रष्टाचार की आशंका बढ़ने की बात भी उन्होंने कही। भदौरिया ने यह भी आरोप लगाया कि जनगणना कार्य का हवाला देकर शिक्षकों के स्थानांतरण और पदोन्नति से संबंधित मामलों को प्रभावित किया जा रहा है, जबकि अन्य राज्यों में ऐसी परिस्थितियों के बावजूद प्रशासनिक प्रक्रियाएं जारी हैं।
उन्होंने संविधान में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लेख करते हुए मांग की कि स्थानांतरण एवं अवकाश संबंधी प्रक्रियाओं को पूरी तरह पारदर्शी, समान और नियमसम्मत बनाया जाए, ताकि सभी कर्मचारियों को बिना भेदभाव के उनका अधिकार प्राप्त हो सके।
