टेंडर खत्म होने से 3 महीने पहले पूरी होगी नई प्रक्रिया
भोपाल। मध्य प्रदेश में टोल संचालन को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया गया है। एमपीआरडीसी की प्रबंध संचालक भरत यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अब किसी भी टोल का संचालन विभागीय स्तर पर मैनपॉवर के जरिए नहीं कराया जाएगा। इसके लिए विभाग को निर्देशित किया गया है कि संबंधित टोल प्लाजा का टेंडर समाप्त होने की तिथि से कम से कम तीन महीने पहले नई टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली जाए, ताकि संचालन में किसी प्रकार का अंतराल न आए।
सूत्रों के अनुसार, अब तक विभिन्न कारणों—चाहे वह टेंडर प्रक्रिया में देरी हो या अन्य परिस्थितियां—के चलते कई टोल प्लाजा विभागीय स्तर पर मैनपॉवर के जरिए संचालित किए जा रहे थे। इस व्यवस्था पर रोक लगाने के लिए प्रबंध संचालक ने सख्त रुख अपनाया है।
जानकारी के मुताबिक यदि किसी परिस्थितिजन्य कारण से अल्पकालिक अवधि के लिए विभागीय संचालन करना अनिवार्य हो जाता है, तो इसके लिए किसी विवादास्पद अपात्र एजेंसी को मौका नहीं दिया जाएगा। ऐसी स्थिति में संचालन एमपीकॉन (MPCon) जैसी विश्वसनीय एजेंसी के माध्यम से कराया जाएगा। बताया जा रहा है कि हाल ही में एक-दो टोल प्लाजा का अस्थायी संचालन एमपीकॉन को सौंपा भी गया है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश में लगभग 18 टोल प्लाजा का संचालन विभागीय स्तर पर मैनपॉवर के माध्यम से किया जा रहा था। इनमें से एक टोल को हाल ही में टर्मिनेट किया गया है, जबकि छह टोल प्लाजा का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा गया है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि इन सभी 18 टोल प्लाजा के लिए टेंडर प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और चयनित एजेंसियों के साथ अनुबंध की औपचारिकताएं पूर्ण होते ही संबंधित टोल प्लाजा उन्हें सौंप दिए जाएंगे।
इस फैसले को एमपीआरडीसी में पारदर्शिता बढ़ाने और संचालन व्यवस्था को व्यवस्थित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आमजन से जुड़े एमडी के इस अहम फैसले की अहमियत बढ़ाने के क्रम में युग क्रांति टीम अपनी निगरानी के माध्यम से पारदर्शी व्यवस्था बनाए रखने में अपना योगदान देती रहेगी।
