एक दिन में समेटा गया दो दिन का आयोजन !
भोपाल। जहां एक ओर ग्रीनफील्ड वर्कशॉप पर मुख्यमंत्री द्वारा इसे नई पहल बताते हुए प्रशंसा की जा रही है तो वहीं दूसरी ओर विभागीय गलियारों में इस पर कई तरह के सवाल दौड़ रहे हैं। ग्रीन बिल्डिंग तकनीक और सतत विकास के नाम पर आयोजित दो दिवसीय वर्कशॉप अचानक एक दिन में खत्म कर दिए जाने से लोक निर्माण विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
02 से 03 मई 2026 तक आयोजित इस वर्कशॉप के लिए विभाग द्वारा इंजीनियरों की बड़ी संख्या में उपस्थिति अनिवार्य की गई थी। आधिकारिक आदेश जारी कर सैकड़ों इंजीनियरों को बुलाया गया, लेकिन कार्यक्रम का समापन पहले ही दिन कर दिया गया।
आपके द्वारा सामने लाए गए तथ्यों के अनुसार, दो दिन चलने वाली यह वर्कशॉप आखिरकार एक दिन में क्यों खत्म कर दी गई, यह अब सबसे बड़ा सवाल बन गया है?
दूसरे दिन ‘ऑफ रिकॉर्ड’ बैठक की चर्चा
सूत्रों और आधिकारिक गलियारों की मानें तो दूसरे दिन की
बैठक का दौर कथित रूप से “पोस्टिंग मैनेजमेंट” को लेकर गठित एक निजी स्थान_महादेव अपार्टमेंट में होने की चर्चा है।
जहां एक ओर आधिकारिक कार्यक्रम में आयोजित किया गया, वहीं दूसरे दिन की गतिविधियों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे संदेह और गहरा गया है।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी पर उठे सवाल
आज के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को लोक निर्माण मंत्री द्वारा बुलाया जाना भी चर्चा का विषय बना हुआ है। ्इसे मंत्री राकेश सिंह द्वारा संस्कारधानी जबलपुर के घटनाक्रम में हुए अपयश की क्षतिपूर्ति एवं अपना विभागीय बल और पकड़ दिखाने के साथ मुख्यमंत्री की आओभगत और सलाम के रूप में देखा जा रहा है।
आनन-फानन में फतवा जारी कर यकायक इंजीनियरों का जमावड़ा लगना भी दोहरी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
वर्कशॉप के बहाने ‘काले धन की अर्थव्यवस्था’ का आरोप
सूत्रों की माने तो इस पूरे आयोजन को लेकर विभाग के भीतर अलग ही चर्चा है।
जहां एक ओर मंत्री राकेश सिंह संस्कारधानी जबलपुर में हुए अपने कृत्य के बाद इस वर्कशॉप के माध्यम से विभागीय प्रभुत्व का संदेश देना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर इसे नए सिरे से होने वाली पोस्टिंगों के माध्यम से “काले धन की अर्थव्यवस्था” को सुदृढ़ करने का प्रयास बताया जा रहा है।
कथित तौर पर इस पूरे प्रबंधन का दायित्व विभाग के चर्चित चेहरे सूरज सिंह और राहुल सिंह के कंधों पर होने की भी चर्चा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
ग्रीन बिल्डिंग जैसे महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित वर्कशॉप का अचानक समापन और दूसरे दिन की गतिविधियों पर बना रहस्य, कई सवाल खड़े करता है। यदि आरोपों में सच्चाई है, तो यह मामला सिर्फ एक वर्कशॉप तक सीमित नहीं, बल्कि विभागीय पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न है।
