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हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की दस्तक: भोजशाला विवाद ने पकड़ा नया मोड़

धार, 23 मई 2026। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित भोजशाला-कमाल मौला परिसर विवाद ने अब राष्ट्रीय स्तर पर नया कानूनी मोड़ ले लिया है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को देवी वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानते हुए दिए गए फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसके साथ ही वर्षों पुराने इस धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद पर देश की सर्वोच्च अदालत की नजरें टिक गई हैं।

हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने हाल ही में अपने विस्तृत निर्णय में ऐतिहासिक दस्तावेजों, पुरातात्विक साक्ष्यों और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर भोजशाला को मूल रूप से मंदिर माना था। अदालत ने 2003 की उस व्यवस्था को भी निरस्त कर दिया था, जिसके तहत परिसर में अलग-अलग दिनों में हिंदू पूजा और मुस्लिम नमाज की अनुमति दी जाती थी।

फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष के हस्तक्षेपकर्ता काजी मोइनुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दायर कर हाईकोर्ट के निर्णय को चुनौती दी है। याचिका में कहा गया है कि फैसले से मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकार प्रभावित होते हैं और मामले के विभिन्न तथ्यों पर सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है। इस बीच हाईकोर्ट के निर्णय के बाद भोजशाला परिसर में धार्मिक गतिविधियों का स्वरूप भी बदलता दिखाई दिया। फैसले के बाद पहले शुक्रवार को बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचे, जबकि जुमे की नमाज नहीं हुई। कुछ मुस्लिम संगठनों ने फैसले के विरोध में काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराया।

कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान केवल भोजशाला परिसर की धार्मिक पहचान ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक स्मारकों और धार्मिक अधिकारों से जुड़े कई महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्नों पर भी बहस हो सकती है।

क्या है भोजशाला विवाद?

धार स्थित भोजशाला एक संरक्षित पुरातात्विक स्मारक है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती अर्थात देवी वाग्देवी का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। दोनों समुदाय दशकों से इस स्थल पर अपने-अपने धार्मिक अधिकारों का दावा करते रहे हैं। विवाद को लेकर कई मुकदमे विभिन्न अदालतों में लंबे समय से लंबित रहे हैं।

अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट पर हैं। यदि सर्वोच्च अदालत इस याचिका पर सुनवाई स्वीकार करती है तो भोजशाला विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का केंद्र बन सकता है। वहीं धार सहित पूरे मालवा क्षेत्र में इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

युग क्रांति विशेष
भोजशाला का मामला अब केवल धार या मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंचा यह विवाद आने वाले दिनों में देश की सबसे चर्चित कानूनी और धार्मिक बहसों में शामिल हो सकता है।