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ग्वालियर जलभराव: अफसरों के दौरे और निर्देशों से नहीं, नालों/जल निकासी पर कब्जे हटाने से निकलेगा समाधान!

24 घंटे में अतिक्रमण हटाने का नोटिस आज भी कागजों में दफन, जलभराव के बाद प्रशासन की ‘एक्शन फोटो’ पर उठे सवाल

ग्वालियर 5 अगस्त 2026। पिछले 24 घंटों की लगातार बारिश के बाद शहर के कई हिस्से जलमग्न हो गए। इसके बाद कलेक्टर रुचिका चौहान और नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने शहर का दौरा कर जल निकासी के निर्देश दिए और अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर अस्थायी अतिक्रमण हटाने तक के आदेश दिए। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि प्रशासन पहले से जारी अपने ही अतिक्रमण हटाने के नोटिसों पर अमल कर देता, तो क्या आज ग्वालियर की यह स्थिति बनती?

यही प्रशासनिक विरोधाभास अब नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

नोटिस दिया, 24 घंटे का समय भी खत्म हुआ, लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं

युग क्रांति के पास उपलब्ध नगर निगम के एक आधिकारिक नोटिस के अनुसार वार्ड-18, शताब्दीपुरम (डीडी नगर) स्थित ग्लोरी विला चौराहे सहित क्षेत्र के कई लोगों को 9 जुलाई 2026 को नाले-नालियों पर किए गए स्थायी एवं अस्थायी अतिक्रमण हटाने के लिए 24 घंटे का नोटिस दिया गया था। नोटिस में स्पष्ट लिखा गया था कि यदि 24 घंटे के भीतर अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो नगर निगम स्वयं कार्रवाई करेगा और उसका खर्च संबंधित व्यक्ति से वसूला जाएगा।

लेकिन हकीकत यह है कि लगभग एक महीने बाद भी न तो अतिक्रमण हटाया गया और न ही नगर निगम ने अपने आदेश का पालन कराया। नतीजा यह रहा कि बारिश आते ही वही नाले और नालियां अवरुद्ध हो गईं तथा क्षेत्र में जलभराव की गंभीर स्थिति बन गई।

क्या नोटिस कार्रवाई और समाधान के लिए थे या केवल वसूली का माध्यम?

स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम के कई वार्ड एवं जोन स्तर के अधिकारी नोटिस जारी करने के बाद कार्रवाई

नगर निगम का नोटिस

करने के बजाय केवल औपचारिकता निभाते हैं। चर्चा यह भी है कि कई मामलों में नोटिसों का इस्तेमाल दबाव और कथित वसूली के माध्यम के रूप में किया जाता है, जबकि वास्तविक अतिक्रमण जस का तस बना रहता है। यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं।

स्थानीय नागरिकों का शिकायती लहजे में कहना  है कि जिस राजेश भदौरिया को क्षेत्र अधिकारी का प्रभार दिया गया है, वे आम नागरिकों के फोन तक नहीं उठाते। ऐसे में लोग अपनी शिकायत किससे करें और जल निकासी जैसी समस्याओं का समाधान कैसे हो?

बारिश के बाद ‘दौरा’, पहले क्यों नहीं हुई कार्रवाई?

बारिश के बाद कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर अधिकारियों को जल निकासी और अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। लेकिन यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब नगर निगम स्वयं पहले ही अवैध कब्जों की पहचान कर नोटिस जारी कर चुका था, तब समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई?

यदि  जुलाई में ही नालों और नालियों से अतिक्रमण हटा दिए जाते, तो संभव है कि आज कई क्षेत्रों में जलभराव की नौबत ही नहीं आती।

जिम्मेदारी तय होगी या फिर वही पुराना सिलसिला?

ग्वालियर में हर वर्ष बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। हर बार निरीक्षण, निर्देश और बैठकों की तस्वीरें सामने आती हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं दिखता। इस बार प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि—

  • 9 जुलाई को जारी 24 घंटे के नोटिस पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
  • जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होगी?
  • जिन नालों पर अतिक्रमण बना रहा, उसकी जवाबदेही किसकी है?
  • क्या नोटिस जारी कर फाइल बंद करना ही नगर निगम की कार्यशैली बन चुकी है?

जब तक नालों और नालियों पर वर्षों से जमे अवैध कब्जों को राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण से मुक्त कर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक हर बारिश के बाद जलभराव, निरीक्षण और निर्देशों का यह सिलसिला चलता रहेगा। ग्वालियर को फोटो सेशन नहीं, बल्कि जवाबदेह प्रशासन और जमीन पर दिखने वाली कार्रवाई की जरूरत है।