न्यायिक जांच में सहयोग करने वाली तकनीकी टीम के सदस्य को डराने का प्रयास माना अदालत ने; राकेश उपाध्याय को जारी कारण बताओ नोटिस निरस्त, न्यायालय ने कहा- ऐसा कृत्य न्याय व्यवस्था के लिए खतरनाक
ग्वालियर। लोक निर्माण विभाग (PWD) के ग्वालियर जोन में मुख्य अभियंता के पद पर कार्यरत वी.के.आरख को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने ऐसा कड़ा झटका दिया है, जो विभागीय कार्यप्रणाली और अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्वालियर की बदहाल सड़कों, निर्माण कार्यों में कथित भ्रष्टाचार और करोड़ों रुपये के भुगतान से जुड़े मामले में हाईकोर्ट ने वी.के. अरख को तत्काल मुख्य अभियंता का कार्यभार छोड़ने का निर्देश दिया है। इतना ही नहीं, उनके द्वारा कार्यपालन यंत्री राकेश कुमार उपाध्याय को जारी किया गया कारण बताओ नोटिस भी निरस्त कर दिया है।
5 नवंबर 2026 को न्यायमूर्ति जी.एस. अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की खंडपीठ ने WP क्रमांक 10680/2025 (कैलाश चंद अग्रवाल विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन एवं अन्य) में सुनवाई करते हुए वी.के. अरख के आचरण पर बेहद गंभीर टिप्पणी की। अदालत ने तकनीकी टीम के सदस्य अधिकारी को दबाव में लेने और डराने के प्रयास को न्यायिक प्रक्रिया में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप की श्रेणी में माना।
अदालत के सवालों का जवाब तक नहीं दे पाए मुख्य अभियंता
इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर पहलू यह है कि हाईकोर्ट ने 30 अक्टूबर 2026 को वी.के. अरख से स्पष्ट जवाब मांगा था कि उन्हें याचिका के लंबित रहने तक मुख्य अभियंता, PWD ग्वालियर जोन के पद पर कार्य करने से क्यों नहीं रोका जाए और उनके स्थान पर किसी अन्य अधिकारी की नियुक्ति क्यों न की जाए। लेकिन अदालत के अनुसार, इस संबंध में उन्हें अवसर दिए जाने के बावजूद उन्होंने कोई जवाब दाखिल नहीं किया।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अरख ने अवमानना की अलग कार्यवाही में अपना जवाब जरूर प्रस्तुत किया, लेकिन मुख्य अभियंता के पद पर बने रहने के संबंध में उठाए गए सवालों का जवाब देने से परहेज किया।
मूल रिकॉर्ड घर में, जिम्मेदारी अधीनस्थ अधिकारी पर!
हाईकोर्ट की नाराजगी की एक बड़ी वजह मूल अभिलेखों को लेकर सामने आई स्थिति भी रही। अदालत ने जब ग्वालियर की सड़कों के निर्माण से संबंधित मूल रिकॉर्ड प्रस्तुत करने को कहा तो वी.के. अरख ने बताया कि रिकॉर्ड प्रभारी उप अभियंता दीपक गुप्ता के घर में रखा हुआ है।
यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब अदालत के समक्ष यह तथ्य आया कि अरख ने कार्यपालन यंत्री राकेश कुमार उपाध्याय को 28 अक्टूबर को कारण बताओ नोटिस जारी कर मूल अभिलेख सुरक्षित नहीं रखने के संबंध में जवाब मांगा था।
अदालत ने सवाल उठाया कि जब मूल रिकॉर्ड अरख के पास था और वे स्वयं आयोग की रिपोर्ट पर आपत्तियां तैयार कराने की प्रक्रिया में शामिल थे, तब रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रखने के लिए राकेश उपाध्याय को जिम्मेदार ठहराने का औचित्य क्या था?
आयोग की रिपोर्ट पर आपत्तियां भी दीपक गुप्ता से तैयार करवाईं
मामले में हाईकोर्ट ने तीन अधिवक्ताओं का आयोग गठित किया था, जिसे ग्वालियर की सड़कों की वास्तविक स्थिति और निर्माण गुणवत्ता की जांच के लिए नमूने एकत्र करने की जिम्मेदारी दी गई थी। आयोग ने तकनीकी टीम का चयन किया, जिसमें कार्यपालन यंत्री राकेश कुमार उपाध्याय को भी सदस्य बनाया गया था।
तकनीकी टीम ने नमूने एकत्र किए और आयोग ने अपनी रिपोर्ट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की। ऐसे में राकेश उपाध्याय के लिए उसी रिपोर्ट के विरुद्ध विभाग की ओर से आपत्तियां तैयार करने में शामिल होना उचित नहीं था।
दूसरी ओर, आरख ने अवमानना कार्यवाही में अपने जवाब में स्वीकार किया कि आयोग की रिपोर्ट पर आपत्तियां प्रभारी उप अभियंता दीपक गुप्ता से तैयार करवाई गई थीं और उन्होंने स्वयं केवल हलफनामे तथा आपत्तियों पर हस्ताक्षर किए थे। उनका यह भी कहना था कि आपत्तियां तैयार होने से एक सप्ताह पहले उन्होंने विधि अधिकारी से चर्चा की थी।
हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए माना कि तकनीकी टीम के सदस्य राकेश उपाध्याय को नोटिस जारी करना उन्हें दबाव में लेने, डराने और परेशान करने का प्रयास था।
अदालत की दो टूक- न्यायिक व्यवस्था के लिए खतरनाक है ऐसा आचरण
आदेश में हाईकोर्ट ने बेहद सख्त शब्दों में कहा कि तकनीकी टीम के सदस्य पर दबाव डालने और उसे डराने-धमकाने का दुस्साहसी कृत्य न्याय व्यवस्था के लिए खतरनाक है। अदालत ने यह भी कहा कि आयोग और तकनीकी टीम का गठन न्यायालय के आदेशों के तहत किया गया था। ऐसे में उनके कामकाज को प्रभावित करने वाला कोई भी प्रयास न्यायालय की कार्यवाही में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप माना जाएगा।
अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि जब तक यह याचिका लंबित है, वी.के. अरख के मुख्य अभियंता के पद पर बने रहने से निष्पक्ष और स्वतंत्र सुनवाई प्रभावित हो सकती है।
मुख्य अभियंता की कुर्सी छोड़ने का तत्काल निर्देश
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि वी.के.आरख तत्काल मुख्य अभियंता, PWD ग्वालियर जोन का कार्यभार छोड़ दें। राज्य शासन को कार्यालय के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक वैकल्पिक व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
इसके साथ ही 28 अक्टूबर 2026 को कार्यपालन यंत्री राकेश कुमार उपाध्याय को जारी कारण बताओ नोटिस निरस्त कर दिया गया। अदालत ने स्पष्ट किया कि तकनीकी टीम के सदस्य होने के कारण उपाध्याय विभाग की ओर से आयोग की रिपोर्ट तैयार करने में शामिल नहीं हो सकते थे। स्वयं PWD के विरुद्ध रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद उनके द्वारा उसमें हेरफेर किए जाने की कोई गुंजाइश भी नहीं थी।
अब चेतावनी भी साफ, तकनीकी टीम को छेड़ा तो होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में भविष्य के लिए भी स्पष्ट चेतावनी दी है। अदालत ने कहा कि किसी भी प्राधिकरण द्वारा तकनीकी टीम के किसी सदस्य को परेशान करने, डराने या दबाव डालने का प्रयास न्यायालय के कामकाज में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप माना जाएगा और संबंधित प्राधिकरण के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी। मामले को अवमानना प्रकरण क्रमांक 7843/2026 के साथ 26 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध करने के निर्देश दिए गए हैं।
ग्वालियर की सड़कों की बदहाली से शुरू हुई न्यायिक पड़ताल अब PWD के वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही और विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर चुकी है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़कों की गुणवत्ता पर सवाल, मूल रिकॉर्ड का अधीनस्थ अधिकारी के घर में मिलना, आयोग की रिपोर्ट पर आपत्तियां तैयार कराने की स्वीकारोक्ति और तकनीकी टीम के सदस्य को जारी नोटिस—इन घटनाक्रमों के बाद हाईकोर्ट का मुख्य अभियंता को पद छोड़ने का निर्देश PWD के लिए एक बड़ा संस्थागत झटका है।
