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एमपीआरडीसी में स्थापना शाखा में फिर बदलाव

उमेश सिंह से प्रभार वापस लेकर भगवानदास भुमरकर को सौंपी जिम्मेदारी

भोपाल। मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) में स्थापना शाखा को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। जारी आदेश के अनुसार उप महाप्रबंधक (तकनीकी) उमेश सिंह से उप महाप्रबंधक (स्थापना) का अतिरिक्त प्रभार वापस लेते हुए यह जिम्मेदारी भगवानदास भुमरकर को सौंप दी गई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

एमपीआरडीसी द्वारा जारी आदेश में बताया गया है कि जनवरी 2026 में कार्यालयीन आदेश के माध्यम से उमेश सिंह को उनके मूल दायित्वों के साथ-साथ स्थापना शाखा का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। अब प्रशासनिक कार्य सुविधा के दृष्टिकोण से यह प्रभार भगवानदास भुमरकर को आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से सौंपा गया है।

गौरतलब है कि युग क्रांति द्वारा किए गए खुलासों के बाद जनवरी 2026 में तत्कालीन उप महाप्रबंधक (स्थापना) संजय बरनवाल को इस पद से हटाया गया था और उनकी जगह उमेश सिंह को जिम्मेदारी दी गई थी। तकनीकी पृष्ठभूमि वाले उमेश सिंह के पास पहले से ही बीओटी (BOT), एचएएम (HAM), शिकायत शाखा, लोक सूचना अधिकार (RTI) तथा स्थापना शाखा सहित कई महत्वपूर्ण विभागों का प्रभार था।

सूत्रों के अनुसार एक ही अधिकारी के पास अत्यधिक जिम्मेदारियां होने के कारण स्थापना शाखा का कार्य प्रभावी ढंग से संचालित करने में व्यावहारिक कठिनाइयां सामने आ रही थीं। इसी को देखते हुए प्रबंधन ने स्थापना शाखा का दायित्व अलग करने का निर्णय लिया है।

नए प्रभारी बनाए गए भगवानदास भुमरकर प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारी माने जाते हैं। वे पूर्व में नगर निगम आयुक्त के रूप में भी कार्य कर चुके हैं और वर्तमान में प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दे रहे हैं। विभागीय सूत्रों का कहना है कि नगरीय विकास विभाग में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उनकी कार्यशैली और समन्वय की चर्चा लंबे समय से होती रही है।

हालांकि एमपीआरडीसी के सूत्र इस बदलाव को पूरी तरह रूटीन प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बता रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि इसे किसी विशेष विवाद, असंतोष या बड़े प्रशासनिक कारण से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि कार्यों के बेहतर वितरण और प्रभावी संचालन के उद्देश्य से यह व्यवस्था की गई है।

फिलहाल इस आदेश के बाद एमपीआरडीसी के प्रशासनिक गलियारों में स्थापना शाखा की भूमिका और आगामी व्यवस्थाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।