मौके पर सबूत मिटाने की कोशिश जारी..
लियर 17 अप्रैल 2026। मध्य प्रदेश लोक निर्माण के ब्रिज विभाग द्वारा स्वर्णरेखा नदी पर बन रही बहुचर्चित एलिवेटेड रोड परियोजना में कल एक ऐसा हादसा हुआ जिसने पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिलर क्रमांक 194 और 195 के बीच क्रेन से बीम स्थापित करते समय अचानक वह बीच से टूटकर नीचे गिर गया।
तस्वीरें साफ बता रही हैं—यह कोई सामान्य तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि पूरी संरचना लकड़ी की तरह दो टुकड़ों में बंट गई। मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार मामूली झटके में ही बीम का इस तरह टूट जाना बेहद चिंताजनक है। मौके पर पड़ताल करने पहुंची युग क्रांति टीम ने देखा कि जिस बीम की जांच होनी है उसका आधा हिस्सा गायब है और आधे को हैमर से नष्ट किया जा रहा है।
तस्वीरों ने खोली सच्चाई, विशेषज्ञों का मत
टूटे हुए बीम के दोनों सिरों पर सरिया लगभग नदारद नजर आ रहा है और कंक्रीट की गुणवत्ता भी संदिग्ध प्रतीत हो रही है। जिस बीम को भारी ट्रैफिक का भार उठाना था, वह स्वयं के हल्के दबाव में ही बिखर गया। यह स्थिति साफ संकेत देती है कि निर्माण में या तो गंभीर लापरवाही हुई है या घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
विशेषज्ञों का मत: मध्य प्रदेश लोक निर्माण विभाग, पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन, जेपी ग्रुप एवं एल&टी के अधीक्षण यंत्री एवं मुख्य अभियंता स्तर के वरिष्ठ इंजीनियर बीम का इस तरह से टूटना आश्चर्यजनक बता रहे हैं। इन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए यह कहा कि जब जीरो लोड पर यह स्थिति है तो इस पर जब लोडेड और हैवी लोडेड वाहन चलेंगे तो क्या स्थिति बनेगी, यह सोच कर डर सा लगता है। इसमें निश्चित रूप से कहीं न कहीं बड़ी गड़बड़ी है जो की निष्पक्ष जांच से ही स्पष्ट हो सकेगी।
1300 करोड़ की परियोजना पर खतरे की घंटी
करीब ₹1300–1373 करोड़ की लागत से बन रही यह लगभग 14 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड, जिसे शहर के विकास की बड़ी सौगात बताया जा रहा था, अब खुद ही सवालों के घेरे में है। यह निर्माण कार्य Shri Manglam Buildcon India Pvt. Ltd. द्वारा और पीडब्ल्यूडी ब्रिज सेक्शन की निगरानी में किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर निर्माण के दौरान ही बीम इस तरह टूट रहे हैं, तो तैयार होने के बाद यह सड़क भारी वाहनों का दबाव कैसे झेलेगी? सिर्फ इतने हिस्से की जांच के नाम पर खानापूर्ति के आधार पर पूरी रोड को लाखों जनता के आवागमन के लिए “ओके” मान लेना कहां तक लाजमी है?
जांच के आदेश और जनता का आक्रोश
मौके पर पहुंचे मंत्री ने जांच के आदेश दिए हैं, मगर साथ ही विभाग और ठेकेदार कंपनी मिलकर सबूत मिटाने में जुट गई है। आज पड़ताल के दौरान मौके पर पहुंचे युगक्रांति संपादक बृजराज सिंह ने ऊर्जा मंत्री प्रदुम्न तोमर से बात करते हुए जनता की भावना और तथ्यात्मक पहलू से अवगत कराया।
लेकिन जनता को आशंका है कि मामला कहीं फाइलों में दबकर न रह जाए। लोगों की मांग है कि सिर्फ इस बीम ही नहीं, बल्कि पूरी परियोजना की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए क्योंकि यह ग्वालियर की लाखों जनता के जानो माल से जुड़ा मामला है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी तत्काल हस्तक्षेप की मांग की जा रही है, ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदार कंपनी पर सख्त कार्रवाई हो सके।
यह हादसा केवल एक बीम के टूटने का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरी 1300 करोड़ की परियोजना की विश्वसनीयता पर सवाल है। अगर समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह एलिवेटेड रोड भविष्य में सुविधा नहीं, बल्कि खतरे का कारण बन सकती है।
