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“वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल से चल रहा है करोड़ों का ट्रांसफर कारोबार

प्रदेश में सुशासन नहीं, रिश्वत के दम पर तबादलों की मंडी संचालित हो रही है- जीतू पटवारी

भोपाल 20 जून 2026। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्री जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार पर प्रदेश में व्यापक स्तर पर तबादला उद्योग चलाने का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मध्यप्रदेश में पिछले एक महीने के दौरान चले तबादला अभियान ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। प्रदेश में “पैसा दो, तबादला लो” का खुला खेल चल रहा है और सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह दलालों, बाबुओं और बिचौलियों के हवाले कर दिया है।

श्री पटवारी ने कहा कि मैंने पहले भी सार्वजनिक रूप से कहा था और आज फिर दोहरा रहा हूं कि मुख्यमंत्री जी ने मध्यप्रदेश को “ट्रांसफर फैक्ट्री” में बदल दिया है। प्रदेश का कोई भी कर्मचारी, अधिकारी या संविदा कर्मी इस भ्रष्ट तंत्र से अछूता नहीं है। हर पद का रेट तय है, हर तबादले की कीमत तय है और हर फाइल का एक बाजार मूल्य निर्धारित कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक स्टिंग ऑपरेशन ने भाजपा सरकार के भ्रष्टाचार की परतें खोलकर रख दी हैं। स्टिंग में मंत्री के स्टाफ से जुड़े कर्मचारी द्वारा आरएईओ के तबादले के लिए 2.5 लाख रुपये, वल्लभ भवन के बाबू द्वारा नर्स के तबादले के लिए 5 लाख रुपये तथा ऊर्जा विकास निगम से जुड़े व्यक्ति द्वारा 4.5 लाख रुपये की मांग किए जाने का खुलासा हुआ है। इससे स्पष्ट है कि तबादले अब प्रशासनिक आवश्यकता नहीं बल्कि कमाई का सबसे बड़ा साधन बन चुके हैं।

श्री पटवारी ने कहा कि जांच टीम ने चार मंत्रियों, एक विधायक तथा कई अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क किया था। यदि इन मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा तबादला घोटाला सामने आएगा। पहले जिस भ्रष्टाचार को लगभग 200 करोड़ रुपये का माना जा रहा था, आज वह बढ़कर 500 करोड़ रुपये से अधिक के कारोबार का रूप ले चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में मंत्री और प्रभारी मंत्री की सिफारिश के बिना तबादले नहीं हो रहे हैं। कर्मचारियों और अधिकारियों को अपनी पसंद की जगह पोस्टिंग के लिए लाखों रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। कहीं एसडीओ स्तर के तबादले के लिए 15 लाख रुपये तक मांगे जा रहे हैं तो कहीं नर्सों और अन्य कर्मचारियों के तबादलों के लिए पांच-पांच लाख रुपये तक की वसूली की जा रही है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने हाल ही में पटवारियों के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों और 24 घंटे के भीतर उन्हें निरस्त किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह साबित करता है कि सरकार प्रशासन नहीं चला रही, बल्कि तबादलों की मंडी संचालित कर रही है। यदि निर्णय प्रशासनिक आवश्यकता के आधार पर लिए गए थे तो उन्हें एक दिन में वापस क्यों लिया गया? और यदि निर्णय गलत थे तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? श्री पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार बार-बार सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार प्रशासन की बात करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि प्रदेश का सबसे बड़ा उद्योग अब “ट्रांसफर उद्योग” बन चुका है। प्रदेश का औद्योगिक विकास भले ही ठहर गया हो, युवाओं को रोजगार न मिल रहा हो, किसानों को राहत न मिल रही हो, लेकिन भाजपा सरकार ने ट्रांसफर उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का काम जरूर किया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जवाब मांगते हुए कहा कि प्रदेश की जनता जानना चाहती है कि ट्रांसफर के इस कारोबार से आखिर किसकी जेब भर रही है? वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल से संचालित इस पूरे नेटवर्क का संरक्षक कौन है? यदि सरकार ईमानदार है तो तबादलों से जुड़े सभी आदेशों, अनुशंसाओं और वित्तीय लेनदेन की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराए। श्री पटवारी ने कहा कि प्रदेशवासियों, मैं फिर दोहरा रहा हूं कि मध्यप्रदेश की “ट्रांसफर फैक्ट्री” का सीईओ वल्लभ भवन की पांचवीं मंजिल पर बैठता है। यह सरकार प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि बोली लगाकर पोस्टिंग बांट रही है। कर्मचारियों का शोषण हो रहा है, जनता के काम प्रभावित हो रहे हैं और भ्रष्टाचार संस्थागत रूप ले चुका है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस पूरे मामले को जनता के बीच लेकर जाएगी और तब तक संघर्ष जारी रखेगी जब तक इस कथित ट्रांसफर घोटाले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को सजा नहीं मिल जाती। मध्यप्रदेश की जनता भाजपा सरकार के इस भ्रष्टाचार का जवाब आने वाले समय में लोकतांत्रिक तरीके से अवश्य देगी।