ग्वालियर। चार शहर का नाका स्थित विद्या विहार हायर सेकेंडरी स्कूल मेंभारत विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस’ पर एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के संचालक श्री कौशलेन्द्र सिंह चौहान ने की, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में श्री रविकांत सिंह भदौरिया उपस्थित रहे। अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की और विद्यार्थियों को विभाजन के मुख्य पहलुओं व ऐतिहासिक भूलों से रूबरू कराया।
मुख्य वक्ता श्री रविकांत सिंह भदौरिया ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का विभाजन पूर्णतः धार्मिक आधार पर किया गया था, जो इतिहास की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी साबित हुआ। अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति ने सदियों पुराने भाईचारे को चंद दिनों में नेस्तनाबूद कर दिया। उन्होंने सीमा निर्धारण की प्रक्रिया पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि ब्रिटिश अधिकारी सर सिरिल रेडक्लिफ को भारत के भूगोल और सामाजिक ताने-बाने का कोई ज्ञान नहीं था। उन्होंने बंद दफ्तर में बैठकर भारत के नक्शे पर महज़ एक पेंसिल खींचकर इस महान देश को दो टुकड़ों में बांट दिया। इस क्रूर मज़ाक के कारण रातों-रात लाखों लोगों के घर और आंगन दो अलग देशों में बंट गए। राजनीतिक पहलुओं का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना की ‘द्वि-राष्ट्र सिद्धांत’ की हठ और लॉर्ड माउंटबेटन की जल्दबाज़ी ने देश को दंगों की आग में झोंक दिया। पंडित जवाहरलाल नेहरू सहित तत्कालीन नेतृत्व के सामने आज़ादी के साथ-साथ भयंकर विस्थापन की चुनौती थी, जिसमें लाखों मासूमों की जान गई।
उन्होंने आगे बोलते हुए कहा कि आज इस मंच से मैं देश के तमाम युवाओं को आह्वान करता हूँ कि आइए, हम सब मिलकर ‘अखंड भारत’ का संकल्प लें। अखंड भारत केवल भौगोलिक सीमाओं को जोड़ने का नाम नहीं है, बल्कि यह हमारे दिलों को जोड़ने का संकल्प है। यह संकल्प है कि हम देश में फिर कभी जाति, धर्म या भाषा के नाम पर बंटवारा नहीं होने देंगे। हम आपसी भाईचारे, शांति और अखंडता की रक्षा करेंगे ताकि भारत फिर से विश्व गुरु बन सके।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विद्यालय के संचालक श्री कौशलेन्द्र सिंह चौहान ने अपने प्रखर अध्यक्षीय उद्बोधन में भारत की अखंडता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता और अखंडता की रक्षा के लिए अब देश के युवाओं को आगे आना होगा। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन भारत का आखिरी विभाजन था, अब भविष्य में देश का पुनः कोई बंटवारा न हो, इसके लिए देश के युवा को हर समय तैयार और सजग रहना होगा। युवा शक्ति ही देश की एकता की असली ढाल है।
अतिथियों ने विद्यालय के छात्र-छात्राओं का आह्वान करते हुए कहा कि इतिहास की इन गलतियों को याद रखने का उद्देश्य नफरत फैलाना नहीं, बल्कि अपनी जुदा हुई जड़ों को याद करना है। उन्होंने युवाओं को आपसी भाईचारे और देश की एकता को अक्षुण्ण रखते हुए एक सशक्त एवं ‘अखंड भारत’ के निर्माण का संकल्प दिलाया।
कार्यक्रम का सफल संचालन श्री घनश्याम सिंह भदौरिया द्वारा किया गया। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय परिवार की ओर से श्री प्रशांत सिंह चौहान ने सभी अतिथियों और आगंतुकों का आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर विशेष रूप से विद्यालय की प्राचार्य डॉ. प्रतिभा गौर और श्री गौरव सिंह राजपूत सहित स्कूल के शिक्षक गण, प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
