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15 साल से अधूरा ‘आकृति हाइलैंड’, अब 8 महीने के आश्वासन पर भी सवाल

AG8 Ventures के प्रोजेक्ट में जिंदगी भर की कमाई लगाने वाले अलॉटी आज भी इंतजार में; हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में भी कंपनी और निदेशकों पर RERA की कार्रवाई का उल्लेख

भोपाल। आकर्षक सुविधाओं, आधुनिक टाउनशिप और बेहतर भविष्य के सपने दिखाकर घर का सपना बेचने वाले बिल्डर के सामने अब वही खरीदार अपने घर और निवेश की सुरक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। भोपाल-इंदौर रोड के फंदा क्षेत्र में लगभग 120 एकड़ में विकसित किए गए ‘आकृति हाइलैंड’ की मौजूदा स्थिति ने एक बार फिर AG8 Ventures के कामकाज और उसके प्रोजेक्ट्स को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित अलॉटियों का आरोप है कि करीब 15 साल बीत जाने के बाद भी परियोजना अपनी घोषित सुविधाओं और विकास के मुकाम तक नहीं पहुंच सकी, जबकि उनकी जिंदगी भर की कमाई इस प्रोजेक्ट में फंसी हुई है।

नाम ‘आकृति’, सपने बड़े… लेकिन जमीन पर बदहाली 

आकृति हाइलैंड की घोषणाआकृति ब्रांड के नाम से विकसित किए गए विभिन्न प्रोजेक्ट्स में AG8 Ventures Ltd. की भूमिका और उसके निदेशकों हेमंत कुमार सोनी और राजीव सोनी पर सवालिया उल्लेख न्यायिक रिकॉर्ड में भी मिलता है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के 29 मार्च 2022 के एक आदेश में AG8 Ventures तथा इन दोनों को निदेशक/प्रमोटर के रूप में पक्षकार बनाया गया था। मामला RERA की कार्रवाई से जुड़ा था और एक साथ 10 रिट याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने आदेश पारित किया।

इस मामले में RERA के रिकॉर्ड के अनुसार एक प्रोजेक्ट से अलॉटियों से प्राप्त ₹2.8399 करोड़ में से केवल ₹67.72 लाख निर्माण और भूमि पर खर्च किए जाने तथा शेष ₹2.1627 करोड़ अन्य मदों में खर्च होने की बात सामने आई थी। RERA ने यह भी पाया था कि परियोजना के लिए अलग खाते में जमा राशि RERA कानून के तहत आवश्यक 70 प्रतिशत से काफी कम थी। हाईकोर्ट ने RERA के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए सभी संबंधित रिट याचिकाएं खारिज कर दी थीं, हालांकि अपील का वैधानिक रास्ता खुला रखा गया था।

यह तथ्य इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आज भी सवाल वही है—आखिर अलॉटियों से प्राप्त धन के बदले परियोजनाओं का विकास अपेक्षित गति और स्वरूप में क्यों नहीं हो सका?

‘आकृति हाइलैंड’ के पीड़ितों का सवाल—आठ महीने में हुआ क्या?

आकृति हाइलैंड में प्लॉट्सआकृति हाइलैंड के पीड़ितों के अनुसार जनवरी 2026 में हेमंत सोनी ने वीडियो संदेश के माध्यम से आश्वासन दिया था कि अलॉटियों और ऑनर्स के सामूहिक प्रयास से आकृति हाइलैंड को दोबारा शुरू कराया जाएगा। अब उस आश्वासन को लगभग आठ महीने हो चुके हैं, लेकिन पीड़ितों का कहना है कि मौके पर ऐसा कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं देता, जिससे परियोजना के वास्तव में पुनः शुरू होने की उम्मीद बंधे।

पीड़ितों का आरोप है कि लगभग 15 वर्षों से वे अपने घर के इंतजार में हैं, जबकि परियोजना के भविष्य को लेकर लगातार आश्वासन दिए जाते रहे हैं। उनका कहना है कि अब उन्हें बयान या वीडियो नहीं, बल्कि यह जानना है कि—

प्रोजेक्ट दोबारा शुरू करने की वास्तविक योजना क्या है?

अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए?

कितनी राशि और संसाधन लगाए गए?

अधूरे विकास कार्यों को पूरा करने की समयसीमा क्या है?

अलॉटियों को उनके घर और मूलभूत सुविधाएं आखिर कब मिलेंगी?

पीड़ितों की सबसे बड़ी आपत्ति यही है कि एक और आश्वासन के भरोसे वे कितने वर्ष और इंतजार करें?

कुर्की-नीलामी से लेकर RERA कार्रवाई तक, सवालों का दायरा बड़ा

AG8 से जुड़ी प्रशासनिक कार्रवाई भी इस पूरे मामले को और गंभीर बनाती है। जून 2024 में भोपाल नगर निगम नेहेमंत सोनी आकृति इको सिटी से जुड़े एमपी नगर स्थित कार्यालय की कुर्की की कार्रवाई की थी। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार निगम अधिकारियों ने करीब ₹70 लाख संपत्ति कर बकाया होने की बात कही थी और भुगतान नहीं होने पर कार्यालय कुर्क किया गया था।

वहीं हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में RERA की उस कार्रवाई का उल्लेख है जिसमें परियोजना से प्राप्त रकम के उपयोग और 70 प्रतिशत राशि अलग खाते में रखने की अनिवार्यता को लेकर सवाल उठे थे। अदालत ने RERA के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया और संबंधित याचिकाएं खारिज कर दीं।

ऐसे में आकृति हाइलैंड के अलॉटियों का सवाल केवल एक अधूरी कॉलोनी का सवाल नहीं रह जाता। यह सवाल उस भरोसे का है जिसके आधार पर लोगों ने अपनी जिंदगी की कमाई बिल्डर को सौंपी थी।

अब सवाल सीधा है—जनवरी का आश्वासन और सितंबर तक का इंतजार। आठ महीने में धरातल पर क्या बदला? यदि प्रोजेक्ट वास्तव में पुनः शुरू करने की तैयारी में है तो नक्शा, वित्तीय योजना, निवेश, कार्ययोजना, समयसीमा और मौके पर शुरू हुए काम का हिसाब सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा? अलॉटियों को अब आश्वासन नहीं, अपने घर चाहिए।