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7 अगस्त से ग्वालियर में शुरू होगा ‘मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान’, हर शुक्रवार जनता के बीच पहुंचेगा प्रशासन

8 जनवरी 2027 तक चलने वाले अभियान में मुख्यमंत्री से लेकर कलेक्टर तक करेंगे मैदानी भ्रमण, शिकायतों के त्वरित समाधान और योजनाओं की जमीनी हकीकत पर रहेगा फोकस

ग्वालियर, 31 जुलाई 2026। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर प्रदेशव्यापी “मुख्यमंत्री जन-विश्वास अभियान” का शुभारंभ 7 अगस्त से ग्वालियर जिले में भी होगा। 8 जनवरी 2027 तक चलने वाले इस अभियान के तहत मुख्यमंत्री, मंत्रिगण, मुख्य सचिव, संभागीय कमिश्नर, कलेक्टर तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से मैदानी भ्रमण कर आमजन से सीधे संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करेंगे। साथ ही शासकीय योजनाओं और सेवाओं के जमीनी क्रियान्वयन का भी प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया जाएगा।

ग्वालियर कलेक्टर ने अभियान के प्रभावी संचालन के लिए सभी विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक शुक्रवार को अधिकारी फील्ड में रहकर आमजन की समस्याओं का समाधान करेंगे और अनावश्यक बैठकों से बचेंगे।

हर शुक्रवार होगा जनसंवाद दिवस

अभियान के तहत प्रत्येक शुक्रवार जिलेभर में विशेष फील्ड भ्रमण किया जाएगा। इस दिन प्रशासनिक अमला गांवों और शहरों में पहुंचकर लोगों से सीधे संवाद करेगा। कलेक्टर एक सप्ताह पहले भ्रमण क्षेत्रों का निर्धारण करेंगे और इसकी जानकारी जनप्रतिनिधियों को भी दी जाएगी।

पहले समीक्षा, फिर मौके पर समाधान

मैदानी भ्रमण से पहले संबंधित क्षेत्रों में सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई और लोक सेवा गारंटी अधिनियम के लंबित मामलों की समीक्षा होगी। भ्रमण के दौरान प्राप्त शिकायतों का यथासंभव मौके पर ही निराकरण किया जाएगा। अभियान के पहले और बाद के लंबित मामलों की तुलना कर जिलों के प्रदर्शन का मूल्यांकन भी होगा, जिसकी समीक्षा मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर पर की जाएगी।

उद्योगों और आमजन दोनों पर रहेगा फोकस

प्रत्येक शुक्रवार जिला प्रशासन जनसंवाद के साथ उद्योग संवाद भी आयोजित करेगा। एमएसएमई, कुटीर एवं बड़े उद्योगों से जुड़े उद्यमियों की समस्याओं का भी मौके पर समाधान करने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री के प्रस्तावित भ्रमण वाले जिलों में “समाधान ऑनलाइन” कार्यक्रम भी आयोजित होंगे।

इन सेवाओं और योजनाओं की होगी व्यापक जांच

अभियान के दौरान सीएम हेल्पलाइन, जनसुनवाई, लोक सेवा गारंटी, नामांतरण, सीमांकन, न्यायालयीन आदेशों के पालन, किसान फार्मर आईडी, आयुष्मान कार्ड, समग्र ई-केवाईसी, प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, स्वास्थ्य सेवाओं, विद्यालयों, महाविद्यालयों, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, खाद-बीज उपलब्धता सहित विभिन्न योजनाओं की विस्तृत समीक्षा होगी।

सड़कों से लेकर थानों तक होगा निरीक्षण

अभियान के तहत सड़कें, तालाब, अमृत सरोवर, बांध, जल जीवन मिशन की संरचनाएं, शासकीय भवन, मेडिकल कॉलेज, आईटीआई, तहसील, कृषि उपज मंडी, पुलिस थाना, लोक सेवा केंद्र, औद्योगिक क्षेत्र, गैस गोदाम, पेट्रोल पंप, निजी विद्यालय तथा अन्य सार्वजनिक संस्थानों का निरीक्षण किया जाएगा। कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की स्थिति का भी आकलन होगा।

संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी होंगे आधार

राज्य सरकार के अनुसार अभियान के चार प्रमुख स्तंभ संवाद, समाधान, संवेदनशीलता और सादगी होंगे। अभियान पूरी तरह मितव्ययिता के सिद्धांत पर संचालित किया जाएगा, जिसमें अनावश्यक खर्च से बचते हुए उपलब्ध शासकीय संसाधनों का उपयोग किया जाएगा। इसका उद्देश्य शासन और जनता के बीच विश्वास को मजबूत करना, प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ाना तथा सुशासन को अधिक प्रभावी बनाना है।