राजस्व विभाग ने एक तरफा माना– MPBDC की निर्माण एजेंसी फेल ! 42 में से 13 काम शुरू ही नहीं, स्वीकृतियाँ रद्द होने के संकेत! हकीकत कछ और भी
भोपाल, बृजराज सिंह। म प्र शासन के राजस्व विभाग की एक बेहद अहम और चौंकाने वाली चिट्ठी ने मध्यप्रदेश भवन विकास निगम (MPBDC) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय समीक्षा में साफ स्वीकार किया गया है कि राजस्व विभाग के अंतर्गत कार्यालय एवं आवासीय भवनों के निर्माण कार्यों में संतोषजनक प्रगति नहीं हुई बल्कि हालात चिंताजनक हैं, जिसमें बेहतरी की जरूरत है। हालांकि राजस्व विभाग के इस पत्र में बीडीसी के तकनीकी एवं महत्वपूर्ण कारणों को नजर अंदाज करते हुए एक तरफा रवैया दिखा है ?
राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव विवेक कुमार पोरवाल द्वारा 8 जनवरी 2026 को जारी इस पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि “1 दिसंबर 2025 को हुई समीक्षा बैठक में MPBDC की प्रगति असंतोषजनक है” जबकि वास्तविक स्थिति इससे भिन्न है।
प्रमुख सचिव से संपादक के विमर्श फलस्वरुप राजस्व विभाग द्वारा जारी इस समीक्षा पत्र को यदि चेतावनी के बजाय सुधार का अवसर माना जाए” तो ये MPBDC के लिए अपनी कार्यशैली, विश्वसनीयता और गति को पुनः स्थापित करने का अहम मोड़ साबित हो सकता है।
43 काम स्वीकृत,12 शुरू भी नहीं हुए..
पत्र के मुताबिक_दिसंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच लगभग 42 निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए, इनमें से 13 कार्य विभिन्न कारणों से आज तक शुरू ही नहीं हो सके और जो कार्य शुरू हुए, वे भी अब तक प्रारंभिक अवस्था में ही अटके हैं। सबसे गंभीर मसला यह है कि निर्माण एजेंसी द्वारा बजट की स्वीकृत राशि में से एक रुपया तक खर्च नहीं किया गया।
राजस्व विभाग ने कड़े शब्दों में चेताया है कि यदि निर्माण कार्यों की संतोषजनक प्रगति शीघ्र सुनिश्चित नहीं की गई, तो प्रशासनिक स्वीकृतियाँ निरस्त की जा सकती हैं, जिम्मेदारी तय करते हुए कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। इस पर युग क्रांति द्वारा की गई पड़ताल में स्थिति कुछ भिन्न पाई गई।
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार म.प्र.भवन विकास निगम को प्राप्त 43 कार्यो की प्रशासकीय स्वीकृति में से 12 कार्यों का स्थानीय कारणों से कार्य प्रारंभ नहीं किया जा सका है। शेष 31 कार्य प्रगतिरत है, उक्त 31 कार्यो में लगभग 7.5 करोड़ का भुगतान किया जा चुका है। अधिकांश कार्य फुटिंग स्तर पर प्रगतिरत है। फुटिंग स्तर पर कार्य में आवश्यक प्रगति नहीं आ पाती है। इसके अतिरिक्त आगामी 3 माह- जनवरी, फरवरी एवं मार्च तक 111.91 करोड़ प्राप्त करने का लक्ष्य रखा गया है। शेष कार्य अभी तक शुरू न हो पाने की वजह _ कहीं परियोजना संबंधी भूमि उपलब्ध नहीं है, ध्वस्तीकरण प्रक्रियाधीन, ड्राइंग उपलब्ध नहीं, जगह का भूमि पूजन ना होना तो कहीं तहसील कार्यालय स्थानांतरण जैसी स्थानीय समस्याएं इसकी असल वजह है न कि निर्माण एजेंसी।
सरकार की मंशा साफ_अब अमल की बारी..
सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि योजनाएँ स्वीकृत हैं, बजट उपलब्ध है, लिहाजा अब आवश्यकता है_ प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध कार्ययोजना और ज़मीनी निगरानी की, यद्यपि निगम बेहतर से बेहतरीन की दिशा में लगातार प्रयास रहता है।
MPBDC यदि चाहे तो—लंबित 12/13 कार्यों के लिए त्वरित एक्शन प्लान जारी कर सकता है, ज़िला स्तर पर जिम्मेदारी तय कर साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट लागू कर सकता है और तकनीकी एवं प्रशासनिक अड़चनों को स्पष्ट कर उन्हें सार्वजनिक रूप से साझा कर सकता है।
भरोसा लौटने का अवसर
इस पारदर्शिता से भरोसा लौटेगा और आज जब सरकार ई-गवर्नेंस एवं परिणाम आधारित प्रशासन की बात कर रही है तो MPBDC के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वह—हर स्वीकृत परियोजना की ऑनलाइन प्रगति स्थिति सार्वजनिक करे,ठेकेदारों व इंजीनियरिंग टीमों की उत्तरदायित्व सूची तय करे और निर्माण की गुणवत्ता एवं समयसीमा पर शून्य समझौता नीति अपनाए। यह कदम न केवल विभागीय विश्वास बढ़ाएंगे, बल्कि जनता के बीच निगम की साख भी मजबूत करेंगे और तभी जाकर सीजीएम राजकुमार त्रिपाठी की मंशा और एमडी सीबी चक्रवर्ती के नवाचार को संबल मिलेगा।
MPBDC के लिए यह समय—
बहानों का नहीं, परिणाम दिखाने का है।
फाइलों का नहीं, फाउंडेशन डालने का है।
स्पष्टीकरण का नहीं, समाधान प्रस्तुत करने का है।
यदि निगम इस चेतावनी को सुधार की सीढ़ी बनाए, तो आने वाले महीनों में वही MPBDC सुशासन की मिसाल बन सकता है। युगक्रांति उम्मीद करता है कि BDC इस अवसर को गंवाएगा नहीं, बल्कि इसे अपनी कार्यक्षमता सिद्ध करने का मंच बनाएगा।
