परिजन लेने आए स्वर्ग सदन, कलेक्टर से मुलाकात कर परिजनों ने दिया धन्यवाद
ग्वालियर 03 फरवरी 2026/ शहर में असहाय घूमने वाले मानसिक रूप से दिव्यांगजनों की स्वर्ग सदन में देखभाल की जाती है। कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान की पहल पर इन दिव्यांगजनों का आधार कार्ड बनाना कार्य प्रारंभ किया गया है। स्वर्ग सदन में पिछले पांच सालों से निवास कर रहे एक दिव्यांगजन के आधारकार्ड बनवाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई तो कम्प्यूटर में उसकी डिटेल निकलकर सामने आ गई, उसमें दिव्यांग का नाम पप्पू रैकवार बताया गया एवं निवास स्थान दबोह बताया गया। इसके बाद पप्पू रैकवार के परिजनों से स्वर्ग सदन के लोगों ने चर्चा कर जीवित होने की जानकारी दी, तो परिवार भौचक्का रह गया। क्योंकि परिजनों ने पप्पू रैकवार को मृत मानकर उसकी त्रयोदषी कर दी थी। पप्पू रैकवार का परिवार उसे लेने के लिए आया और कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान से परिजनों ने मुलाकात कर उन्हें धन्यवाद दिया।
स्वर्ग सदन में लगभग एक सैंकडा मानसिक रूप से दिव्यांगजन निवास करते हैं। इन दिव्यांगजनों का यहीं पर उपचार किया जाता है। इनमें से अधिकांश दिव्यांगजनों को ना तो अपना नाम पता है और ना ही घर का पता मालूम है। कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान की पहल पर इन सभी का आधारकार्ड बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है। आधारकार्ड के लिए जब इन लोगों की आंखों की फोटो एवं उंगलियों के निशान लिए गए तो इनका पुराना रिकॉर्ड निकलकर सामने आ रहा है। जिससे इनका नाम पता और परिजनों का मोबाइल नंबर तक का पता चल रहा है।
स्वर्ग सदन में पिछले पांच साल से उपचार कर रहे पप्पू रैकवार का जब आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ हुई तो पप्पू का नाम और उसके घर का पता चला। पप्पू का घर दबोह में है। परिजनों से बात कर पप्पू के जीवित होने की सूचना दी तो परिजन आज पप्पू को लेने के लिए स्वर्ग सदन आए। परिजनों ने बताया कि जून 2021 में पप्पू को उपचार के लिए मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती कराया था, अचानक पप्पू वहां से गायब हो गया। पप्पू की काफी खोजबीन की गई, लेकिन उसका पता नहीं चला। परिजनों ने उसे मृत मानकर उसकी त्रयोदषी कर दी। पप्पू को लेने आए परिजनों ने कलेक्टर श्रीमती रूचिका चौहान से मुलाकात की। साथ ही अपने भाई की बेहतर देखभाल के लिए कलेक्टर एवं स्वर्ग सदन के वॉलेंटियरों को धन्यवाद दिया।
कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान द्वारा स्वर्ग सदन का निरीक्षण करते समय एमिटी विश्वविद्यालय से पीजीडीआरपी की 19 छात्रायें भी मिलीं, जो सप्ताह में पाँच दिन प्रात: 10 बजे से 12 बजे तक स्वर्ग सदन का नियमित भ्रमण कर मरीजों से चर्चा कर उनके जीवन, इतिहास, पारिवारिक पृष्ठभूमि और वर्तमान समस्याओं की जानकारी लेती हैं। आवश्यकता पड़ने पर मनोवैज्ञानिक परीक्षण करती हैं और उस आधार पर उन्हें सहयोग प्रदान करती हैं। सभी छात्राओं ने कलेक्टर को बताया कि स्वर्ग सदन में बेहतर भोजन, दवा की व्यवस्था की जा रही है। इसके साथ ही थैरेपी एवं अन्य पुनर्वास सेवाओं के समन्वय से यहां रह रहे लोगों को लाभ मिल रहा है। कलेक्टर ने उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा की।
