जोगा के नेतृत्व में चाक-चौबंद होगा मध्य प्रदेश परिवहन विभाग

अधीनस्थ अमले और ड्राइवरों से बेहतर तालमेल के लिए जाने जाते हैं वरिष्ठ आईपीएस उमेश जोगा

भोपाल 3 फरवरी 2026। 1997 बैच के आईपीएस अधिकारी उमेश जोगा की परिवहन विभाग में वापसी को सरकार का एक सख्त लेकिन संतुलित प्रशासनिक फैसला माना जा रहा है। बेहतर पुलिसिंग, अनुशासन और पारदर्शिता की पहचान रखने वाले जोगा को 15 माह बाद एक बार फिर मध्य प्रदेश परिवहन विभाग की कमान आयुक्त के रूप में सौंपी गई है।

परिवहन विभाग में अपर आयुक्त (प्रवर्तन) के रूप में दिए गए पिछले 8 माह के कार्यकाल में जोगा की कार्यशैली ने न सिर्फ विभागीय अमले में भरोसा पैदा किया, बल्कि वाहन चालकों एवं संचालकों के साथ संवाद की एक नई मिसाल भी कायम की। इन्हीं प्रभावी सेवाओं का परिणाम है कि सरकार ने उन्हें विभाग की प्रमुख भूमिका में पुनः स्थापित किया है।

एडिशनल एसपी से एडीजी तक—अनुशासन और परिणामों का सफर

एडिशनल एसपी ग्वालियर के रूप में सेवा प्रारंभ करने वाले उमेश जोगा ने मध्य प्रदेश के कई जिलों में पुलिस अधीक्षक रहते हुए अपराध नियंत्रण के ठोस परिणाम दिए। इसके बाद चंबल, रीवा और जबलपुर जैसे संवेदनशील एवं बड़े संभागों में आईजी के रूप में उन्होंने कुशल नेतृत्व का परिचय दिया।
हाल ही में वे एडीजी उज्जैन के पद पर कार्यरत रहे।

उल्लेखनीय है कि एडिशनल एसपी के कार्यकाल में ही उन्होंने वाहन चोर गिरोहों पर सख्त प्रहार करते हुए कई संगठित नेटवर्क का पूरी तरह सफाया किया था। छात्र संगठनों से संवाद में भी उनका संतुलित और दृढ़ अंदाज चर्चा में रहा।

प्रवर्तन में पारदर्शिता, शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई

परिवहन विभाग में अपर आयुक्त (प्रवर्तन) के रूप में जोगा का 8 माह का कार्यकाल बेहद प्रभावी रहा। सीमित अधिकारों के बावजूद उन्होंने_ पारदर्शी प्रक्रिया को बढ़ावा दिया,
*प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लिया,
*वाहन चालकों व संचालकों से संवाद स्थापित किया,
*विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों के हितों की रक्षा की

हालांकि कई मामलों में तत्कालीन आयुक्त का उन्हें पूर्ण समर्थन नहीं मिला, फिर भी जोगा ने बिना विचलित हुए नियम आधारित प्रशासन को आगे बढ़ाया।

फेक वीडियो, दूषित पत्रकारिता और अराजक तत्वों पर लगेगी लगाम

जहां एक ओर, परिवहन विभाग बीते समय में कुछ फर्जी पत्रकारों और अराजक तत्वों के लिए मानो रोज़ी-रोटी का जरिया बन गया था। नियमों के उल्लंघन पर चालान की कार्रवाई को एकतरफा वीडियो और इंटरव्यू के जरिए सोशल मीडिया व खबरों में तोड़-मरोड़ कर प्रवर्तन अमले को बदनाम और ब्लैकमेल करने की घटनाएं अक्सर सामने आती रही हैं।

वहीं दूसरी तरफ, कुछ स्थानीय तत्वों द्वारा ड्राइवर महासंघ के नाम पर चक्का जाम जैसी धमकियों को हथियार बनाकर विभाग पर दबाव बनाने के प्रयास भी होते रहे। इन हालातों में स्थानीय प्रवर्तन अमले को मानसिक, प्रशासनिक और सामाजिक कीमत चुकानी पड़ी—यहां तक कि कुछ टीएसआई को इस्तीफे तक की स्थिति का सामना करना पड़ा।

बुधवार या गुरुवार को संभालेंगे आयुक्त का कार्यभार

उज्जैन मुख्यमंत्री का गृह जिला होने के साथ-साथ अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। वर्तमान में वहां एडीजी के पद पर जोगा कार्यरत हैं। नए एडीजी राकेश गुप्ता के पदस्थ होने के बाद जोगा उज्जैन से रिलीव होकर इसी सप्ताह बुधवार अथवा गुरुवार को परिवहन आयुक्त का पदभार ग्रहण करेंगे।

स्पष्ट संकेत है कि अब परिवहन विभाग में अनुशासन, पारदर्शिता और नियमों का राज होगा। वरिष्ठ एवं अनुभवी उमेश जोगा का नेतृत्व विभाग के लिए सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सिस्टम को पटरी पर लाने की निर्णायक पहल माना जा रहा है।