भोपाल 18 फरवरी 2026। मध्यप्रदेश विधानसभा में वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत वर्ष 2026-27 के बजट को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। एक ओर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने इसे “जनता से विश्वासघात” बताया है, तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इसे “समृद्ध, सुखद और सम्पन्न मध्यप्रदेश” के सपने को साकार करने वाला बजट बताया है।
करीब 4 लाख 38 हजार 317 करोड़ रुपए के इस बजट ने सियासी बहस को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है—सवाल यह है कि क्या यह बजट वादों की पूर्ति है या फिर घोषणाओं की नई किताब?
कमलनाथ के सवाल: “वादे कहां गए?”
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बजट पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा द्वारा प्रस्तुत बजट में “बातों के बताशे” तो हैं, लेकिन जनहित का सार गायब है।
उन्होंने विधानसभा चुनाव 2023 से पहले किए गए चार प्रमुख वादों की याद दिलाई—
* किसानों को धान का MSP ₹3100 प्रति क्विंटल
* गेहूं का MSP ₹2700 प्रति क्विंटल
* लाड़ली बहन योजना में ₹3000 प्रतिमाह
* घरेलू गैस सिलेंडर ₹450 में
कमलनाथ का आरोप है कि इन वादों का बजट भाषण में स्पष्ट प्रावधान नहीं दिखता।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया—
* पिछले बजट की घोषणाओं का क्या हुआ?
* केंद्र से करों की हिस्सेदारी में 50 हजार करोड़ की कमी की भरपाई कैसे होगी?
* केंद्र-राज्य संयुक्त योजनाओं में बकाया राशि पर सरकार की रणनीति क्या है?
उनके मुताबिक यह बजट “जनविरोधी” और “वादा खिलाफी” का दस्तावेज है।
मुख्यमंत्री का जवाब: “रोलिंग बजट से विकास की नई रफ्तार”
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने “रोलिंग बजट” की अवधारणा को अपनाया है। उनके अनुसार—
2026-27 में राज्य का सकल घरेलू उत्पाद 18.48 लाख करोड़ अनुमानित
* वृद्धि दर 10.69%
* प्रति व्यक्ति आय में 9% वृद्धि
* पूंजीगत व्यय 1 लाख करोड़ से अधिक
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि बजट में किसी नए कर का बोझ नहीं डाला गया है और प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना के लिए पर्याप्त प्रावधान है।
कृषि क्षेत्र के लिए 1.15 लाख करोड़ रुपए, अधोसंरचना के लिए 1 लाख करोड़ से अधिक का पूंजीगत व्यय, सिंहस्थ और शहरी विकास योजनाएं, ‘द्वारका योजना’, ‘यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना’, तथा लाड़ली बहना योजना के लिए 23,883 करोड़ का प्रावधान—इन सबको सरकार अपनी उपलब्धि बता रही है।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि “GYANII” मॉडल—गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी शक्ति, इंडस्ट्री और इंफ्रास्ट्रक्चर—पर आधारित यह बजट 2047 के “विकसित मध्यप्रदेश” की नींव है।
जनता के मन में उठते सवाल
अब असली परीक्षा आंकड़ों और दावों से आगे जाकर ज़मीन पर होगी।
क्या किसानों को घोषित MSP वास्तव में मिलेगा?
क्या लाड़ली बहनों को 3000 रुपए प्रतिमाह की दिशा में बढ़ोतरी होगी?
क्या केंद्र से मिलने वाली कम राशि का असर विकास योजनाओं पर पड़ेगा?
क्या “रोलिंग बजट” मॉडल पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाएगा?
विपक्ष इसे विश्वासघात कह रहा है, जबकि सरकार इसे विकास का रोडमैप बता रही है। सियासी बयानबाज़ी के बीच मध्यप्रदेश की जनता अब यह देखना चाहती है कि बजट के पन्नों से निकलकर घोषणाएं कब और कैसे धरातल पर उतरती हैं। युग क्रांति की नज़र इस बजट के क्रियान्वयन और ज़मीनी सच्चाई पर बनी रहेगी।
