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“भारत और एआई: शिक्षा के क्षेत्र में भविष्य की दिशा”

विश्व में एआई की बढ़ती भूमिका को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में इंडिया एआई इम्पैक्ट एक्सपो 2026 का उद्घाटन किया। यह आयोजन 20 फरवरी तक चलेगा और इसमें एआई के व्यावहारिक उपयोग का प्रदर्शन किया जाएगा।

भारत में एआई का भविष्य उज्ज्वल है, खासकर शिक्षा के क्षेत्र में। एआई के माध्यम से शिक्षा को अधिक व्यक्तिगत और प्रभावी बनाया जा सकता है। एआई-आधारित शिक्षण प्रणालियाँ छात्रों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षण सामग्री प्रदान कर सकती हैं, जिससे उनकी सीखने की क्षमता में सुधार हो सकता है ।

एआई और शिक्षा: भविष्य की संभावनाएं

*व्यक्तिगत शिक्षण: एआई-आधारित शिक्षण प्रणालियाँ छात्रों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षण सामग्री प्रदान करने में मददगार साबित हो सकती हैं।
*ऑटोमेटेड ग्रेडिंग: एआई के माध्यम से शिक्षकों का समय बचाया जा सकता है, जिससे वे अधिक प्रभावी ढंग से शिक्षण पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे।
*वर्चुअल लैब्स: एआई-आधारित वर्चुअल लैब्स छात्रों को प्रयोगशाला में प्रयोग करने का अनुभव प्रदान करगी , जिससे उनकी सीखने की क्षमता में सुधार होगा और छात्र गुणवत्ता परक ज्ञान की ओर अग्रसर होंगे ।
*शिक्षकों की सहायता: एआई-आधारित शिक्षण प्रणालियाँ शिक्षकों को छात्रों की 360 डिग्री मूल्यांकन प्रगति की निगरानी करने और उन्हें व्यक्तिगत शिक्षण प्रदान करने में सहायता कर सकती हैं ।

भारत में एआई की भविष्य की दिशा

भारत सरकार ने एआई के विकास के लिए कई पहल की हैं, जिनमें से एक है इंडिया एआई मिशन। इस मिशन का उद्देश्य भारत में एआई के विकास को बढ़ावा देना और इसके माध्यम से देश की आर्थिक और सामाजिक विकास में योगदान करना है ।

भारत में एआई के विकास के लिए कदम

हमारा देश विविधताओं से भरा पड़ा है। संसदीय प्रणाली के चलते खींचतान भी होती ही रहती है। सच्चाई यह भी है कि राज्य सरकारें केंद्र सरकार की कार्य योजनाओं को तहदिल से स्वीकार नहीं करती है । इस हिसाब से नपे-तुले कदम उठाने की जरूरत है।

एआई शिक्षा को बढ़ावा देना: एआई शिक्षा को स्कूलों और कॉलेजों में शामिल करना चाहिए, ताकि छात्रों को एआई के बारे में जानकारी मिल सके।

एआई-आधारित शिक्षण प्रणालियों का विकास: एआई-आधारित शिक्षण विधियों का विकास करना चाहिए, जो छात्रों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षण सामग्री प्रदान कर सकें।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता: अनेकों अवसर पर
डेटा चोरी के आरोप लगाते रहे हैं। अतः एआई-आधारित शिक्षण प्रणालियों में डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को सुनिश्चित करना केंद्र व राज्य सरकार की प्राथमिकता में होना चाहिए ।
एआई आधारित सेवा कालीन शिक्षक प्रशिक्षण: वर्तमान अध्यापक शिक्षा पाठ्यक्रम में नवाचार प्रयोग संबंधित शिक्षण का व्यवहारिक ज्ञान बहुत कम दिया जाता है। सैद्धांतिक पक्ष पर अधिक जोर दिया जाता है। फलत: कक्षा शिक्षण और शैक्षणिकोत्तर व्यवहारिक तथ्यात्मक ज्ञान से शिक्षक अनभिज्ञ रहते है।
शंकाएं धरातलीय हो: हमारे देश में अनुभव किए बिना ही शंकाओं का अंबार लग जाता है। जब पहली बार 1980 के दशक में कंप्यूटर आया था , तब भी बहुत सारी शंकाएं जताई गई थी। इसी प्रकार 21 वीं सदी के पहले दशक में मोबाइल आया तब भी शंकाओं का अंबार लग गया था। लेकिन समय के साथ सब लोगों ने बदलाव को स्वीकार किया और आज कंप्यूटर और मोबाइल प्रत्येक वर्ग का अनिवार्य अंग बन गया है।
कोरोना काल में जब वर्चुअल कक्षाओं की शुरुआत हुई तब इन दोनों ही मशीन ने विद्यार्थियों के लिए संजीवनी बूटी का काम किया।

जब भी कोई नई तकनीक शुरू होती है, तो उसके दोनों पहलू होते हैं। सधे कदम और अनागत दृष्टि से उपयोग होने पर परिणाम सदैव अच्छे रहे हैं। कभी तक का अनुभव बताता है कि भारत के वैज्ञानिक, समाजशास्त्री, राजनेता और योजनाकार हमेशा लंबी दूरी सोच के साथ योजनाएं बनाते और लागू करते हैं। आशा की जानी चाहिए कि कृत्रिम बुद्धिमता अन्य क्षेत्रों के साथ-साथ शिक्षा के क्षेत्र में भी आशातीत सफलता की ओर बढ़ेगी।

* लेखक: डॉ बालाराम परमार ‘हॅंसमुख’ मध्यप्रदेश पाठ्य पुस्तक निर्माण एवं देखरेख समिति के स्थाई सदस्य हैं