कुख्यात KSP हाई सेकेंडरी स्कूल को दोबारा केंद्र बनाने पर प्रशासन कटघरे में, पर्यवेक्षकों को नोटिस जारी
ग्वालियर 13 फरवरी 2026। बोर्ड परीक्षाओं की साख पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। चार शहर के नाका स्थित KSP हाई सेकेंडरी स्कूल (केंद्र क्रमांक–142160) में आयोजित परीक्षा के दौरान जिला पंचायत सीईओ द्वारा की जा रही मॉनिटरिंग में नकल के आरोप सामने आने के बाद संबंधित दो पर्यवेक्षकों अनुपम गहरवार एवं श्रीमती दुर्गेश शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
आज 13 फरवरी 2026 को जारी पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि परीक्षा कक्ष में अनियमितता पाई गई और संबंधित कक्ष निरीक्षकों से जवाब तलब किया गया है। पत्र के अनुसार, केंद्राध्यक्ष द्वारा प्रेषित प्रतिवेदन और उच्च अधिकारियों के निर्देशों के क्रम में यह पाया गया कि परीक्षा कक्ष में बैठे परीक्षार्थियों के पास अनुचित सामग्री होने और नकल जैसी गतिविधियों की शिकायत दर्ज हुई। इस पर संबंधित प्रभारियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है और भविष्य में ऐसी पुनरावृत्ति न होने की सख्त चेतावनी भी दी गई है।
पहले से बदनाम, फिर भी क्यों बना परीक्षा केंद्र?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस KSP हाई सेकेंडरी स्कूल का नाम पहले भी नकल प्रकरणों में उछल चुका है, उसे आखिर बार-बार बोर्ड परीक्षा का केंद्र क्यों बनाया जाता है? स्थानीय स्तर पर यह केंद्र पहले से ही “संवेदनशील” माना जाता रहा है। परीक्षा केंद्र के मानकों के विपरीत गली-गूंचे में स्थित इस स्कूल की निगरानी व्यवस्था पर भी पूर्व में सवाल उठते रहे हैं।
फिर भी जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की ओर से इसे पुनः परीक्षा केंद्र घोषित कर देना कई संदेहों को जन्म देता है। क्या विभाग को पूर्व रिकॉर्ड की जानकारी नहीं थी? या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गईं?
जवाबदेही तय होगी या सिर्फ औपचारिकता?
कारण बताओ नोटिस जारी कर देना मात्र औपचारिक कार्रवाई तो नहीं? असल सवाल यह है कि—
*क्या इस संवेदनशील मामले में केंद्र अध्यक्ष एवं सहायक केंद्र अध्यक्ष की सवालिया जवाबदेही पर भी एक्शन होगा? *क्या केंद्र निर्धारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी?
*क्या पिछले वर्षों की शिकायतों की समीक्षा की गई थी?
*क्या परीक्षा केंद्र चयन में पारदर्शिता है या फिर प्रभाव और दबाव काम करते हैं?
जब बोर्ड परीक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर लापरवाही सामने आती है, तो यह केवल एक स्कूल या कुछ शिक्षकों का मामला नहीं रहता, बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न बन जाता है।
छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ क्यों?
बोर्ड परीक्षा किसी भी छात्र के शैक्षणिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होती है। ऐसे में यदि केंद्रों पर नकल और अव्यवस्था की खबरें आएंगी, तो ईमानदारी से परीक्षा देने वाले छात्रों के साथ यह सीधा अन्याय है।
अब देखना यह है कि जिला प्रशासन और माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल इस मामले में केवल नोटिस जारी कर खानापूर्ति करता है या फिर कुख्यात केंद्रों की सूची बनाकर उन्हें स्थायी रूप से ब्लैकलिस्ट करने का साहस भी दिखाता है।
युगक्रांति इस पूरे प्रकरण पर नजर बनाए हुए है। यदि जांच में और चौंकाने वाले तथ्य सामने आते हैं तो उन्हें भी सार्वजनिक किया जाएगा।
इनका क्या कहना है..
“बोर्ड परीक्षा की निगरानी कैमरा के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल और सीईओ- जिला पंचायत द्वारा की जा रही है। जिसके अंतर्गत आज 12वीं क्लास के भौतिकी एवं अन्य विषय की परीक्षा चल रही थी जिसमें बच्चों को हरकत करते हुए सीईओ द्वारा देखा गया। जिस पर उन्होंने तत्काल संज्ञान लेते हुए फोन करके निर्देश दिए। निर्देश के क्रम में उस कक्ष में के सभी विद्यार्थियों की तलाशी ली गई और दो पर्यवेक्षकों को पर्यवेक्षण में लापरवाही पर कारण बताओ नोट इसे जारी किया गया है, आगे क्या कार्रवाई होती है यह वरिष्ठ अधिकारी तय करेंगे”।
*सलमान खान, केंद्राध्यक्ष-केएसपी परीक्षाकेंद्र
पिछले साल परीक्षा में नकल कांड संबंधी खबर..
