युग क्रांति की निगरानी में फिर उजागर हुई नाफरमानी..
ग्वालियर। मध्य प्रदेश के वाणिज्य कर विभाग के नवागत आयुक्त अनय द्विवेदी ने स्पष्ट और सख्त संदेश दिया था कि संभाग स्तर पर संयुक्त आयुक्त (जॉइंट कमिश्नर) ही विभाग के प्रमुख जिम्मेदार अधिकारी हैं मगर निर्देशों के बावजूद ग्वालियर में संयुक्त आयुक्त (एईबी) रवी मोहन पटेल की कार्यालयीन उपस्थिति पर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं!
आयुक्त द्विवेदी ने साफ कहा था कि सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक कार्यालय में अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाए, विभागीय कार्यों की सतत निगरानी रखी जाए और संभागीय स्तर की सभी समीक्षा संयुक्त आयुक्तों के माध्यम से ही की जाएगी और यह आयुक्त के प्रति जवाबदेह होंगे आयुक्त का यह निर्देश जहां एक ओर विभागीय अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है तो वहीं, इन आदेशों के जमीनी स्तर पर पालन पर सवाल उठ रहे हैं?
ग्वालियर में आदेशों की अनदेखी?
युग क्रांति द्वारा कई दिनों तक की गई निगरानी और तथ्यात्मक पड़ताल के बाद जब आज पुनः कार्यालय का निरीक्षण किया गया तो संयुक्त आयुक्त मोहन पटेल एक बार फिर अपने कार्यालय में अनुपस्थित पाए गए।
ग्वालियर संभाग में हालिया फेरबदल के बाद रवी मोहन पटेल को जॉइंट कमिश्नर (एईबी) के रूप में पदस्थ किया। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार अभी आयुक्त द्वारा चेकिंग के पावर भी प्रदान नहीं किए गए हैं, बावजूद इसके वे अपने मुख्यालय और कार्यालय में नियमित रूप से उपलब्ध नहीं रहते।
जिम्मेदारी या औपचारिकता?
आयुक्त द्विवेदी ने विभागीय समीक्षा और अनुशासन को मजबूत करने का जो संदेश दिया था, वह तभी सार्थक होगा जब संयुक्त आयुक्त स्वयं कार्यालय में उपस्थित रहकर नेतृत्व करें। यदि वरिष्ठ अधिकारी ही समयपालन और जवाबदेही के प्रति उदासीन रहें तो अधीनस्थ अमले पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा, इसका अनुमान सहज लगाया जा सकता है।
यह स्थिति न केवल प्रशासनिक ढांचे पर प्रश्नचिह्न लगाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि क्या आयुक्त के आदेशों को गंभीरता से लिया जा रहा है या उन्हें महज औपचारिकता समझा जा रहा है।
आयुक्त की मंशा पर पानी?
प्रदेश मुख्यालय को रिपोर्टिंग करने वाले अधिकारी यदि गैर-जिम्मेदाराना ढंग से कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे तो वाणिज्य कर आयुक्त की सख्त मंशा और विभागीय सुधारों का क्या परिणाम होगा? हालांकि यह मामला ग्वालियर तक सीमित नहीं है अन्य कुछ संभागीय मुख्यालयों में यही हालत देखे गए।
अब देखना यह है कि आयुक्त द्विवेदी इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। ग्वालियर से उठे ये सवाल केवल एक अधिकारी की कार्यशैली तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पूरे प्रदेश में आदेशों के क्रियान्वयन की वास्तविक तस्वीर सामने लाने का संकेत दे रहे हैं। फिलहाल नियमों और आदेशों का पालन कराना अधिकारी की व्यक्तिगत सामर्थ्य और प्रशासनिक क्षमता पर निर्भर करता है।
