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MPRDC में ठेका–निविदा–बैंक गारंटी घोटाला, PNB दस्तावेज़ से हुआ बड़ा खुलासा

42 लाख की PNB बैंक गारंटी में DGM (HR) बर्नवाल की पत्नी और साला शामिल..
Security और housekeeping की आड़ में टोल मैनपावर का खेल..

भोपाल, बृजराज सिंह। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) में नियमों को ताक पर रखकर ठेके देने, निविदा प्रक्रिया को दरकिनार करने और बैंक गारंटी के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है, जो अब दस्तावेज़ी प्रमाणों के साथ एक बड़े प्रशासनिक और नैतिक घोटाले का रूप ले चुका है। पंजाब नेशनल बैंक (PNB) द्वारा जारी आधिकारिक दस्तावेज़ ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जिस MPSD Force Pvt. Ltd. को MPRDC ने केवल सुरक्षा (Security) एवं हाउसकीपिंग (Housekeeping) सेवाओं का अनुबंध दिया था, उसी की आड़ में टोल प्लाजा पर मैनपावर सप्लाई का कार्य भी कराया जा रहा है, वह भी बिना किसी नई निविदा, बिना पृथक अनुबंध और बिना वैधानिक स्वीकृति के।

यह पूरा मामला पहले भी युगक्रांति द्वारा विस्तार से उजागर किया जा चुका है, जिसमें यह बताया गया था कि MPRDC में ‘फैमिली नेटवर्क’ के ज़रिये सरकारी धन को पत्नी, साले व संबंधित कंपनियों तक पहुंचाया जा रहा है, और यह सिर्फ एक ठेके का मामला नहीं बल्कि एक व्यापक सिस्टमेटिक नेटवर्क के रूप में सामने आया है। जिसमें “MPRDC बना फैमिली बिजनेस!, सरकारी पैसा, निजी कंपनियां और पारिवारिक रिश्ते” का विस्तार से बताया गया है जिसे खबर के अंत में दी गई लिंक ओपन कर पढ़ सकते हैं।

 PNB का दस्तावेज़ बना सबसे बड़ा सबूत

PNB, RAM भोपाल द्वारा दिनांक 07 जनवरी 2022 को जारी पत्र (Ref No. 520300000718) के अनुसार MPSD Force Pvt. Ltd. को ₹42 लाख की Non-Fund Based Inland Bank Guarantee और ₹1 लाख की Cash Credit सीमा स्वीकृत की गई, जिससे कुल बैंक सीमा ₹43 लाख होती है। यह बैंक गारंटी MSME श्रेणी में PNB सेवा योजना के अंतर्गत प्रदान की गई थी और इसकी अवधि 12 माह निर्धारित की गई।

बैंक दस्तावेज़ यह भी स्पष्ट करता है कि यह गारंटी मूलतः Security एवं Housekeeping से जुड़े कार्यों के लिए ली गई थी, न कि टोल प्लाजा जैसे संवेदनशील और नियमित ऑपरेशनल कार्यों के लिए।

गारंटी में पत्नी भी, साला भी – पूरा पारिवारिक घेरा

सबसे गंभीर और विस्फोटक तथ्य यह है कि इस ₹42 लाख की बैंक गारंटी में गारंटरों की सूची में MPRDC के DGMबैंक गारंटी (HR) श्री संजय बरनवाल के निकटतम परिजन शामिल हैं। दस्तावेज़ के अनुसार गारंटरों में Mrs. Reena Baranwal जो संजय बरनवाल की पत्नी और Mr. Rohit Ranjan Baranwal उनके साले (Brother-in-Law) है, इनके नाम दर्ज हैं। सूत्रों के अनुसार इस बैंक गारंटी के लिए कॉलेटरल सिक्योरिटी में इन्हीं दोनों के स्वामित्व की निजी संपत्ति (साकेत नगर का 2400 वर्ग फीट का मकान) भी बंधक रखी गई है। यानी जिस विभाग में ठेका दिया गया, उसी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी की पत्नी और साले ने ठेकेदार की वित्तीय रीढ़ को सहारा दिया।

कानूनी और प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी कार्यरत वरिष्ठ अधिकारी के परिजनों का विभागीय ठेकेदार की बैंक गारंटी और वित्तीय लेन–देन में इस प्रकार शामिल होना म.प्र. सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965, वित्तीय शुचिता और निष्पक्षता के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या संबंधित अधिकारी इस पूरे प्रकरण में निष्पक्ष भूमिका निभा सकता था, या फिर यह पूरा तंत्र पारिवारिक प्रभाव और संरक्षण के तहत संचालित हुआ।

सुरक्षा और हाउसकीपिंग की गारंटी से टोल मैनपावर, नियमों की खुली धज्जियां

मामले की गंभीरता यहीं समाप्त नहीं होती। आरोप है कि जिस बैंक गारंटी का उपयोग केवल सुरक्षा और हाउसकीपिंग कार्यों के लिए होना था, उसी के आधार पर टोल प्लाजा पर क्लर्क, सुपरवाइजर और अन्य मैनपावर की आपूर्ति कराई जा रही है। यह न केवल GFR 2017 के नियम 171 और 204 का उल्लंघन है, बल्कि संविदा कानून और मध्यप्रदेश स्टोर क्रय नियम, 2019 की मूल भावना पर भी सीधा प्रहार है। टोल मैनपावर सप्लाई जैसा बड़ा और नियमित कार्य न तो आपातकालीन है और न ही अल्पकालिक, फिर भी इसके लिए न खुली निविदा बुलाई गई और न सीमित प्रतिस्पर्धा का अवसर दिया गया।

EPF–ESIC में भी गड़बड़ी के आरोप

सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि ठेकेदार को भुगतान किए जाने के बावजूद कर्मचारियों का EPF और ESIC वर्षों से जमा नहीं किया गया, जो श्रम कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। कानून के अनुसार ऐसी स्थिति में केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि भुगतान करने वाली एजेंसी के रूप में MPRDC भी सह-उत्तरदायी बनती है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

यह पूरा मामला अब केवल ठेके या बैंक गारंटी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि निविदा प्रक्रिया, वित्तीय अनुशासन, सेवा आचरण नियम और प्रशासनिक नैतिकता_ चारों पर सवाल खड़े कर रहा है। जब एक ही अधिकारी के परिवार के सदस्य ठेकेदार की गारंटी में शामिल हों और उसी ठेकेदार को नियमों से बाहर जाकर लाभ दिया जाए, तो यह महज संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित व्यवस्था की ओर इशारा करता है।
युग क्रांति का स्पष्ट सवाल है_यदि इतने ठोस दस्तावेज़ और विस्तृत खुलासे के बावजूद भी स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच नहीं होती, तो यह चुप्पी किस-किस की जिम्मेदारी तय करेगी? एमपीआरडीसी में लंबे समय से चल रही इस तरह की भीषण अनियमितताएं और महाघोटाले ने फिलहाल एमडी और सीजीएम को भी सवालों के कटघरे में खड़ा कर दिया है?

पिछला सनसनीखेज खुलासा

MPRDC बना फैमिली बिजनेस!, सरकारी पैसा, निजी कंपनियां और पारिवारिक रिश्ते

बीजी/अन्य घोटाला क्रमशः..