₹27 हजार से ₹27 करोड़ तक: ‘नटवरलाल मॉडल’ की नई गाथा.. (अगला भाग)
भोपाल 22 जनवरी 2026। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (MPRDC) में जो सामने आ रहा है, वह केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि शासकीय तंत्र के भीतर खड़े किए गए एक सुनियोजित ‘फैमिली नेटवर्क’ की तस्वीर पेश करता है। ‘₹27 हजार से ₹27 करोड़ तक’ नटवरलाल की गाथा के इस नए अध्याय में उपमहाप्रबंधक (मानव संसाधन) संजय बर्नवाल पर गंभीर आरोप हैं कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर सरकारी धन को पत्नी, साले और बहनोई से जुड़ी कंपनियों तक पहुंचाने का रास्ता तैयार किया।
सूत्रों और दस्तावेज़ों के अनुसार, तथाकथित ‘मामा’ बर्नवाल के संरक्षण में संजय बर्नवाल ने पहले टोल टैक्स एवं अन्य साम्राज्य खड़ा किया और फिर उसका MPRDC से MPBDC तक विस्तार किया।
टोल नाकों से लेकर टेंडरों तक_एक ही कंपनी का दबदबा
पूर्व के खुलासों में यह सामने आ चुका है कि विभाग द्वारा संचालित अधिकांश टोल नाकों पर MPSD Force Pvt Ltd के माध्यम से कब्जा जमाया गया। आरोप है कि नियमों की अनदेखी कर इस कंपनी को बार-बार लाभ पहुंचाया गया, जबकि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश थे कि टोल प्लाजा पर महिला स्व-सहायता समूहों को प्राथमिकता दी जाए।
दावा है कि इस निर्देश को दरकिनार कर निजी एजेंसी को फायदा पहुंचाया गया, जिससे शासन की नीति और मंशा दोनों पर सवाल खड़े होते हैं।
MPRDC में ‘करोड़ों का खेल’: पत्नी और साले की कंपनियों तक पहुंचा सरकारी पैसा
सबसे गंभीर आरोप मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर हैं। उपलब्ध
दस्तावेज़ों के अनुसार, MPSD Force Pvt Ltd से ₹30,64,818 की राशि सीधे संजय बर्नवाल की पत्नी रीना बर्नवाल और साले रोहित बर्नवाल की कंपनी ‘Smoob Unity LLP’ को ट्रांसफर की गई।
सूत्रों और सबूतों का दावा है कि यह भुगतान किसी स्वतंत्र व्यावसायिक लेन-देन का नहीं बल्कि सरकारी ठेकों से उपजे कमीशन अथवा अवैध साझेदारी का हिस्सा है।
उपकरण, वाहन और स्टेशनरी—हर रास्ता ‘घर’ तक
दस्तावेज़ बताते हैं कि 30 जनवरी 2023 को ₹22,62,920 के टैबलेट और कवर की खरीदी Smoob Unity LLP के माध्यम से की गई। यह खरीदी क्रियान्वयन एजेंसी MPRDC द्वारा नवगठित हो रही MPBDC के लिए की गई बताई जा रही है।
इस पूरी प्रक्रिया में प्रबंधक (वित्त) सुनील कुमार सिंह की भूमिका भी सवालों के घेरे में है, जो संजय बर्नवाल के बहनोई बताए जाते हैं। इस खरीदी का Smoob unity Llp को परचेसिंग ऑर्डर स्वयं सुनील कुमार द्वारा दिया गया।
इतना ही नहीं, MPRDC/BDC में लगने वाले वाहनों का भुगतान और स्टेशनरी की खरीदी भी थर्ड पार्टी के जरिए घुमाकर पत्नी की कंपनी ‘महावीर सेल्स’ के खातों में पहुंचाए जाने के आरोप हैं।
शासकीय सेवा नियमों की खुली अवहेलना
केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 नियम 4 और 9 के अनुसार: कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने पद का उपयोग निजी या पारिवारिक लाभ के लिए नहीं कर सकता। यदि अधिकारी के परिवार के सदस्य (पत्नी/पति, पुत्र, पुत्री, भाई-बहन, साला, समधी आदि) का विभागीय कार्यों से आर्थिक जुड़ाव है तो नियमों के उलंघन की श्रेणी में आता है।
मध्यप्रदेश/राज्य सेवा आचरण नियम (यदि राज्य का मामला है) कहता है कि अधिकारी के रिश्तेदार यदि उसी विभाग में ठेके या सप्लाई का काम करते हैं तो वह प्रथम दृष्टया अनियमित माना जाता है। यदि यह सिद्ध हो जाए कि अधिकारी ने_टेंडर, भुगतान, निरीक्षण, स्वीकृति में भूमिका निभाई है तो अनुशासनात्मक कार्यवाही तय है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम,1988 अनुसार यदि रिश्तेदार को:_अनुचित लाभ मिला, नियमों की अनदेखी हुई, प्रतिस्पर्धा को नुकसान पहुँचा, तो यह मामला- धारा 7,13 (भ्रष्ट आचरण), आय से अधिक संपत्ति, आपराधिक षड्यंत्र का बन सकता है ?
साफ तौर पर यह पूरा मामला शासकीय सेवा आचरण नियमों, हितों के टकराव (Conflict of Interest) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम का सीधा उल्लंघन प्रतीत होता है। लिहाजा यह मामला केवल विभागीय जांच का नहीं बल्कि लोकायुक्त, ईडी और आयकर जांच की मांग करता है।फिलहाल, यह पूरा मामला प्रदेश की प्रशासनिक पारदर्शिता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है, और अब निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यद्यपि सरकार ने बर्नवाल एवं इसके तथाकथित साम्राज्य पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है।
खुलासा क्रमशः..
