बारिश ने उधेड़ दी ‘विकास’ की परतें, सिस्टम फिर फेल
ग्वालियर 27 जनवरी 2026। हिमालय और उत्तर भारत में बने कम दबाव के क्षेत्र का असर जैसा कि मौसम विज्ञानियों ने पहले ही जताया था, ग्वालियर-चंबल अंचल में पूरी तीव्रता के साथ देखने को मिला। मंगलवार को दोपहर 11 बजे के बाद मौसम ने अचानक करवट ली और देखते-देखते आसमान पर काले बादलों ने कब्ज़ा जमा लिया। दोपहर होते-होते दिन में ही रात जैसा अंधेरा छा गया, हालात ऐसे बने कि सड़कों पर चल रहे वाहन चालकों को दिन में ही हेडलाइट जलाने को मजबूर होना पड़ा।
अपराह्न करीब 2 बजे से शुरू हुई हल्की बारिश शाम 5 बजे तक आते-आते मूसलाधार में बदल गई। अंधेरा घिरते-घिरते तेज बारिश ने पूरे ग्वालियर-चंबल अंचल को अपने आगोश में ले लिया। बेमौसम बरसात ने न केवल मौसम की मार डाली, बल्कि ग्वालियर के ‘तैयार सिस्टम’ की पोल भी खोल दी।
तेज बारिश होते ही शहर की सड़कों ने नहरों का रूप ले लिया। छोटे-बड़े सभी मार्ग जलमग्न हो गए। जगह-जगह जलभराव के कारण वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वैसे ही जाम से जूझने वाला ग्वालियर शहर बारिश के साथ पूरी तरह ठप नजर आया। सड़कों पर पानी, ऊपर से तेज बारिश और कड़ाके की सर्दी—हजारों लोग घंटों तक सड़कों पर ही फंसे रहे।
रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, गोला का मंदिर, बारादरी, गोविंदपुरी, दाल बाजार, नदीगेट, गस्त का ताजिया, नई सड़क, लक्ष्मीगंज, महाराज बाड़ा, माधवगंज सहित शहर के तमाम प्रमुख मार्गों और चौराहों पर लंबा ट्रैफिक जाम देखने को मिला। कई स्थानों पर सीवर उफन पड़े, तो निचली बस्तियों में जलभराव से लोगों के घरों तक पानी पहुंच गया। मूसलाधार बारिश के बीच वहां रहने वाले नागरिक अनहोनी की आशंका से सहमे रहे।
हैरानी की बात यह रही कि पिछली बरसात के बाद बड़े-बड़े दावे और खोखले वादे करने वाला ग्वालियर नगर निगम और प्रदेश सरकार का अमला कहीं नजर नहीं आया। कागजों में स्वच्छ, सुंदर और स्मार्ट सिटी बनाने वाले जिम्मेदार अधिकारी जमीनी हकीकत से कोसों दूर दिखे। शहर और शहरवासी एक बार फिर भगवान भरोसे छोड़ दिए गए।
हर बरसात में डूबने वाला ग्वालियर यह सवाल पूछ रहा है_
क्या यही विकास है? क्या यही स्मार्ट सिटी की तस्वीर है?
और सबसे बड़ा सवाल_ग्वालियर के अच्छे दिन आखिर कब आएंगे?
