बीएसी-जनशिक्षक नियुक्ति बना ‘नियमों का अंतिम संस्कार’
रतलाम 26 जनवरी 2026। रतलाम जिले में अकादमिक खंड समन्वयक (बीएसी) और जनशिक्षकों की नियुक्ति को लेकर जारी आदेश अब प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि खुला नियम-विरोध और न्यायिक अवहेलना बन चुका है।
हाईकोर्ट जबलपुर व इंदौर खंडपीठ तथा राज्य शिक्षा केंद्र के स्पष्ट आदेशों को ताक पर रखकर रतलाम में ऐसी चयन सूची जारी की गई है, जिसने पूरी शिक्षा व्यवस्था की निष्पक्षता पर ही सवालिया निशान लगा दिया है।
कूलिंग टाइम का बहाना, कोर्ट आदेश दरकिनार
राज्य शिक्षा केंद्र के 04 जून 2019 (क्रमांक 3254) के निर्देशों में साफ कहा गया है कि प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत जनशिक्षकों को काउंसलिंग में शामिल किया जाए, बावजूद इसके रतलाम जिले में इन्हें काल्पनिक “दो साल का कूलिंग टाइम” बताकर बाहर कर दिया गया।
हैरानी की बात यह है कि मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में इन्हीं जनशिक्षकों को पुनः शामिल किया गया, लेकिन रतलाम में अलग कानून चला दिया गया।
वरिष्ठता सूची गायब, आवेदन आधारित चयन — किसे फायदा?
नियमों के मुताबिक चयन माध्यमिक शिक्षकों की वरिष्ठता सूची से होना था, लेकिन रतलाम जिले में _वरिष्ठता सूची को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया और सीधे आवेदन मंगवाकर चयन कर लिया गया। परिणामस्वरूप_ प्राथमिक शिक्षक, जिन्हें केवल उच्च पद प्रभार मिला है, चयन सूची में शामिल जबकि प्रधानाध्यापक एवं पात्र माध्यमिक शिक्षक बाहर और पात्रता नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई।
राज्य शिक्षा केंद्र के अनुसार बीएसी और जनशिक्षक पद हेतु केवल यूडीटी और माध्यमिक शिक्षक ही पात्र हैं लेकिन रतलाम में —
उच्च पद प्रभार वाले प्राथमिक शिक्षकों को पात्र बना दिया गया
वहीं उच्च पद प्रभार वाले माध्यमिक शिक्षकों को अपात्र घोषित कर दिया गया
यह निर्णय शासन के नियमों का खुला उल्लंघन माना जा रहा है।
वरिष्ठता और विषय योग्यता में भी ‘सेटिंग’?
चयन सूची में कई शिक्षकों की वरिष्ठता का गलत निर्धारण एवं विषय आधारित शैक्षणिक योग्यता की अनदेखी ने पूरी प्रक्रिया को संदिग्ध और पूर्व नियोजित बना दिया है। परीक्षा से ठीक पहले शिक्षा व्यवस्था से ऐसा खिलवाड़ क्यों किया गया।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि 7 फरवरी से वार्षिक परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं, और ठीक इससे पहले
* जल्दबाजी में नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति
* स्कूलों से अनुभवी शिक्षक हटाने की तैयारी
क्या यह जानबूझकर शिक्षा व्यवस्था को अस्थिर करने की कोशिश है?
ये जवाब अब कौन देगा:- क्या रतलाम जिले के अधिकारियों ने उच्च अधिकारियों को गुमराह किया?
क्या यह चयन प्रक्रिया पूर्व निर्धारित नामों को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई?
क्या शासन इस पर जांच बैठाएगा, या फिर नियमों की यह हत्या यूँ ही दबा दी जाएगी?
रतलाम की शिक्षा व्यवस्था आज कटघरे में है। अब देखना यह है कि न्याय होगा अथवा मनमानी की जीत।
