डबरा के सीएम राइस स्कूल (सांदीपनि विद्यालय) में बड़ा घोटाला, जांच पर भी सवाल
ग्वालियर-डबरा। डबरा स्थित सांदीपनि विद्यालय (सीएम राइस स्कूल) में पिछले/ सत्र 2025–26 के दौरान 40 लाख रुपए से अधिक की खरीदी में भारी भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हॉस्टल एवं विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के उपयोग हेतु कुर्सी-टेबल व अन्य शैक्षणिक सामग्री की खरीदी के लिए मोटी राशि आवंटित की गई, लेकिन वास्तविकता में महज 4 से 5 लाख रुपए का ही सामान मौके पर मौजूद पाया गया। शेष राशि केवल फाइलों और कागजों तक सीमित रह गई।
सूत्रों के अनुसार यह पूरा घोटाला विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षा विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया, जहां सरकारी राशि खुलेआम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दी गई।
भोपाल लोक शिक्षण के आदेश भी बेअसर!
आज तक पद पर जमे हैं प्राचार्य: इस पूरे मामले में एक और
गंभीर पहलू सामने आया है। मध्यप्रदेश लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल के संयुक्त संचालक द्वारा 5 अगस्त 2025 को कड़े शब्दों में ग्वालियर के संयुक्त संचालक अरविंद सिंह को निर्देश दिए गए थे कि “जांच को निष्पक्ष एवं स्वतंत्र बनाए रखने के लिए संबंधित प्राचार्य राकेश तोमर को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए।”
लेकिन हैरानी की बात यह है कि आज दिनांक तक प्राचार्य अपने पद पर यथावत बने हुए हैं, जबकि इस मामले में एफआईआर तक दर्ज हो चुकी है। यह स्थिति साफ तौर पर लोक शिक्षण विभाग के आदेशों की खुली नाफरमानी, अवहेलना और संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
क्या जांच घपले की दिशा में..
ज्वाइंट डायरेक्टर की चुप्पी और बीईओ के जवाब भी संदेह के घेरे में बड़े सवाल खड़े कर रहे हैं। इस प्रकरण की जांच डबरा ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (बीईओ) आकाश धाकरे द्वारा की जा रही है। लेकिन जांच की प्रगति को लेकर उनके बयान भी कई सवाल पैदा कर रहे हैं।
बीईओ धाकरे ने कहा_ “खरीदी कितने की हुई, यह अभी बता पाना मुश्किल है। जांच चल रही है, 7 दिवस के भीतर प्रतिवेदन सबमिट कर दिया जाएगा। जांच के दौरान प्राचार्य को पद से क्यों नहीं हटाया गया, यह मेरा विषय नहीं है और अभी जांच में क्या प्रोग्रेस है, यह बताना मुमकिन नहीं।”
जहां बीईओ के इस गोलमोल जवाब ने जांच की निष्पक्षता पर संदेह पैदा कर दिया है। वही पूरे मामले में ग्वालियर संभाग के संयुक्त संचालक अरविंद सिंह न सिर्फ भोपाल से मिले निर्देशों का पालन करने में विफल रहे, बल्कि मीडिया से बातचीत करने से भी कतराते नजर आ रहे हैं। यह चुप्पी अब सवाल बन चुकी है— क्या उच्च स्तर पर भी इस घोटाले को संरक्षण दिया जा रहा है?
छात्र भुगत रहे सजा, अभिभावकों में आक्रोश
इस तथाकथित घोटाले का सीधा असर विद्यालय में पढ़ रहे छात्र -छात्राओं पर पड़ रहा है। हॉस्टल व कक्षाओं में आवश्यक फर्नीचर और सुविधाओं के अभाव में छात्रों को भारी असुविधा हो रही है। इसे लेकर अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों में जबरदस्त नाराजगी है। लोगों का कहना है कि बच्चों के नाम पर आई सरकारी राशि को डकार लिया गया और विभाग के वरिष्ठ एवं जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
आमजन के सवाल जो अब जवाब मांगते हैं: 40 लाख की राशि आखिर गई कहां? भोपाल के स्पष्ट आदेश के बावजूद प्राचार्य अब तक पद पर क्यों हैं? क्या जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है? जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या लोक शिक्षण संचालनालय अपने आदेश की नाफरमानी पर संयुक्त संचालक के खिलाफ संज्ञान लेगा ?
डबरा के सीएम राइस स्कूल का यह मामला अब केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि शिक्षा विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और जवाबदेही के अभाव का बड़ा उदाहरण बन चुका है। अब देखना होगा कि शासन इस पर कब और कितना सख्त कदम उठाता है अथवा जांच एवं वरिष्ठ अधिकारियों की खाली कमाई के इजाफा तक सीमित रह जाता है ?
