महाराणा प्रताप बलिदान दिवस पर विशेष
बृजराज सिंह, भोपाल। आज महान वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का बलिदान दिवस है। यह दिवस केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि राष्ट्र स्वाभिमान, स्वतंत्रता और आत्मसम्मान के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वाले अद्वितीय योद्धा के स्मरण का अवसर है।
महाराणा प्रताप ने मुगल सत्ता के समक्ष कभी भी झुकना स्वीकार नहीं किया। घोर संकट, वनवास, अभाव और परिवार के कष्टों के बावजूद उन्होंने मेवाड़ की आन-बान-शान से समझौता नहीं किया। हल्दीघाटी का युद्ध भारतीय इतिहास में आज भी पराक्रम, साहस और आत्मबलिदान का प्रतीक माना जाता है। उनका जीवन यह सिखाता है कि राष्ट्र और आत्मसम्मान से बड़ा कोई सुख नहीं होता। घास की रोटियाँ खाने का कष्ट स्वीकार कर लिया, परंतु विदेशी अधीनता को स्वीकार नहीं किया—यही महाराणा प्रताप की महानता है। उनका घोड़ा चेतक भी स्वामीभक्ति और वीरता का अमर उदाहरण बन गया। बलिदान दिवस पर आज देशभर में महाराणा प्रताप को नमन, वंदन और स्मरण किया जा रहा है। विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रवादी संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित कर उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया जा रहा है।
महाराणा प्रताप केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज की पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं—जो सिखाते हैं कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों, यदि संकल्प अडिग हो तो राष्ट्र और धर्म की रक्षा संभव है।
वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप अमर रहें।
उनका त्याग, उनका स्वाभिमान और उनका शौर्य युगों-युगों तक राष्ट्र को प्रेरित करता रहेगा।
