19 फरवरी तक जवाब तलब, 27 को सदन में होगा खुलासा..
भोपाल, बृजराज सिंह। प्रदेश में टोल संचालन और कथित अनियमितताओं को लेकर ‘युग क्रांति’ में प्रकाशित खबरों का हंगामा अब विधानसभा तक पहुंच गया है। लोक निर्माण विभाग अंतर्गत मप्र सड़क विकास निगम (MPRDC) द्वारा संचालित टोल प्लाजा के संचालन, वसूली व्यवस्था, आउटसोर्सिंग और राजस्व संबंधी सवालों पर एक के बाद एक_ पांच विधायकों के कई प्रश्न विधानसभा सचिवालय में दर्ज हुए हैं।
इन प्रश्नों की उत्तर भेजने की अंतिम तिथि 19 फरवरी 2026 निर्धारित की गई है, जबकि 27 फरवरी 2026 को सदन में उत्तर दिया जाना प्रस्तावित है। यानी अब पूरा मामला आधिकारिक जवाब के इंतजार में है।
किन -किन मुद्दों पर मांगी गई जानकारी?..
मध्य प्रदेश की पांच विधानसभा क्षेत्र_ सुसनेर, तराना, अमरपाटन, अटेर एवं भांडेर के विधायकों द्वारा सवाल उठाए गए हैं। विधानसभा में दर्ज प्रश्नों में मुख्य रूप से निम्न बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी तलब की गई है—
*एमपी रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा संचालित टोल प्लाजाओं की संख्या, अवधि और वसूली का विवरण
* यूजर फी, बीओटी, बीओटी(टोल प्लस एन्युटी), ओएमटी एवं अन्य कैटिगरी के तहत स्वीकृत टोल परियोजनाओं की स्थिति
*2019-20 से जनवरी 2026 तक टोल से प्राप्त कुल राशि का मार्गवार और माहवार ब्यौरा
*क्या किसी टोल प्लाजा की वसूली अवधि पूर्ण होने के बाद भी संचालन जारी है?
*अवैध वसूली, मारपीट अथवा शिकायतों पर विभागीय कार्रवाई का विवरण
*आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से संचालन की प्रक्रिया और मैनपावर तैनाती की स्थिति
कुछ सदस्यों ने ध्यानाकर्षण सूचना के माध्यम से यह भी आरोप लगाया है कि टेंडर प्रक्रिया और संचालन व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
अभी सरकार का औपचारिक जवाब शेष..
अहम तथ्य यह है कि इन प्रश्नों पर अभी तक सदन में कोई आधिकारिक उत्तर प्रस्तुत नहीं हुआ है। विभाग को 19 फरवरी तक लिखित जवाब भेजना था और 27 फरवरी को सदन में तथ्य रखे जाएंगे।
इसलिए फिलहाल मामला “जवाब लंबित” की स्थिति में है। सरकार का आधिकारिक पक्ष और विस्तृत आंकड़े 27 फरवरी के बाद ही सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होंगे।
राजनीतिक और प्रशासनिक असर..
टोल संचालन से जुड़ा मामला सीधे जनता और राजस्व से संबंधित है। ऐसे में विधानसभा में दर्ज प्रश्नों ने इस मुद्दे को औपचारिक जांच और जवाबदेही के दायरे में ला दिया है।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि—
*विभाग कितनी पारदर्शिता से आंकड़े प्रस्तुत करता है,
*यदि अनियमितताएं सामने आती हैं तो क्या कार्रवाई होती है,
*और क्या टोल नीति में किसी प्रकार के संशोधन की जरूरत सामने आती है
स्पष्ट है कि ‘युग क्रांति’ में उठाए गए सवाल अब विधानसभा की कार्यवाही का हिस्सा बन चुके हैं। लिहाजा कहा जा सकता है कि अपने नाम की सार्थकता के अनुरूप युग क्रांति द्वारा उठाया गया सड़क का मुद्दा जोर शोर के साथ सदन तक पहुंच गया है। 27 फरवरी को सदन में पेश होने वाले उत्तर से पूरे मामले की तस्वीर और साफ होगी।
