जात-पात को छोड़ेंगे, हिंदुओं को जोड़ेंगे – अनिल चौधरी
ग्वालियर। मनु की संतान मनुष्य और आदम की औलाद आदमी कहलाई। बस भाषा का अंतर है, पिता का अंतर नहीं। हम सब के पिता, बाबा एक हैं। हमारी जन्मभूमि एक है, हमारी संस्कृति एक है, हमारे पुरखे एक हैं इसलिए हम सब भी एक हैं यह बात मध्यप्रदेश अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष नियाज मोहम्मद ने त्रिमूर्ति तिराहा ग्वालियर पर आयोजित समरसता दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में कहीं।
श्री मोहम्मद ने कहा आर्थिक दृष्टि से हमारे कार्य भिन्न हो सकते हैं। कोई फर्नीचर का काम कर रहा है, तो कोई लोहे का, कोई सोने चांदी का, कोई जूते चप्पल बनाने का, कोई सब्जी बेचने का, कोई पूजा करने का, कोई सफाई करने का, तो कोई मुनीम का यह सब कर्म हमारे आर्थिक स्रोत हैं। यह बंटवारे के लिए नहीं यह कर्म हमारे पेट की खातिर है। जन्मभूमि, संस्कृति और पुरखों की दृष्टि से हम सब एक हैं इसलिए हममें कोई जात-पात नहीं होना चाहिए। हमारे बीच कोई अलगाव नहीं होना चाहिए। हम पेट पालने जो काम करें, जो धर्म, मजहब में रहे लेकिन हम सब सबसे पहले मानव हैं, मनुष्य हैं और मानव ईश्वर की सर्वोत्तम कृति है। इससे अच्छी कृति ईश्वर ने कोई और नहीं बनाई। हमारा सौभाग्य है कि ईश्वर ने हमें मानव योनि में जन्म दिया और उससे भी बड़ा सौभाग्य है कि ईश्वर ने हमें भारत की माटी में जन्म दिया। हमारे बीच जहां कहीं भी अलगाव, मतभेद हैं उन्हें भूलाकर, समाप्त कर हम सबको एक शक्ति बनना है। क्योंकि जब हम शक्तिवान बनेंगे तभी हमारा राष्ट्र शक्तिवान बनेगा।
समरसता दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में अनिल चौधरी ने कहा समाज में फैला जातीय भेदभाव, जातीय विसंगति खत्म कर समरस समाज निर्माण करने का। समय आ गया है। यह जातिवाद हमारे देश को कमजोर कर रहा है। अखंड भारत बनाने के लिए हम सब हिंदुओं को एक साथ आना ही होगा इसलिए हम प्रण लें कि आज से जात-पात को छोड़ेंगे और हिंदुओं को जोड़ेंगे। श्री चौधरी ने कहा जातिवाद छोड़ना भारतीय राजनीति और सामाजिक सुधार के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण है। हमें जातिगत पहचान छोड़कर हिंदू पहचान के तहत एकजुट होना है। जातिगत मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्रहित में एक होना है। इसलिए हम प्रण लें की जात-पात को छोड़ेंगे हिंदुओं को जोड़ेंगे
जीवाजी विश्वविद्यालय के पूर्व कार्य परिषद सदस्य डॉ.शिवेंद्र राठौर ने कहा हम हिंदुस्तान में रहते हैं इसलिए हम सब हिंदू हैं। हमें ऐसे प्रयास करने हैं जिससे हम सभी एक सूत्र में पिरोये रहे। श्री राठौर ने बताया कवि ने कहा है “मंदिर बाटा, मस्जिद बाटी, बाटा अल्ला भगवान को। धरती बाटी, सागर बांटा, मत बांटो इंसान को” और यही संदेश हमें देश के कोने-कोने तक पहुंचना है और जो हमारे भाई भटक गए हैं उन्हें अपने साथ जोड़ना है।
इस अवसर पर अनिल चौधरी, नियाज मोहम्मद, निकुंज खरे, शिवेंद्र राठौर, विकास यादव, राजेंद्र परमार, जनवेद चौरसिया, रेखा कुशवाह, सुनीता किरार, बाली राठौर, देवेंद्र तोमर, पवन उपाध्याय, बीपी सिंह, विनय शर्मा, अशोक चौहान, महेंद्र सोलंकी, अमर गोस्वामी, चेतन मंडलोई, शैलेंद्र तोमर, रुक्मणी जोशी, सुशील कुशवाह, विनोद अवस्थी, राघवेंद्र जाट, कैलाश राठौर, बंटी कुशवाह, दिसंबर गुरु, विनोद अवस्थी, राजेंद्र गुरुले, लक्ष्मण राणा सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे। सभी ने “जात-पात को छोड़ेंगे, हिंदुओं को जोड़ेंगे”, “जात पात की करो विदाई, हम सब हिंदू भाई-भाई”, “भारत माता की जय”, “वंदे मातरम्” के गगन भेदी नारे लगाये।
