हनुमना चेक प्वाइंट पर आगजनी ने बढ़ाई चिंता, प्रशासन के सामने दोहरी चुनौती
भोपाल/ग्वालियर। मध्यप्रदेश में परिवहन/आरटीओ की स्थायी चेक पोस्ट बंद होने के बाद जुलाई 2024 से लागू की गई नई व्यवस्था_रोड सेफ्टी एंड एनफोर्समेंट चेकिंग प्वाइंट और मोबाइल यूनिट (उड़न दस्ते)—मानो अभी गंभीर चुनौतियों के घेरे में है। इस व्यवस्था के तहत ओवरलोडिंग, बिना परमिट/फिटनेस चल रहे वाहन, अवैध परिवहन और दस्तावेजों की सघन जांच की जा रही है। स्टाफ को बॉडी वॉर्न कैमरों से लैस किया गया है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
लेकिन जमीनी हकीकत में तस्वीर कुछ और ही नजर आ रही है। एक ओर नियमों के पालन में ढील का माहौल बनता दिखाई दे रहा है, तो दूसरी ओर तथाकथित दलालों और अराजक तत्वों की सक्रियता बढ़ती जा रही है। कई जिलों में चेकिंग प्वाइंटों पर परिवहन कर्मियों के साथ गाली-गलौज, हाथापाई, मारपीट के साथ चक्का जाम जैसी तमाम घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
हनुमना की घटना ने पार की सीमा..
हाल ही में हनुमना के चेक प्वाइंट पर शुक्रवार को हुई आगजनी की घटना ने हालातों की गंभीरता उजागर कर दिया। जानकारी के अनुसार, वाहन चालक से दस्तावेज मांगने पर विवाद इतना बढ़ा कि आगजनी तक की नौबत आ गई। चेक प्वाइंट प्रभारी की शिकायत पर हनुमना थाना में दीपक यादव और दो ट्रक चालकों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया गया है।
हालांकि मामला दर्ज होना तत्कालिक कार्रवाई है, परंतु सवाल यह है कि क्या यह बढ़ती अराजकता का स्थायी समाधान है? प्रारंभिक पड़ताल में इस घटना के पीछे कथित दलाल तंत्र की भूमिका की चर्चा भी सामने आई है।
प्रशासन के सामने दोहरी जिम्मेदारी..
नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी परिवहन विभाग पर है। विभाग के नवागत कमिश्नर उमेश जोगा के लिए यद्यपि यह समय परीक्षा का है मगर उनकी कुशाग्र पुलिसिंग एवं विभागीय अनुभव के सामने कोई बड़ी चुनौती नहीं है। उन्हें जहां एक ओर अवैध वसूली की शिकायतों पर सख्त अंकुश लगाना होगा, तो दूसरी ओर वाहन चालकों को नई व्यवस्था के प्रति जागरूक कर कड़ाई से लागू भी करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि चेक प्वाइंटों पर ओवरलोडिंग की सटीक जांच के लिए हाइट और वेट मापने वाले कांटों (वेज ब्रिज) की अनिवार्य व्यवस्था की जानी चाहिए। साथ ही, चेकिंग के दौरान स्थानीय पुलिस की मौजूदगी सुनिश्चित करना भी जरूरी है, ताकि शासकीय कार्य में बाधा डालने वालों पर तुरंत वैधानिक कार्रवाई हो सके।
जरूर इस बात की भी..
* सभी चेकिंग प्वाइंटों पर तकनीकी संसाधनों की उपलब्धता
* बॉडी वॉर्न कैमरों के फुटेज की नियमित मॉनिटरिंग
* दलाल तंत्र पर कड़ी कार्रवाई
* परिवहन कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना
*वाहन चालकों के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और जागरूकता अभियान
मध्यप्रदेश में परिवहन व्यवस्था को पारदर्शी और प्रभावी बनाने का उद्देश्य तभी सफल होगा जब कानून का भय और व्यवस्था पर विश्वास—दोनों साथ-साथ कायम रहें। हनुमना की घटना चेतावनी है कि यदि समय रहते कठोर और संतुलित कदम नहीं उठाए गए तो नई व्यवस्था की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग सकते हैं।
