15 लाख तक स्वास्थ्य कवरेज का प्रस्ताव
भोपाल 28 फरवरी 2026। मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए वरिष्ठ कांग्रेस विधायक एवं पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने ‘सार्वभौम निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधा’ को लेकर एक निजी सदस्य विधेयक (Private Member’s Bill) प्रस्तुत किया है। यह विधेयक भारतीय संविधान के अनुच्छेद 196 तथा मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष के स्थायी आदेश 25(1) के तहत प्रस्तुत किया गया है।
डॉ. सिंह ने स्पष्ट कहा कि स्वास्थ्य सुविधा किसी वर्ग विशेष का अधिकार नहीं, बल्कि हर नागरिक का मौलिक अधिकार होना चाहिए। उन्होंने प्रस्ताव रखा कि प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को, चाहे वह किसी भी वर्ग, जाति या आय समूह का हो, हर वर्ष ₹15 लाख तक का स्वास्थ्य कवरेज प्रदान किया जाए।
विधेयक की मुख्य मांगें – “इलाज का अधिकार”
सदन में चर्चा के दौरान डॉ. राजेंद्र सिंह ने तर्क दिया कि वर्तमान में लागू आयुष्मान भारत योजना का दायरा सीमित है तथा ₹5 लाख की राशि गंभीर बीमारियों के लिए अपर्याप्त है।
प्रस्तावित विधेयक में ये प्रमुख प्रावधान शामिल हैं:
यूनिवर्सल कवरेज:
योजना का लाभ अमीर-गरीब, किसान, व्यापारी, कर्मचारी, श्रमिक, जनप्रतिनिधि – सभी को मिले। केवल वे लोग अपात्र हों जिनके पास पहले से बेहतर निजी हेल्थ इंश्योरेंस उपलब्ध है।
₹15 लाख का सामान्य स्वास्थ्य बीमा:
प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष ₹15 लाख तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जाए।
गंभीर बीमारियों हेतु ₹25 लाख तक कवरेज:
किडनी ट्रांसप्लांट, लिवर ट्रांसप्लांट, कैंसर एवं अन्य जटिल सर्जरी के लिए कवरेज बढ़ाकर ₹25 लाख किया जाए।
डॉ. सिंह ने बताया कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के अंतर्गत प्रति परिवार ₹5 लाख तक का इलाज उपलब्ध है, परंतु पात्रता की शर्तों — गरीबी रेखा में नाम, राशन कार्ड, संबल योजना या मजदूर कर्मकार मंडल में पंजीयन — के कारण लगभग 52% परिवार ही लाभान्वित हो पा रहे हैं, जबकि 48% परिवार इस सुविधा से वंचित हैं।
उन्होंने प्रश्न उठाया कि हाल ही में भारत सरकार द्वारा 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी नागरिकों को बिना किसी जाति, धर्म, वर्ग या आय बंधन के आयुष्मान योजना में शामिल किया गया है। यदि वरिष्ठ नागरिकों को सार्वभौम निःशुल्क इलाज मिल सकता है, तो अन्य नागरिकों को यह अधिकार क्यों नहीं?
आईएएस-आईपीएस की तर्ज पर आम जनता का इलाज
विधायक ने सदन में कहा कि जब आईएएस और आईपीएस अधिकारियों तथा उनके आश्रितों को सेवाकाल और सेवानिवृत्ति के बाद भी शत-प्रतिशत निःशुल्क इलाज की सुविधा प्राप्त है, तो आम जनता के साथ यह भेदभाव क्यों?
उन्होंने “सबका साथ, सबका विकास” के नारे की याद दिलाते हुए स्वास्थ्य सुविधाओं में समानता सुनिश्चित करने की मांग की।
डॉ. सिंह ने अनुमान प्रस्तुत किया कि प्रदेश की जनसंख्या के आधार पर इस योजना पर वार्षिक लगभग ₹8 से ₹9 हजार करोड़ का व्यय आएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि_राष्ट्रीय स्तर की बीमा कंपनियों की भागीदारी से योजना संचालित की जा सकती है। इसे आयुष्मान भारत योजना से जोड़ा जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर सरकार जनहित में ऋण लेकर भी इसे लागू करे।
उन्होंने कहा कि “सरकार लाड़ली बहना योजना पर ₹23 हजार करोड़ खर्च कर रही है, जिसका हम विरोध नहीं करते। लेकिन यदि जनता की जान बचाने और मुफ्त इलाज देने के लिए सरकार को कर्ज भी लेना पड़े, तो मैं उसका भी समर्थन करूंगा। यह जनता का विधेयक है, सरकार इसका पूरा श्रेय ले, लेकिन इसे लागू करे।”
डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सामान्यतः विधानसभा में विधेयक सरकार (मंत्री) द्वारा प्रस्तुत किए जाते हैं, किंतु संविधान के अनुच्छेद 196 के अंतर्गत कोई भी विधायक निजी सदस्य के रूप में कानून का प्रस्ताव रख सकता है। मध्यप्रदेश विधानसभा के इतिहास में ऐसे अवसर अत्यंत कम रहे हैं जब किसी सदस्य ने इस प्रकार व्यापक जनहित का विधेयक प्रस्तुत किया हो।
प्रस्तावित विधेयक में किसी प्रकार का आय, जाति या वर्ग आधारित बंधन नहीं है। केवल वे संपन्न व्यक्ति अपात्र होंगे जिन्होंने पहले से निजी स्वास्थ्य बीमा ले रखा है। यह योजना पूर्णतः समावेशी होगी और इसे आयुष्मान भारत योजना से समन्वित किया जा सकता है। डॉ. राजेंद्र सिंह ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि इस जनहितकारी प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर इसे शीघ्र लागू किया जाए, ताकि मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवा को वास्तविक रूप से सार्वभौम और समान बनाया जा सके।
